JPSC घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल.ख्यांग्ते गिरफ्तार, ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका देने और रिश्वतखोरी के आरोप
सीआईडी की मैराथन पूछताछ के बाद पूर्व मुख्य सचिव ख्यांग्ते हिरासत में, टीडीपीएल कंपनी से 2 करोड़ की रिश्वत और ओएमआर शीट में हेरफेर का आरोप।

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और पेपर लीक मामले में सोमवार, 10 अगस्त 2026 को राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते (L. Khiangte) को गिरफ्तार कर लिया है। झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रह चुके ख्यांग्ते की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।
सीआईडी मुख्यालय में लगातार चार दौर की मैराथन पूछताछ के बाद जांच टीम ने ख्यांग्ते के जवाबों को असंतोषजनक पाया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले 28, 29 और 31 जुलाई को उनसे क्रमशः 9 और 8 घंटे तक तीखे सवाल-जवाब किए गए थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया था ताकि वे देश छोड़कर न जा सकें। दबाव बढ़ता देख उन्होंने बीते 22 जुलाई 2026 को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच टीम और सूत्रों के मुताबिक एल. ख्यांग्ते पर मुख्य रूप से कई आरोप हैं। 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा के आयोजन का गुप्त टेंडर बिना किसी खुली निविदा (Open Tender) के सीधे TDPL नामक एक ऐसी प्राइवेट कंपनी को आवंटित किया गया, जिसे झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) पहले ही ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) कर चुका था। करोड़ों की रिश्वत का खेल: जांच में यह बात सामने आई है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को यह महा-अनुबंध सौंपने के एवज में करीब 2 करोड़ रुपये की रिश्वत (Quid Pro Quo) का लेनदेन हुआ था।
वहीं परीक्षा में 500 से अधिक ओएमआर शीट के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और कूटरचित अंक देने के पुख्ता डिजिटल साक्ष्य सीआईडी के हाथ लगे हैं।
सीआईडी ने इस मेधा घोटाले में शामिल पूरे रैकेट की परतें खोल दी हैं। ख्यांग्ते की गिरफ्तारी से पहले उनके आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र कुमार को दबोचा गया था, जो कथित तौर पर इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी (गोड्डा में पदस्थापित ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर) और ख्यांग्ते के बीच बिचौलिए का काम कर रहा था। जांच एजेंसी इस सिंडिकेट से जुड़े अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और टीडीपीएल के निदेशक भी शामिल हैं।
यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र पिछले दो हफ्तों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे हैं और आज ही उन्होंने भारी बारिश के बीच विधानसभा घेराव की कोशिश की, जहां पुलिस को लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच इस पूरे मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू कर दी है, जिससे इस भ्रष्टाचार के तार कई बड़े राजनेताओं तक पहुंचने की उम्मीद है।









