JPSC-JSSC आंदोलन के बीच CID एक्शन, पूर्व सदस्य का PA गिरफ्तार; CM हेमंत ने बुलाई आपात बैठक
रांची में 24वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, सरकार-छात्र वार्ता पर टिकी नजर; पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से 48 घंटे की पूछताछ के बाद जांच और तेज।

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब जांच, सियासत और सरकार-छात्र वार्ता तीनों मोर्चों पर निर्णायक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है।
आज सोमवार को एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रियों के साथ आपात बैठक बुलाई तो दूसरी ओर CID ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए JPSC की पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार दास को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
छात्रों के लगातार आंदोलन और कई दौर की बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकलने से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सोमवार शाम सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच वार्ता का एक और दौर शुरू हुआ। इससे पहले भी सरकार छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर चुकी है, लेकिन प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है।
CID की कार्रवाई ने बढ़ाई हलचल
JPSC से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच में CID पहले ही पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से लंबी पूछताछ कर चुकी है। हालिया घटनाक्रम में पूर्व सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार दास को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने से जांच की गंभीरता और बढ़ गई है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार एल. ख्यांगते से करीब 48 घंटे तक पूछताछ के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और न्यायालय के आदेश पर दोबारा न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्रों की ओर से लंबे समय से राज्य स्तरीय जांच पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की जाती रही है। अभ्यर्थियों ने पहले भी CID जांच की प्रगति और कथित अनियमितताओं की पूरी तस्वीर सार्वजनिक किए जाने पर सवाल उठाए हैं।
24वें दिन भी आंदोलन, भूख हड़ताल ने बढ़ाई चिंता
रांची में जारी छात्र आंदोलन सोमवार को 24वें दिन में पहुंच गया। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में विवादित भर्ती परीक्षाओं को लेकर स्पष्ट निर्णय, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शामिल है। कुछ प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर भी अड़े हुए हैं।
आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति चिंता का बड़ा कारण बन गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
सोमवार को उनके रक्तचाप में काफी गिरावट दर्ज किए जाने की बात सामने आई। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर स्थिति के बावजूद उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी है।
चयनित अभ्यर्थियों की मानव श्रृंखला
इधर JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अपने भविष्य को लेकर सरकार से संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की। प्रोजेक्ट भवन के निकट मानव श्रृंखला बनाकर अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों और चिंता को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।
यह पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि आंदोलन में केवल परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया से जुड़े वे उम्मीदवार भी अपनी स्थिति को लेकर आवाज उठा रहे हैं, जिनका भविष्य सरकारी फैसलों पर निर्भर है।
राज्यपाल से मिले भाजपा नेता
राज्य की राजनीतिक हलचल के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने छात्र आंदोलन, कथित भर्ती अनियमितताओं और राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की तथा राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की।
भाजपा का आरोप है कि छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
दूसरी ओर सरकार पहले ही भर्ती परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार का भरोसा दे चुकी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल में कहा था कि राज्य की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाएगा और प्रतिभा को किसी भी तरह की गड़बड़ी से नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल कि वार्ता से निकलेगा रास्ता या आंदोलन होगा तेज?
JPSC-JSSC विवाद अब केवल परीक्षा और परिणाम का मामला नहीं रह गया है। एक तरफ CID की जांच आगे बढ़ रही है, दूसरी तरफ छात्र आंदोलन लगातार लंबा खिंच रहा है और तीसरी तरफ सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
ऐसे में सोमवार की वार्ता और मुख्यमंत्री की मंत्रियों के साथ आपात बैठक से निकलने वाले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सरकार और छात्रों के बीच ठोस सहमति बनती है तो आंदोलन को विराम देने की राह खुल सकती है। लेकिन यदि प्रमुख मांगों पर फिर गतिरोध बना रहा, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और अधिक व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह सवाल किसी एक परीक्षा का नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में भरोसे और उनके वर्षों की मेहनत के भविष्य का बन चुका है।
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