आखिर अंतिम क्षण में ढलते लालू के बिहार नहीं आने के मायने ?

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क। बिहार की दो विधानसभा सीटों पर विधानसभा चुनाव हो रही है। यहाँ बड़ा रोचक मुकाबला होने की संभावना है। एनडीए जहाँ एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी है, वहीं महागठबंन की सारी गांठ खुली हुई नजर आती है। कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने से राजद की चुनौती बढ़ गई है।

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आखिर अंतिम क्षण में ढलते लालू के बिहार नहीं आने के मायने ?

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क। बिहार की दो विधानसभा सीटों पर विधानसभा चुनाव हो रही है। यहाँ बड़ा रोचक मुकाबला होने की संभावना है। एनडीए जहाँ एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरी है, वहीं महागठबंन की सारी गांठ खुली हुई नजर आती है। कांग्रेस के अलग चुनाव लड़ने से राजद की चुनौती बढ़ गई है।

लेकिन उतना नहीं कि हार-जीत के फैसले प्रभावित हों। मुकाबला काँटे का होगा। जितनी चुनौती तेजस्वी को अपनी तेज बचाने की होगी, उससे कहीं अधिक चुनौती नीतीश को अपनी छवि बचाने की। उधर कांग्रेस जितना जोर लगाएगी, राजद को उतना उतना नुकसान होने की आशंका क्षीण है।

इसी बीच के अहम चर्चा राजद सुप्रीमों के बिहार आने – न आने को लेकर शुरु हो गई है। चुनाव प्रचार के लिए लालू को 22 अक्टूबर को पटना आना था। उनके चुनावी कार्यक्रम भी तय हो गए थे। उन्हें 25 अक्टूबर को कुशेश्वरस्थान और 27 अक्टूबर को तारापुर में जनसभा को संबोधित करना था। बिहार की राजनीति में लालू के इस चुनावी अभियान शुरु करने का इंतजार उनके विरोधियों को भी अधिक था।

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लेकिन इसी बीच उनकी पत्नी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी मीडियो के सामने दो टूक कह दिया कि वे (लालू) चुनाव प्रचार में नहीं आ रहे हैं। उनका अभी एम्स में इलाज चल रहा है।

राबड़ी के इस बयान सब भौंचक रह गए। सोशल मीडिया पर भी उनकी सांसद पुत्री मीसा भारती द्वारा लालू की जारी तस्वीरों का हवाला देकर स्वभाविक चर्चा शुरु हो गई कि लालू तो स्वस्थ दिख रहे हैं। फिर बिहार आने से कन्नी काटने का मतलब?

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो आखिरी समय में लालू प्रसाद के चुनाव प्रचार का फैसला टलना नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की महत्ता पर मुहर लगाना है। लालू अपने पुत्र के बढ़ते कद में हिस्सेदारी नहीं चाहते।

प्रारंभिक आकलन के मुताबिक लालू दोनों सीटों पर राजद प्रत्याशियों की स्थिति को लेकर आश्वस्त हैं। उनके चुनाव प्रचार में आने से जीत का श्रेय पूरी तरह से उन्हें ही जाता। जैसा कि लालू खुद नहीं चाहते कि तेजस्वी का कद किसी भी तरह से कम आंका जाने लगे।

राजनीतिक विश्लेषक यह भी स्पष्ट करते हैं कि हालिया बागी हुए बड़े पुत्र तेजप्रताप ने लालू प्रसाद को दिल्ली में मीसा भारती के आवास में बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया था, लेकिन उनका इशारा अपने छोटे भआई तेजस्वी की ओर था।

चूकि तेजप्रताप के आरोपों का इस उपचुनाव में गलत संदेश जा रहा था, इसलिए लालू के पटना आने की बात प्रचारित की गई। स्वयं लालू ने भी राजद कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर को आनलाइन संबोधित करते हुए कहा था कि डाक्टरों की इजाजत लेकर वह जल्द ही पटना आएंगे।

सबसे बड़ी बात कि लालू प्रसाद के प्रचार में लगने से दूसरी गोलबंदी होने के भय भी सामने आने लगे कि कहीं वैसे मतदाता, जो तेजस्वी को लालू की परंपरागत लाइन से अलग प्रगतिशील युवा मानते हैं, वे बिदक न जाएं। अगर वे आक्रामक हो गए तो राजद प्रत्याशी को बड़ा नुकसान होने का खतरा है।

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