JPSC-JSSC CGL की 22 परीक्षाएं रद्द, 23 परीक्षाओं की CID जांच, जानें डिटेल
11वीं-13वीं JPSC, FRO, CDPO और Food Safety Officer जैसी परीक्षाएं भी कार्रवाई के दायरे में; पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के भविष्य पर बड़ा सवाल

यदि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी होगी, लेकिन केवल परीक्षा रद्द कर देना समाधान नहीं माना जा सकता। लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी की परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके वर्षों के परिश्रम, उम्र और भविष्य से जुड़ा अवसर है…
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवालों के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने जेएसएससी सीजीएल (10/2023) समेत 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी शामिल हैं।
इसके साथ ही 23 अन्य परीक्षाओं, उनके परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया की सीआईडी जांच कराने का आदेश दिया गया है। हालांकि, विभिन्न रिपोर्टों में जांच के दायरे में आने वाली परीक्षाओं की संख्या को लेकर अंतर दिख रहा है, इसलिए अंतिम आधिकारिक सूची को आधार मानना महत्वपूर्ण होगा।
सरकार का यह फैसला 18 अगस्त की देर रात कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की अधिसूचना के बाद सामने आया। इसके पीछे सीआईडी/एसआईटी जांच में सामने आए तथ्यों और प्राप्त शिकायतों को प्रमुख आधार बताया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं के खिलाफ अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था।
11वीं से 13वीं जेपीएससी तक पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू यह है कि कार्रवाई केवल भविष्य में होने वाली परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। जिन परीक्षाओं के जरिए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां पहले ही हो चुकी हैं, वे भी इसके दायरे में आ गई हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से चयनित 342 अधिकारी वर्तमान में सेवा में हैं। परीक्षा रद्द किए जाने के बाद इन अधिकारियों की नियुक्तियों के भविष्य को लेकर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े हो गए हैं। इसी तरह 64 कार्यरत सीडीपीओ और 56 फूड सेफ्टी अफसरों की नियुक्तियों पर भी संकट की स्थिति बनी है।
जेएसएससी-सीजीएल के मामले में करीब 2,000 के आसपास चयनित अभ्यर्थियों के सामने भी नौकरी बचने की चिंता खड़ी हो गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में प्रभावित नियुक्त कर्मचारियों की संख्या अलग-अलग बताई गई है, इसलिए अंतिम प्रभाव संबंधित विभागों की अगली कार्रवाई और अधिसूचना की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
कौन-कौन सी जेपीएससी परीक्षाएं रद्द?
सरकार के फैसले के दायरे में जेपीएससी की कई महत्वपूर्ण भर्तियां बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से-
- सहायक निदेशक/वरीय वैज्ञानिक पदों की बैकलॉग और नियमित भर्ती
- ड्रग इंस्पेक्टर
- सहायक वन संरक्षक
- फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO)
- एपीपी बैकलॉग एवं नियमित भर्ती
- सिविल सेवा परीक्षा-2025
- सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा
- फूड सेफ्टी ऑफिसर
- सीडीपीओ
- राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों में व्याख्याता भर्ती
- मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (सुपर स्पेशलिस्ट)
- सिविल जज जूनियर डिविजन
- छठी लिमिटेड उपसमाहर्ता परीक्षा
- झारखंड पात्रता परीक्षा-2024 शामिल हैं।
जेपीएससी के आधिकारिक परीक्षा कैलेंडर में भी 2026 के दौरान सिविल सेवा, सहायक वन संरक्षक, वैज्ञानिक पदों और अन्य परीक्षाओं के कार्यक्रम दर्ज थे।
23 परीक्षाओं की सीआईडी जांच क्यों?
सरकार ने सिर्फ परीक्षाओं को रद्द करने तक कदम सीमित नहीं रखा है। पुरानी कई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच भी सीआईडी को सौंपी गई है।
जांच के दायरे में बताई गई परीक्षाओं में फूड एनालिस्ट, उपनिदेशक अभियोजन, प्रोजेक्ट मैनेजर, फैक्ट्री इंस्पेक्टर, बॉयलर इंस्पेक्टर, निदेशक पद की भर्ती, पांचवीं सिविल सेवा परीक्षा, सिविल जज जूनियर डिविजन, सॉयल कंजर्वेटर, सहायक निदेशक कृषि, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, सिविल सेवा परीक्षा-2016, कमर्शियल टैक्स लिमिटेड परीक्षा, जियोलॉजिस्ट एवं केमिस्ट, एपीपी, संयुक्त असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल सर्विस परीक्षा-2021 और डेंटल डॉक्टर भर्ती जैसी परीक्षाएं शामिल बताई गई हैं।
इस जांच का उद्देश्य केवल परीक्षा में गड़बड़ी हुई या नहीं, यह पता लगाना नहीं है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर परिणाम, चयन और नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया की वैधता को भी जांच के दायरे में लाना है।
JSSC कार्यालय पर CID की छापेमारी ने बढ़ाई गंभीरता
सरकार के फैसले से ठीक पहले सीआईडी ने रांची स्थित जेएसएससी कार्यालय में भी छापेमारी की थी। जांच अधिकारियों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की। जेएसएससी सचिव से पूछताछ की खबर भी सामने आई।
यानी मामला अब केवल अभ्यर्थियों के आरोपों या राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां परीक्षा संचालन, आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका, प्रश्नपत्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
TDPL की भूमिका बनी कार्रवाई का बड़ा आधार
पूरे मामले में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार के फैसले के केंद्र में उन परीक्षाओं की प्रक्रिया है जिनमें TDPL पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से शामिल रही थी।
रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने 2014 से अब तक TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी व्यापक जांच और कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। यही वजह है कि इस फैसले का असर एक-दो विवादित परीक्षाओं से कहीं अधिक व्यापक हो गया है।
नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों का है जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा पास की, नियुक्ति पाई और अब सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं।
यदि किसी परीक्षा में अनियमितता पाई जाती है तो दोषी लोगों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है जिन्होंने बिना किसी कथित गड़बड़ी के अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की हो। इसी मुद्दे को लेकर जेएसएससी-सीजीएल से चयनित कर्मचारी विरोध जता रहे हैं और अपने भविष्य को लेकर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।
यही वह बिंदु है जहां सरकार के सामने परीक्षा की शुचिता और निर्दोष चयनित अभ्यर्थियों के अधिकार दोनों के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती होगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ
सरकार ने जेपीएससी और जेएसएससी से संबंधित अनियमितता एवं कदाचार के मामलों की सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आग्रह करने का फैसला भी लिया है।
इसके साथ दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित करने की योजना है। इसका उद्देश्य भविष्य में परीक्षा संचालन और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतों पर शुरुआती स्तर पर निगरानी मजबूत करना बताया गया है।
दो महीने में परीक्षा सुधार की रिपोर्ट
भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार एक अलग परीक्षा सुधार समिति भी गठित करेगी। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को समिति का अध्यक्ष बनाए जाने की बात कही गई है।
समिति में अन्य अधिकारियों के अलावा किसी प्रतिष्ठित संस्थान के निदेशक को भी सदस्य बनाया जाएगा। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
इस समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल परीक्षा कराने की प्रक्रिया सुधारना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना होगी, जिसमें प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा केंद्र, डिजिटल प्रक्रिया, मूल्यांकन, परिणाम और नियुक्ति तक हर स्तर पर जवाबदेही तय हो सके।
छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा दांव
पिछले कुछ समय से झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे थे। 18 अगस्त को जेएसएससी कार्यालय में सीआईडी की कार्रवाई ने भी मामले की गंभीरता को और बढ़ाया।
सरकार के ताजा फैसले को इसी व्यापक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। हालांकि परीक्षाएं रद्द करना तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव को कम कर सकता है, लेकिन असली चुनौती इसके बाद शुरू होगी कि दोबारा परीक्षा कब होगी, पुराने चयनित अभ्यर्थियों का क्या होगा, दोषी कौन हैं और नई व्यवस्था कितनी पारदर्शी होगी?
आगे क्या?
अब निगाहें सीआईडी की जांच, सरकार की अगली नियुक्ति संबंधी कार्रवाई और रद्द परीक्षाओं के लिए नई प्रक्रिया पर रहेंगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि जांच के आधार पर दोष और जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो।
यदि पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी होगी, लेकिन केवल परीक्षा रद्द कर देना समाधान नहीं माना जा सकता। लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी की परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि उनके वर्षों के परिश्रम, उम्र और भविष्य से जुड़ा अवसर है।
झारखंड सरकार का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राज्य की भर्ती व्यवस्था के सामने एक बुनियादी सवाल खड़ा हुआ है कि क्या परीक्षा प्रणाली ऐसी बनाई जा सकती है, जिसमें किसी अभ्यर्थी को अपनी मेहनत के परिणाम पर संदेह न करना पड़े?अब आने वाले दो महीने में परीक्षा सुधार समिति की रिपोर्ट और सीआईडी जांच की दिशा इस पूरे विवाद का अगला अध्याय तय करेगी।
- राहुल गांधी की दो टूक- JPSC-JSSC छात्रों की मांगें मानें हेमंत सोरेन, अन्यथा अलग राह चुनेगी कांग्रेस!
- JPSC-JSSC आंदोलन के बीच CID एक्शन, पूर्व सदस्य का PA गिरफ्तार; CM हेमंत ने बुलाई आपात बैठक
- खुद की नाकामी का ठीकरा यूपी-बिहार पर क्यों फोड़ रहे हेमंत सोरेन!
- एल. खियांग्तेः झारखंड में ‘IAS जेल डायरी’ का 7वां स्याह पन्ना!









