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Friday, September 24, 2021
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    बोले सीएम- ‘एके 47 तो है पर गोली नहीं, केन्द्र सरकार से नहीं मिल रहा अपेक्षित सहयोग

    टीवी न्यूज चैनल NDTV को दिये इंटरव्यू में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से जब पूछा गया कि कोरोना से लड़ाई में उनकी सरकार की कितनी सफल रही है तो सीएम ने कहा कि सरकार की तैयारी काफी मजबूत रही है। देशव्यापी लॉकडाउन से पहले ही सरकार ने काफी तैयारी कर ली थी। लेकिन वास्तविकता यही है कि राज्य के पास आज AK 47 तो है। लेकिन उसे चलाने के लिए गोली नहीं है

    एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क।  कोरोना महामारी से लड़ाई लड़ रही हेमंत सरकार ने एक बार फिर केंद्र से राज्य को भरपूर सहायता नहीं मिलने की बात की है। इस इंटरव्यू में सीएम ने कोरोना से लड़ाई में सरकारी की तैयारी और केंद्र से काफी कम सहयोग मिलने की बात को प्रमुखता से रखा है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार केंद्र से जितना सहयोग चाहती है, उतना तो मिलेगा ही नहीं।

    ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना को देखते हुए राज्य ने केंद्र से 300 के करीब थर्मल स्कैनर मांगा था। लेकिन मिला केवल 100। राज्य में 4500 पंचायत और सैकड़ों थाने की संख्या को देखते हुए यह काफी कम है।

    हेमंत सोरेन से जब पूछा गया कि झारखंड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या काफी कम है। इसे वे सरकार की सफलता कहेंगे या उन्हें पता ही नहीं है कि वास्तविकता क्या है। यह सवाल इसलिए क्योंकि राज्य में मरीजों की टेस्टिंग अभी काफी कम हो रही है। साथ ही यह चर्चा जोरों पर है कि सरकार के पास संसाधन की काफी कमी है। पीपीई किट नहीं के बराबर है।

    इसपर हेमंत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार शांत बैठी है या मरीजों की टेस्टिंग कम हो रही है। लॉकडाउन होने के बावजूद राज्य में लगभग 2 लाख लोग ग्रामीण इलाके में पहुंच गये। ग्रामीण क्षेत्रों के बाहर ही उन्हें क्वारेंटाइन कर टेस्टिंग की जा रही है। इसलिए तो कोरोना मरीजों की संख्या नहीं के बराबर सामने आ रही है।

    कोरोना से लड़ाई में राज्य के पास संसाधन की काफी कमी है। अनुपात के हिसाब से राज्य में पीपीई किट की बड़ी कमी है। स्थिति यह है कि जैसे-जैसे केंद्र राज्य को संसाधन दे रही है, उसी हिसाब से सरकार स्टेप उठा रही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोरोना से ल़ड़ाई में केंद्र सक्षम नहीं है।

    अभी राज्य के पास 10,000 के बराबर पीपीई किट है। वहीं केंद्र से करीब 25,000 पीपीई की मांग की गयी है। हेमंत ने यह भी माना कि सरकार ने जितनी मांग की है, उतनी तो मिलेगी नहीं। राज्य में अभी वन वे टेस्टिंग (पीसीआर मशीन) की प्रकिया चल रही है। रैपिड टेस्टिंग नहीं हो पा रहा है। क्योंकि केंद्र से किट उपलब्ध नहीं की गयी है।

    उन्होंने कहा कि विभाग के स्तर पर रैपिड किट खऱीदने के साथ करीब 1 लाख से अधिक रैपिड टेस्टिंग की मांग केंद्र से की गयी है।

    प्रवासी मजदूरों को डीबीटी से आर्थिक मदद देने की पहल पर सीएम से पूछा गया कि यह कैसे संभव हो सकेगा कि पैसा उनके पास पहुंच ही पायेगा। इस पर सीएम ने कहा कि सरकार दो आयामों सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर काम कर रही है। केंद्र से मिल रही कम सहयोग को देख यह कहने में दिक्कत नहीं है कि स्वास्थ्य सेवा में अभी और बेहतर करने की जरूरत है।

    लेकिन सामाजिक सुरक्षा में सरकार काफी सफल रही है। राज्य के अंदर खाद्य आपूर्ति को सफलता पूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। बाहर फंसे लोगों के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। हर राज्य के लिए करीब 2-2 आइएएस अफसर को नोडर ऑफिसर बनाया गया है। कंट्रोल रूम में 100 से अधिक लोग 24×7 में काम कर रहे हैं। यहां आये फोन की जांच की गयी है कि कहीं ये फर्जी कॉस तो नहीं है।

    सीएम ने यह भरोसा दिलाया कि अगले दो दिनों में राशि ट्रांसफर की जाने लगेगी। अभी सरकार इन फंसे मजदूरों को 1000 रूपये आर्थिक मदद दे रही है। लेकिन अगर जांच के बाद मजदूरों की संख्या कम रही, तो यह राशि बढ़ाकर 2000 करने पर सरकार विचार करेगी। इसके अलावा केंद्र से भी आर्थिक मदद देने की मांग की गयी है।

    देश के समृद्ध राज्यों में मनरेगा मजदूरी दर काफी अधिक होने और पिछड़े राज्य में यह दर कम करने की केंद्रीय नीति पर भी सीएम सोरेन ने सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल में तो शिड्यूल और नॉन शिड्यूल एरिया के लिए मजदूरी दर अलग-अलग है।

    लेकिन झारखंड में तो शिड्यूल एरिया की संख्या काफी अधिक है। मनरेगा मजदूरी दर भुगतान के लिए केंद्र के पास करीब 600 करोड़ रूपये बकाया है। अभी हाल में पहला इंस्टालमेंट 103 करोड़ मिला है। हेमंत ने कहा कि जीएसटी के लगने के बाद तो वैसे ही राज्यों के राजस्व स्रोत खत्म हो चुके हैं।

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