न्यायालय के आदेश को भी धत्ता बता रही है नालंदा पुलिस

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बिहारशरीफ (INR)। दबंगो की दबंगई अगर देखना हो तो सीधे बिहार शरीफ के भरावपर, मुरारपुर नौआ टोली वार्ड -37 में आकर देख सकते हैं। दबंगो के आगे पुलिस भी नतमस्तक है।या आप इसे पुलिस की मिलीभगत भी कह सकते हैं।

नालंदा निवासी दुखी ठाकुर के जमीन व रास्ते निकासी के जमीन पर जबरन दबंग लोगों के द्वारा अवैध रूप से कब्जा करने का मामला है। न्यायालय द्वारा इन दबंगो के विरुद्ध वारंट जारी कर गिरफ्तारी का आदेश पारित है। परंतु प्रशासनिक शिथिलता के कारण आज तक इन दबंगो के विरुद्ध कोई ठोस कारवाई नहीं की गई है। जिससे बेलगाम अतिक्रमणकारी दबंग किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में लगे रहते हैं।

क्या है मामला

इस संबंध मे पीड़ित दुखी ठाकुर बताते हैं कि उनके जमीन का कुल रकवा साढे तीन डिसमिल का है। जमीन पर रूम व दो शौचालय का निर्माण किया हुआ है।  रास्ते निकासी की गली मेरे जमीन के हिस्से में है लेकिन, दबंग व असामाजिक तत्वों से सांठगांठ रखने वाला भूषण ठाकुर पिता परमेश्वर ठाकुर, किशोरी ठाकुर, कृष्णा ठाकुर, प्रभू चंद ठाकुर सभी पिता सुरजु ठाकुर जबरन मेरे रास्ते को कब्जा कर रखा है।

दुखी ठाकुर का कहना है कि इन दबंगो का जमीन बसीकानुसार 16 हाथ उतर -दक्षिण  9 हाथ पुरब पश्चिम अर्थात 23 फीट लम्बा, 12 फीट चौडा है। इस जमीन के रास्ते का निकास बगल के गोतिया के घर से है लेकिन, बडे ही चालाकी से वे अपना मकान बना लिया, जिससे उन लोगो का निकास अवरूध हो गया और जबरन मेरी गली से निकास करने लगा। बाद में धीरे -धीरे जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करना शुरू कर दिया।

दुखी ठाकुर ने न्यायलय से लगायी गुहार

1994 मे दुखी ठाकुर के पुत्र अमरदीप कुमार द्वारा 144 का मुकदमा किया गया। उक्त मुकदमा का फैसला अनुमंडल दंडाधिकारी के द्वारा फैसला अमरदीप के पक्ष मे हुआ। इससे विपक्षी द्वारा हताश व परेशान होकर टायटिल सुट व टायटिल अपील का मुकदमा कर दिया गया।  उक्त दोनो मुकदमा का फैसला 2016 मे दुखी ठाकुर के पक्ष मे हुआ।

मारपीट मे गई दुखी ठाकुर की पत्नी की जान  

बताते चलें कि बीते 16 नबम्वर 2016 को जब दुखी ठाकुर न्यायालय के आदेश पर जमीन की घेराबंदी करने लगे तो दबंग विपक्षीयो के द्वारा मारपीट की गई।  मारपीट में दुखी ठाकुर की पत्नी मालती देवी की जान चली गई। वही हत्या का मुकदमा लहेरी थाना के कांड संख्या – 355/2016 मे दर्ज है। लेकिन आज तक न तो उन हत्यारो की गिरफ्तारी हुई है और न ही कोई प्रशासनिक पहल की गई।

पीड़ित दुःखी ठाकुर एवं उनके परिजनों ने इस संबंध में कई बार पुलिस अधीक्षक नालंदा से मिलकर हत्यारो की गिरफ्तारी के साथ न्याय की गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इस मसले पर कोई कारवाई नहीं हो पाई है।

न्यायालय के अभियुक्त को गिरफतार करने के आदेश का अनुपालन नहीं

हत्या के मुकदमा मे न्यायालय द्वारा सभी अभियुक्तो का जमानत रद्द करते हूए गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया है। न्यायालय के आदेश के आलोक में भी पुलिस हत्यारों की गिरफ्तारी में दिलचस्पी नहीं दिखा पा रही है। जिससे पुलिस पर सवाल उठना लाजिमी हो गया है।

इधर पुलिसिया शिथिलता के कारण भुषण ठाकुर, सुजीत ठाकुर, रोहित ठाकुर, रवि ठाकुर, प्रमिला देवी आदि लोगो के द्वारा प्रायः जान मारने की धमकी दिया जा रहा है। जिससे पीड़ित दुखी ठाकुर व उनके परिजनों में भय का माहौल व्याप्त है। कुल मिलाकर प्रमाणित होता है कि न्यायालय के आदेश पर किस प्रकार दबंगता भारी है।

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