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JPSC परीक्षा में भारी गड़बड़ी: गवर्नर का बड़ा एक्शन, जांच के आदेश

“यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो यह मामला न केवल जेपीएससी (JPSC) बल्कि पूरे भर्ती तंत्र की साख को गहरा नुकसान पहुंचा सकता है…

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शुमार जेपीएससी (JPSC) की हालिया परीक्षाएं अब विवादों के घेरे में हैं। प्रश्न पत्रों और मॉडल उत्तर कुंजी में व्यापक त्रुटियों के सामने आने के बाद संतोष कुमार गंगवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एल. खिंग्यांते को पत्र लिखकर न केवल जवाबदेही तय करने को कहा है, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।

त्रुटियों का अंबार, 100 में 78 सवालों में गड़बड़ीः चार से 12 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा के दौरान 6 अप्रैल को लिए गए सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। कुल 100 प्रश्नों में से 78 में त्रुटियां पाई गईं। यह केवल टाइपिंग या अनुवाद की मामूली गलती नहीं थी, बल्कि कई प्रश्नों के अर्थ ही बदल गए थे, जिससे परीक्षार्थियों के बीच भारी भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई।

विशेष रूप से अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद में गंभीर चूकें देखने को मिलीं। उदाहरण के तौर पर ‘शहीद सिद्धो-कान्हू’ को ‘सिडो-कान्हू मिशनीयों’ लिखा गया। ‘सर्वोच्च न्यायालय’ को ‘सर्वोच न्यायातक’ कर दिया गया। ये त्रुटियां न केवल भाषा संबंधी लापरवाही को दर्शाती हैं, बल्कि परीक्षा की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती हैं।

पीटी परीक्षा में भी दोहराई गई लापरवाहीः सिर्फ मुख्य परीक्षा ही नहीं, बल्कि 19 अप्रैल को आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 (पीटी) में भी अशुद्धियों की भरमार रही। आयोग ने भले ही 24 घंटे के भीतर मॉडल उत्तर कुंजी जारी कर दी, लेकिन उसमें लगभग 75 उत्तर गलत पाए गए।

कुछ प्रमुख उदाहरण ‘डोकलो’ को ‘ठोकलो’, ‘पड़हा’ को ‘परहा’, ‘नीलांबर’ को ‘निलम्बर’, ‘सारंडा’ को ‘सारंदा’, ‘पाइका’ की जगह ‘पड़का’ लिखा गया हैं। इस स्तर की गलतियों ने न केवल परीक्षार्थियों को परेशान किया, बल्कि आयोग की तैयारी और समीक्षा प्रणाली की पोल खोल दी।

उत्तर कुंजी हटाने और संशोधन के बाद भी बनी रहीं खामियां: जब त्रुटियों की जानकारी सार्वजनिक हुई, तो आयोग ने तत्काल अपनी वेबसाइट से मॉडल उत्तर कुंजी हटा ली और संशोधित संस्करण अपलोड किया। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि संशोधित उत्तर कुंजी में भी कई गलतियां बनी रहीं। इससे अभ्यर्थियों का भरोसा और अधिक कमजोर हुआ।

राज्यपाल ने पारदर्शिता पर खतरा बतायाः राज्यपाल ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी में इस प्रकार की त्रुटियां न केवल अभ्यर्थियों में भ्रम पैदा करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। उन्होंने आयोग से अपेक्षा की है कि वह पारदर्शिता और उच्च मानकों को बनाए रखते हुए परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करे।

प्रणालीगत विफलता या मानवीय चूक? यह पूरा मामला केवल ‘टाइपिंग मिस्टेक’ तक सीमित नहीं दिखता। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्र निर्माण में बहुस्तरीय जांच का अभाव है। अनुवाद प्रक्रिया में विशेषज्ञों की भागीदारी नहीं ली गई । अंतिम प्रूफरीडिंग और मॉडरेशन कमजोर रहा। जेपीएससी जैसी संस्था राज्य की प्रशासनिक रीढ़ तैयार करती है, उसमें इस स्तर की चूकें एक गंभीर संस्थागत संकट की ओर इशारा करती हैं।

अभ्यर्थियों में आक्रोश, भविष्य को लेकर चिंताः परीक्षार्थियों का कहना है कि वे वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, लेकिन ऐसी गड़बड़ियां उनके करियर पर सीधा असर डालती हैं। कई अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग उठाई है।

सुधार या अविश्वास? अब निगाहें राज्यपाल द्वारा आदेशित जांच पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि दोषियों की पहचान कर कार्रवाई होती है या नहीं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुधार लागू किए जाते हैं या नहीं?

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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