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JSSC-CGL परीक्षा-परिणाम और नियुक्तियां रद्द, 2014 से बहाली परीक्षाओं की होगी जांच

छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा फैसला; TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों की प्रक्रिया भी रद्द, 2014 के बाद की नियुक्ति परीक्षाओं की जांच के लिए बनेगी व्यवस्था।

एक तरफ आंदोलनरत छात्रों को अपनी प्रमुख मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में न्यायिक आयोग की जांच और सरकार द्वारा गठित सुधार कमेटी की सिफारिशें यह तय करेंगी कि झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था किस दिशा में जाती है…

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया। प्रोजेक्ट भवन में करीब साढ़े चार घंटे चली मैराथन बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) परीक्षा, उसके परिणाम और इससे जुड़ी पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करने की घोषणा की। इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जिन्हें सीजीएल-2023 के परिणाम के आधार पर नियुक्ति मिली थी।

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि परीक्षा से प्रकाशित परिणाम, चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों से जुड़ी पूरी प्रक्रिया भी रद्द मानी जाएगी। सीजीएल परीक्षा के जरिए करीब 1,975 अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई थी।

आंदोलनरत छात्रों की पहली बड़ी मांग पूरी

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों में उत्साह देखने को मिला। छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की पहली बड़ी सफलता बताया। हालांकि आंदोलनकारियों का कहना है कि सीबीआई जांच की मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं, सदर अस्पताल में अनशन के दौरान इलाज करा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी अनशन समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन खत्म हुआ है, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा।

जांच के दायरे में 2014 के बाद की नियुक्ति परीक्षाएं

सरकार ने केवल सीजीएल तक फैसला सीमित नहीं रखा है। बैठक के बाद सामने आए निर्णय के मुताबिक वर्ष 2014 के बाद आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं की जांच करायी जाएगी। इससे झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और पूरी चयन व्यवस्था एक बार फिर व्यापक जांच के घेरे में आ गयी है।

सरकार ने जेपीएससी और सीजीएल परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए न्यायिक आयोग की भूमिका भी तय की है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गयी है।

सीजीएल-2023: परीक्षा से नियुक्ति तक लगातार विवाद

जेएसएससी-सीजीएल-2023 की प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों में रही। अक्टूबर 2023 में परीक्षा की संभावित तिथि निर्धारित की गयी थी, लेकिन इसे टाल दिया गया। इसके बाद दिसंबर 2023 में परीक्षा कराने की दूसरी तारीख घोषित हुई, मगर प्रशासनिक कारणों से इसे भी स्थगित करना पड़ा।

इसके बाद 28 जनवरी 2024 को परीक्षा आयोजित हुई। पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए हंगामे के बाद उसी दिन परीक्षा रद्द करनी पड़ी। विशेष रूप से तीसरी पाली को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में तीनों पालियों की परीक्षा को रद्द करने का निर्णय हुआ। चार फरवरी 2024 को प्रस्तावित अगला चरण भी स्थगित कर दिया गया। इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा करायी गयी, जिसमें करीब 3.04 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी हुआ था रिजल्ट

लंबे विवाद के बाद 8 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में जेएसएससी ने सीजीएल का परिणाम जारी किया। इसमें 1,932 अभ्यर्थी सफल घोषित किये गये, जबकि 10 अभ्यर्थियों का परिणाम रोका गया था।

इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को मोरहाबादी मैदान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांटे थे। अब सरकार के ताजा फैसले के बाद यही नियुक्तियां भी संकट में आ गयी हैं।

नियुक्ति पत्र में पहले से दर्ज थी अहम शर्त

पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार के मुताबिक सीजीएल के तहत हुई नियुक्तियां सशर्त थीं। नियुक्ति पत्र में ही यह उल्लेख था कि सीआईडी जांच के अंतिम निर्णय से नियुक्तियां प्रभावित हो सकती हैं। उनका मानना है कि इसी शर्त के कारण नियुक्तियां रद्द करने के फैसले के सामने कानूनी अड़चन की स्थिति अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

कई अन्य परीक्षाएं भी पहले से जांच और स्थगन के घेरे में

जेएसएससी-सीजीएल के अलावा राज्य में कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया भी हाल के महीनों में जांच, विवाद या स्थगन से प्रभावित हुई है। 14वीं सिविल सेवा परीक्षा, सिविल सेवा बैकलॉग-2023 और बैकलॉग-2025 की मुख्य परीक्षाएं सीआईडी जांच के कारण स्थगित हुईं। वहीं फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और सहायक वन संरक्षक भर्ती की शारीरिक जांच परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ीं।

इससे साफ है कि सरकार का ताजा फैसला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था को नए सिरे से जांचने और सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल

सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रद्द की गयी नियुक्तियों में शामिल अभ्यर्थियों का भविष्य क्या होगा और नयी चयन प्रक्रिया कब शुरू होगी? हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला राहत, अनिश्चितता और चिंता तीनों लेकर आया है।

एक तरफ आंदोलनरत छात्रों को अपनी प्रमुख मांग पूरी होने की उम्मीद जगी है, तो दूसरी तरफ पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के सामने नौकरी बचाने का संकट खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में न्यायिक आयोग की जांच और सरकार द्वारा गठित सुधार कमेटी की सिफारिशें यह तय करेंगी कि झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था किस दिशा में जाती है।

फिलहाल एक बात स्पष्ट है कि जेएसएससी-सीजीएल विवाद अब केवल एक परीक्षा का मामला नहीं रहा, बल्कि झारखंड की पूरी सरकारी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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