8 मई से आयुक्त विहीन हो जाएगी राज्य सूचना आयोग !

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झारखंड राज्य में सरकार तो चल रही है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष अभी तक तय नहीं है। ऐसे में कमेटी नहीं बन पा रही और बहाली लटकी है। इस कमेटी में मुख्यमंत्री, कोई भी एक मंत्री और नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क।  झारखंड राज्य सूचना आयोग लंबे समय से आयुक्तों की कमी झेल रहा है। पिछले दो साल में दो बार विज्ञापन निकाला गया, लेकिन अब तक आयुक्तों के पद नहीं भरे गये।

वर्तमान सरकार की ओर से चार जनवरी को फिर से विज्ञापन निकाला गया। कार्मिक की ओर से निकाले गये इस विज्ञापन में लगभग 63 आवेदन आएं।

कार्मिक की ओर से इसके लिये सूची भी तैयार की ली गयी। आरटीआइ प्रावधानों के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति तीन सदस्यीय कमेटी करती है। जिसमें नेता प्रतिपक्ष भी एक सदस्य होते हैं।

आने वाले 8 मई को वर्तमान कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी भी रिटायर हो जायेंगे। हिमांशु शेखर चौधरी वर्तमान में राज्य के एक मात्र सूचना आयुक्त है। ऐसे में आठ मई के बाद आयोग निष्क्रिय हो जायेगा।

फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने में आयुक्तों के पदों को बहाल करने का निर्देश दिया। 27 फरवरी को कार्मिक विभाग की ओर से राज्य के लिये विज्ञापन जारी किया गया। जिसमें सूचना आयुक्तों की बहाली के लिये आवेदन आमंत्रित किये गये। इसकी अंतिम तारीख 10 अप्रैल थी।

इसके बाद भी पूर्व सरकार ने आयुक्तों के पदों को नहीं भरा। इसके बाद केंद्र सरकार ने आरटीआइ कानून में संशोधन किया। वर्तमान कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी ने जानकारी दी कि पूर्व में जो विज्ञापन जारी किया गया था, वो प्रक्रियाधीन ही था कि केंद्र ने कानून में बदलाव किया।

बदलाव के बाद यह तय हुआ कि बहाली नये प्रावधानों के तहत की जानी है। ऐसे में विज्ञापन रद्द किया गया। इसके बाद फिर से कार्मिक ने विज्ञापन जारी किया। इस विज्ञापन में आवेदन करने की अंतिम तारीख तीन फरवरी थी। 

वर्तमान सरकार ने छह पदों में लिये विज्ञापन जारी किया है। जिसमें एक मुख्य सूचना आयुक्त हैं। और पांच सूचना आयुक्त हैं।हालांकि आरटीआइ प्रावधानों की मानें तो किसी भी राज्य के सूचना आयोग में कम से कम दस सूचना आयुक्त होने चाहिये। राज्य में शुरू से इन पदों पर कमी रही है।

भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच की ओर इसके विरोध में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। प्रदर्शन पांच मई को होगा। केंद्रीय अध्यक्ष रविकांत पासवान का कहना है कि राज्य सूचना आयोग की स्थिति दिनों-ब-दिन बदतर होते जा रही है।

एक तो पूर्व सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को नजर अंदाज करते हुए तीन माह में बहाली की नहीं। जिसके बाद कानून में संशोधन के बाद फिर नया विज्ञापन जारी किया गया। अब नेता प्रतिपक्ष नहीं है। वहीं कोरोना महामारी के कारण कामकाज ठप है।

आठ मई को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त भी रिटायर हो जायेंगे। जिसके बाद आयोग में ताला लटक जायेगा। इसके विरोध में मंच से जुड़े कार्यकर्ता पांच मई को पांच घंटे का उपवास करेंगे। जो अपने-अपने घरों में ही किया जायेगा। इस दौरान सोशल मीडिया के जरिये लोग एक दूसरे से जुड़े रहेंगे।

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