“झारखंड में हर हर घर नल जल मिशन योजना की सुस्त गति के पीछे सबसे बड़ा कारण फंड की कमी है। केंद्र सरकार ने राज्य को अपने हिस्से से काम जारी रखने और बाद में समायोजन की अनुमति दी है, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति इस अतिरिक्त बोझ को संभालने में सक्षम नहीं दिख रही, जिसका असर सीधे तौर पर काम की गति पर पड़ा है…
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में हर घर नल जल मिशन योजना की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक होती जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले ही महीने अप्रैल में योजना की प्रगति लगभग ठहर सी गई है। पूरे राज्य में मात्र 1434 घरों तक ही नल जल कनेक्शन पहुंच सका, जबकि 24 में से 11 जिलों में काम पूरी तरह ठप रहा और वहां शून्य प्रगति दर्ज की गई।
राज्य सरकार ने इस वर्ष 11 लाख घरों तक नल से जल पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने औसतन करीब 90 हजार कनेक्शन देने जरूरी हैं। लेकिन अप्रैल की उपलब्धि इस लक्ष्य के मुकाबले केवल लगभग 2.5 प्रतिशत ही रही, जो शुरुआती स्तर पर ही गंभीर असंतुलन का संकेत देती है।
यदि पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और भी निराशाजनक दिखती है। पूरे वर्ष में केवल 22,921 घरों को ही इस योजना से जोड़ा जा सका था। यानी योजना की रफ्तार लगातार दूसरे साल भी बेहद धीमी बनी हुई है, जिससे इसके समय पर पूरा होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना की सुस्त गति के पीछे सबसे बड़ा कारण फंड की कमी है। पिछले वित्तीय वर्ष से ही झारखंड को केंद्रांश की राशि प्राप्त नहीं हुई है।
हालांकि केंद्र सरकार ने राज्य को अपने हिस्से से काम जारी रखने और बाद में समायोजन की अनुमति दी है, लेकिन राज्य की वित्तीय स्थिति इस अतिरिक्त बोझ को संभालने में सक्षम नहीं दिख रही, जिसका असर सीधे तौर पर काम की गति पर पड़ा है।
यह योजना 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई थी और अब इसे सात साल पूरे हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने इसकी समय-सीमा बढ़ाकर 2028 कर दी है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि तय समय में लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं हो सका। समय सीमा बढ़ने के बावजूद जमीनी प्रगति में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है।
राज्य के कुल 62.52 लाख ग्रामीण घरों में से अब तक केवल 34.56 लाख घरों तक ही नल जल कनेक्शन पहुंच पाया है, जो लगभग 55 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि अब भी 45 प्रतिशत ग्रामीण आबादी शुद्ध पेयजल के पाइप कनेक्शन से वंचित है, जो योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़ा करता है।
जिलेवार आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि योजना का क्रियान्वयन पूरे राज्य में समान नहीं है। कुछ जिलों जैसे लोहरदगा, गढ़वा, रामगढ़ और रांची में सीमित प्रगति दर्ज की गई, जबकि खूंटी, चतरा, साहिबगंज, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, सरायकेला, दुमका और पलामू सहित कई जिलों में एक भी नया कनेक्शन नहीं दिया गया।
सरकार ने योजना को गति देने के लिए 1698 नए पदों का सृजन किया है, जबकि 153 पद समाप्त किए गए हैं। साथ ही नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और कंप्यूटर ज्ञान को अनिवार्य करने जैसे कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन प्रशासनिक सुधारों का कोई ठोस असर अभी तक देखने को नहीं मिल रहा है।
विश्लेषण के स्तर पर देखा जाए तो समस्या केवल फंड की कमी तक सीमित नहीं है। योजना के क्रियान्वयन में असमानता, निगरानी की कमी, स्थानीय स्तर पर तकनीकी और ठेकेदारी बाधाएं तथा प्रशासनिक समन्वय की कमी भी बड़ी वजह बनकर सामने आ रही हैं।
यदि वर्तमान रफ्तार में सुधार नहीं हुआ तो 2028 तक भी सभी घरों तक नल जल पहुंचाने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि फंड की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिला स्तर पर जवाबदेही तय हो और परियोजना प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
कुल मिलाकर हर घर नल जल योजना झारखंड में अभी भी अपने लक्ष्य से काफी दूर नजर आ रही है। यह केवल एक विकास योजना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह कागजी उपलब्धियों से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत को सुधारने पर ठोस कदम उठाए।
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