लालू पर ‘शनि सजा’, क्या हाशिए पर चलें जाएंगे लालू ?

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पटना (जयप्रकाश नवीन )। रांची सीबीआई के विशेष कोर्ट द्वारा देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी के मामले में आखिरकार 72 घंटे के इंतजार के बाद लालूप्रसाद यादव को सजा सुनाई गई।

सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह ने लालूप्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा के साथ पांच लाख का अर्थ दंड सुनाया गया है। इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति की दशा और दिशा किस ओर जाएगी इसकी चर्चा जोरों पर है।

इधर पटना में लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में पहली बार राजद की एक बड़ी बैठक की गई।जिसमें राजद के सभी सांसद ,विधायक, जिलों से आए नेताओं ने शिरकत की।

बिहार में चारा घोटाला के बाद से ही लालू प्रसाद यादव के राजनीतिक भविष्य के अंत का कयास लगता रहा है ।लेकिन अटकले और भविष्यवाणी फेल होते रहा है। चारा घोटाला के एक मामले में उनका सजायाफ्ता होना उनके राजनीतिक कैरियर में कहाँ कोई फर्क पड़ा, जो राजनीतिक पंडित उनके राजनीतिक अंत की भविष्यवाणी करते रहें हैं? चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित लालू प्रसाद अपने जनाधार को 2015 के विधानसभा चुनाव में भुना चुके हैं ।

यह अलग बात है कि पूर्व सीएम  लालू प्रसाद यादव  इस वक़्त अपने राजनीतिक जीवन के सबसे  खराब दौर से गुजर रहे हैं। परिवार के कई लोग आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई और ईडी की कार्रवाई की जद में आए हुए हैं ।कई एजेंसियों की जांच चल रही है।

दूसरी तरफ 14 साल बाद  राज्य में एक शानदार जनादेश से बनी उनके महागठबंधन की सरकार रातों रात जा चुकी है।  सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब उनकी धुर-विरोधी भाजपा के साथ नई सरकार बना चुके हैं। महागठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे उनके पुत्र तेजस्वी सत्ता से बेदखल होकर सड़क पर आ गए हैं।

चारा घोटाला और आय से अधिक संपत्ति मामले में  घिरे लालू प्रसाद यादव के पास पहले जैसी राजनीतिक तेजस्विता भी नहीं बची है, जिसने उन्हें नब्बे के दशक में सामाजिक न्याय के एक कद्दावर नेता के रूप में स्थापित किया था।

90 के दशक में जब लालू प्रसाद यादव संसद या जनता के बीच बोलते थें तो पूरा देश ही नहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान और नेपाल के लोग भी उनकी भाषा शैली और बोलने के अंदाज पर हस हस कर लोट पोट हो जाया करते थें। संसद में बतौर सांसद या रेलमंत्री रहते उनके अंग्रेजी बोलने की शैली से विपक्ष के नेता ही नहीं पूरा सदन यहां तक की स्पीकर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाते थे ।

बिहार का एक ऐसा सीएम जिसके पास न कोई ज्यादा सुरक्षा चक्र होता था, न कोई घमंड और न ही सीएम पद का कोई रौब। पान की गुमटी हो या फिर चाय की दुकान वहाँ आम लोगों के बीच बैठने और खड़ा होने वाले किसी साधारण इंसान के बराबर उन्हें ला खड़ा करता था ।

चारा घोटाला के एक मामले में सजा का फैसला आने के बाद भले ही परिवार के लोगों को उनकी कमी खलेगी ।समर्थकों को निराशा होगी। लेकिन लालू प्रसाद अब अपने राजद और उसके नेतृत्व को लेकर ज्यादा चिंतित नही होंगे ।

उनके बिना राजद को नेतृत्व देने के लिए उनका उतराधिकारी है।  वहीं लालू प्रसाद यादव को भरोसा होगा कि उनकी तिगडी रघुवंश प्रसाद सिंह, अब्दुल बारी सिद्दीकी और जगदानंद सिंह सब संभाल लेंगे । पार्टी एक जुट रहेगी।

राजनीतिक पंडित भले ही बिहार में लालू प्रसाद यादव तथा राजद के राजनीतिक भविष्य को लेकर जो भविष्यवाणी करें लेकिन चारा घोटाला से जुड़ी मुसीबत का कोई खास राजनीतिक असर बिहार की राजनीति में फिलहाल नहीं दिखता है ।

लेकिन दूसरी तरफ आय से अधिक मामले में लालू परिवार की मुश्किलें कम नहीं होने वाली है । जिसका प्रभाव कहीं न कहीं राजद के राजनीतिक महौल पर असर तो करेंगा ही। इसकी संभावना दिख रही है।

अगर पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पर ईडी ने ज्यादा शिकंजा कसते हुए कही चार्जशीट लाती है तो राजद के लिए यह किसी खतरे की घंटी से कम नहीं होगा ।

लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है।जदयू के वरीय नेता के सी त्यागी ने इसे क्लोज चैप्टर बताया। वही लालू प्रसाद यादव के दोनों पुत्रों ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हम एकजुट है। हम और मजबूती से उभरेगे।

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