ई मीडिया ब्रीफ में बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का कान कौन ‘पकड़’ रहा है !

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। आज सु’शांत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ज्योंही सीबीआई जांच के आदेश दिए, बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय मीडिया के सामने पूरे रौ में आ गए। लेकिन, वे जहां सु’शांत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती की औकात दिखा रहे थे, वहीं उसी दौरान के वीडियो-फुटेज उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रखा है। सब अपने-अपने नजरिए से उसकी व्याख्या कर रहे हैं, कसीदे गढ़ रहे हैं..

ट्वीटर-फेसबुक-व्हाट्सएप्प जैसे माध्यमों में पहले ये व्यंग्य उठाए गए कि भरी मीडिया में बिहार के पुलिस चीफ के कान कौन पकड़ रहा है? ऐसे कई फोटो शेयर किए गए, जो काफी चौंकाने वाले हैं। एक नजर में हर कोई यही मान रहा है।

हमने उन फोटो-वीडियो कि पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। हालांकि ये सच भी डीजीपी और मीडिया की शैली पर कई सबाल खड़े करते हैं। लेकिन बिहार के सुशासन में यही सब हो रहा है। हर तरफ समरथ न कछु दोष गोसाईं का आलम है।

दरअसल, फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की सीबीआई जांच के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट  का फैसला आया, बिहार के डीजीपी मीडिया के सामने खुलकर आ गए। वे एक पॉल्टिशियन की तरह जी भर बोले।

सच पुछिए तो एक डीजीपी के इस तरह के बयान बिहार में ही संभव है। खासकर जब विधानसभा चुनाव नजदीक हो और डीजीपी की भी अपनी राजनीतिक महात्वाकांक्षा हो।

अब रही बात जहां एक मीडियाकर्मी द्वारा गुप्तेश्वर पांडेय सरीखे डीजीपी के कान पकड़ते फोटो वायरल होने का तो उसका माजरा कुछ और है।

डीजीपी जिस समय मीडिया के सामने पूरे रौ में थे, उस वक्त एक मीडियाकर्मी अपने न्यूज चैनल के सवाल सुनाने और उसी नजरिए से जबाव पाने की कोशिश में जुटा था।

मीडियाकर्मी मोबाईल के हेडफोन को उनके कान में लगा रहा था, ताकि वह अपने चैनल के सवाल नीजि तौर पर डाल सके।  लेकिन बढ़ते कोरोना संक्रमण के दौर में एक डीजीपी का मास्क तक न पहनना और एक मीडियाकर्मी के हाथ बिना सेशल डिंस्टेंस-गलब्स के उनके कान तक पहुंचना कम गंभीर पहलु नहीं है, लेकिन ऐसे लोगों को उमेठता कौन है? बिहार है। बहार है। कुर्सी पर नीतीश कुमार हैं।

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