शालिनी अस्पताल में मोबाईल के सहारे ऑपरेशन कर नवजात की ले ली जान

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-मुकेश भारतीय-

ओरमांझी। प्रखंड के रुक्का में केजीवीके द्वारा संचालित शालिनी अस्पताल में अमानवता की हद तब हो गई, डॉक्टर की अनुपस्थित में नर्सों ने ही एक प्रसुति का ऑपरेशन कर दिया, जिससे कि बच्चे की तत्काल मौत के साथ जच्चे की हालत दयनीय हो गई। नर्सों के चिकित्सक से मोबाईल पर बातचीत के जरिये ऑपरेशन करने की सूचना है। हांलाकि अस्पताल प्रबंधन प्रसुति के नार्मल डिलेवरी होने व किसी तरह के ऑपरेशन किये जाने से साफ इंकार कर रहा है।

करमा गांव निवासी सुरेन्द्र करमाली का आरोप है कि विगत 26 मई की शाम करीव 5.30 बजे वह अपनी 25 वर्षीया पत्नी सोनी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर महज आधा किलोमीटर दूर अवस्थित शालिनी अस्पताल में ले गया। वहां घंटा दर घंटा प्रसव हो जाने के आश्वासन दिये जाते रहे। करीब 10 घंटा बीत जाने के बाद सुबह करीब 3 बजे कहा गया कि प्रसुति की हालत खराब है, उसे यहां से जाएं। फिर किसी  तरह अनुनय विनय करने पर नर्सों ने ऑपरेशन कर डिलेवरी कराया गया।

बकौल सुरेन्द्र करमाली, ऑपरेशन के चंद मिनट बाद ही बच्चा मृत हो गया। उसके सिर और गर्दन पर जहां कैंची के कटे निशान थे, वहीं दोनों बांह भी टूटे थे। अस्पताल ने कुल ईलाज खर्च के रुप में 4600 रुपये का बिल थमा दिया गया।

पीड़िता की सास सुनीता देवी जो हर समय अपनी बहु के साथ थी, उन्होंने बताया कि अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था। प्रसुति की हालत बिगड़ती जा रही थी। अल्ट्रासाउंड होने के बाद उसे रात भर सिर्फ स्लाइन चढ़ाया जा रहा। फिर अस्पताल में मौजूद नर्सों की टीम ने किसी से मोबाईल पर निर्देश ले-लेकर ऑपरेशन करने लगी। प्रसुति के साथ सब जानवरों से भी वद्दतर व्यवहार का प्रदर्शन किया है। बच्चा की मौत नर्सों की लापरवाही से हुई है। अगर भर्ती के समय ही प्रसुति की हालत खराब थी तो उसे भर्ती के पूर्व ही कहीं अन्यत्र ले जाने की बात क्यों नहीं की गई।

इसके बाद ग्रामीणों के हंगामें को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल का खर्च नहीं ली और मृत बच्चा सहित जच्चा को छुट्टी दे दिया गया।

उधर, अस्पताल में इस घटना की बाबत कोई जानकारी नहीं दिया गया। अस्पताल का पक्ष जानने के लिए चिकित्सा प्रभारी मृदुला कश्चप से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन वहां उपस्थित दर्जन भर स्टाफ से मोबाईल नंबर की मांग की तो हर किसी ने मोबाईल नंबर उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।

कुछ देर बाद अस्पताल के प्रबंधक राना विकास ने अचानक फोन कर संवाददाता के अस्पताल पहुंचने की वजह की जानकारी ली। शायद किसी स्टाफ ने मीडियाकर्मियों के पहुंचने की गोपनीय जानकारी उन्हें दे दी थी।

प्रबंधक राणा विकास ने दूरभाष पर बताया कि परिजनों द्वारा प्रसुति को काफी बिलंब से लाया गया। वहां प्रशिक्षित नर्सों ने नॉर्मल डिलेवरी कराने का हरसंभव प्रयास हुआ है। उनकी जानकारी में कहीं कोई ऑपरेशन नहीं किया गया है। अगर कहीं कुछ गड़बड़ हुआ है तो इसकी जांच करायेगें।

 

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