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    Thursday, May 30, 2024
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      बरसात बाद शुरु होगा बिहार का पहला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम

      पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में पांच एक्सप्रेस बनने वाले हैं। इनमें से तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के लिए गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की निर्माण प्रक्रिया इस साल बरसात के बाद शुरू होगी।

      यह छह और आठ लेन का बिहार का पहला एक्सप्रेसवे होगा, जिसमें नाममात्र के एंट्री प्वाइंट होंगे। यह सड़क सीधी होगी, इससे वाहनों की औसत रफ्तार सामान्य सड़कों से अधिक होगी। यह सड़क बिहार के आठ जिलों से करीब 416 किमी लंबाई में गुजरेगी।

      इन आठ जिलों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिला शामिल हैं। फिलहाल इस सड़क के निर्माण के लिए सर्वे हो चुका है। जमीन अधिग्रहण पूरा होने के बाद टेंडर के माध्यम से निर्माण एजेंसी का चयन होगा। इसकी अनुमानित लागत करीब 32 हजार करोड़ रुपये है।

      घटेगी गोरखपुर-सिलीगुड़ी की दूरीः

      भारतमाला परियोजना फेज-2 के तहत भारत-नेपाल सीमा के समानांतर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बन जाने से गोरखपुर और सिलीगुड़ी के बीच की दूरी 519 किमी ही रह जायेगी। गोरखपुर से सिलीगुड़ी जाने के लिए वर्तमान में कोई सीधी सड़क नहीं है। दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में अभी करीब 15 घंटे लगते हैं।

      गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बन जाने से यह समय घटकर केवल आठ घंटे रह जायेगा। यानी अगर कोई व्यक्ति से कार से सुबह आठ बजे सिलीगुड़ी के लिए चलेगा तो शाम चार बजे या इससे पहले वह अपनी मंजिल पर होगा।

      दिल्ली और पूर्वोत्तर के राज्यों में आवागमन की होगी सुविधाः

      इस एक्सप्रेसवे के बनने से बिहार और नेपाल के लोगों के लिए दिल्ली, उत्तराखंड सहित पूर्वोत्तर के राज्यों में आवागमन में सुविधा होगी। यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर-आजमगढ़ लिंक एक्सप्रेसवे सहित अन्य मार्गों से भी जुड़ेगा। इससे सिलीगुड़ी से दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड के प्रमुख शहरों की यात्रा आसान हो जायेगी।

      दूसरी तरफ दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने वालों को पूर्वोत्तर के राज्यों यानी सिक्किम, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा आवागमन में सुविधा होगी। इस परियोजना का सबसे अधिक लाभ बिहार को होगा। इसके बनने से बिहार के उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न जिलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

      सामरिक नजरिये से भी महत्वपूर्ण है सड़कः

      नेपाल की सीमा के करीब बनने वाले इस एक्सप्रेसवे का सामरिक नजरिए से भी बहुत महत्व है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में 84.3 किमी, बिहार में आवागमन में होगी सुविधा में 416.2 किमी और पश्चिम बंगाल में 18.97 किमी लंबाई में बनेगा। इसकी शुरुआत गोरखपुर के जगदीशपुर से होगी और कुशीनगर के तमुखीराज तहसील से बिहार के गोपालगंज में यह प्रवेश करेगा।

      बिहार में इस सड़क का सबसे अधिक हिस्सा 94 किमी लंबाई में मधुबनी जिले में है। वहीं, पश्चिम चंपारण जिले में 33.4 किमी, पूर्वी चंपारण में 72.5 किमी, शिवहर में 24.8 किमी, सीतामढ़ी में 42.7 किमी, सुपौल में 37 किमी, अररिया में 48.5 किमी और किशनगंज में 63.2 किमी सड़क बनेगी। यह एक्सप्रेसवे आबादी वाले क्षेत्रों से नहीं गुजरेगा। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होने के चलते इसके आसपास और बीच में पेड़-पौधे होंगे।

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