अलोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर पूर्व उप महापौर ने दी कोर्ट जाने की धमकी

“कल महापौर वीणा कुमारी के खिलाफ एक साजिश के तहत अविश्वास प्रस्ताव सौपें गया था, जबकि इसके पूर्व यही वार्ड पार्षदों ने उप महापौर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला कर उन्हें कुर्सी से उतार दिया था….”

बिहार शरीफ से दीपक विश्वकर्मा की रिपोर्ट

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। बिहार शरीफ नगर निगम की महापौर वीणा कुमारी के विरुद्ध लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर राजनीत गर्म हो गई है।

पूर्व उप महापौर फूल कुमारी ने इस प्रकरण को नियम कानून को ताख पर रखकर किये जाने का आरोप लगते हुए न्यायालय की शरण में जाने की धमकी दी है।

इस सम्बन्ध में फूल कुमारी ने नगर आयुक्त को पत्र सौपा है। पत्र में अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा गया है कि नगर विकास विभाग की अधिसूचना संख्या 4, जो बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 25 चार एवं धारा 419 द्वारा प्रदत शक्ति से प्रारूप के रूप में प्रकाशित है।

महापौर वीणा कुमारी……………

इस नियमावली के अंतर्गत महापौर एवं उप महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया तैयार की गई है। अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया नियमावली की धारा 2 धारा में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मुख्य पार्षद द्वारा REQUISITION की प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर नगर स्थानीय निकाय की बैठक बुलाने के लिए सूचना निर्गत की जाएगी और सूचना निर्गत होने की तिथि के 15 दिनों के भीतर बैठक का आयोजन किया जाएगा।

अर्थात REQUISITION  से नोटिस के बीच का समय कम से कम 7 दिन तथा नोटिस से बैठक की तिथि 15 दिन के भीतर होनी चाहिए और यह बैठक मात्र 5 दिनों के भीतर ही बुला ली गई है जो नियमावली के विरुद्ध है।

उन्होंने महापौर को दी गई स्वयं उनके विरुद्ध तथा अविश्वास प्रस्ताव नियमावली संसोधन के अनुसार यदि महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आता है तो उसे महापौर को संबोधित करना है।

पूर्व उपमहापौर फूल कुमारी……

इस आलोक में चुकी महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आया है और बिहार शरीफ नगर निगम में उप महापौर का पद रिक्त है। तत्पश्चात नियम संवत तिथि का निर्धारण होना चाहिए। पर किसी भी स्थिति में 7 दिनों से पहले बैठक का आयोजन किया जाना नियम के विरुद्ध है।

नियमावली का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी कहा है कि बिहार शरीफ नगर निगम में उप महापौर के निर्वाचन हेतु राज्य निर्वाचन चुनाव आयोग द्वारा 24 जुलाई को तिथि निर्धारित की गई है। तदनुसार हम सभी वार्ड पार्षदों को नोटिस भी प्राप्त हो चुका है।

ऐसी परिस्थिति में महापौर के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसकी तिथि 22 जुलाई करने से न केवल उप महापौर के चुनाव प्रभावित होंगे, बल्कि सरकार द्वारा पारित अध्यादेश का भी उल्लंघन होगा एवं प्रजातांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी होगी, जो भारतीय संविधान के अनुसार स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया का हनन माना जाएगा। इसलिए महापौर के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद ही इसकी बैठक होनी चाहिए।

उन्होंने कहा है कि नगर आयुक्त को प्रस्तावित बैठक करने का दायित्व है। इसीलिए उन्हें नियम एवं विधि से अवगत करा दिया जाए, ताकि जानबूझकर नियम का उल्लंघन न हो और मामला न्यायालय के अधीन न जाए।

उन्होंने नगर आयुक्त से अनुरोध किया है कि अविश्वास प्रस्ताव के संचालन की पूरी प्रक्रिया नियम और विधि के आलोक में किया जाए, ताकि सभी लोगों को न्याय मिल सके।

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