एसपी कुमार आशीष ने गालियां देने वाले युवक का यूं किया सम्मान !

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इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए किशनगंज के एसपी कुमार आशीष ने कहा कि इस विषम परिस्थिति में किसी के लिए मददगार बनना अच्छा लगता है। यह मुश्किल घड़ी है और इंसानियत को जिंदा रखने का एक अवसर भी है…”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। बिहार में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन का यह प्रभाव आपको हैरान कर देगा। लॉकडाउन से परेशान कुछ युवकों ने पुलिस अधीक्षक को फोन कर गालियां दीं, लेकिन बदले में उन्‍हें जो सम्‍मान मिला, उससे वे हैरत में पड़ गए।

दरअसल, परेशान युवकों ने किशनगंज के एसपी को इसलिए गालियां दीं कि इस कारण उन्‍हें जेल भेज दिया जाए, जहां कम-से-कम रहने का ठौर और भोजन तो मिले। उन्‍हें रहने-खाने की सुविधा मिली, लेकिन जेल नहीं हुई।

दरअसल, गुरुवार की शाम में किशनगंज के एसपी कुमार आशीष को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गालियां देनी शुरू कर दी। एसपी ने धैर्य से पूरी गालियां सुनी, फिर विनम्रता से उसकी समस्या के बारे में पूछा।

मालूम हुआ कि बिहार के नवादा जिले से आठ मजदूर पैसे और भोजन के बिना पिछले तीन दिनों से गुजरात के सूरत में फंसे हुए हैं। उन युवकों ने सोचा कि किसी अधिकारी अथवा एसपी को गाली दें तो जेल जाना पड़ेगा। जेल में जिंदा रहने के लिए भोजन तो मिल ही जाएगा।

घटना की जानकारी देते हुए एसपी ने बताया कि समस्या उनके जिले की नहीं थी, ना ही वे फोन करने वालों से परिचित थे, इस कारण उन्होंने उनका नाम-पता नहीं पूछा। इसके बाद उन्होंने तुरंत नवादा के डीएम यशपाल मीणा को इसकी जानकारी दी। डीएम ने परेशान युवकों की यथासंभव मदद करने का आश्वासन भी दिया।

शुक्रवार को नवादा डीएम ने बिहार निवासी गुजरात के विभिन्न अधिकारियों के वॉट्सएप ग्रुप्‍स के माध्यम से संपर्क किया। उनके द्वारा फौरन सूरत में व्‍यवसायी तथा झारखंड के मूल निवासी अशोक केजरीवाल से संपर्क किया गया।

अशोक केजरीवाल सभी आठ मजदूरों को आवश्यक देखभाल के लिए सूरत में अपने फार्म हाउस पर ले गए। उन्‍हें खाना-आवास की सुविधा दी, साथ में हजार-हजार रुपये भी दिए। (इनपुटः जागरण)

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