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Jharkhand: चारा घोटाला की तर्ज पर ट्रेजरी घोटाला, 27 करोड़ की अवैध निकासी से हिला सिस्टम

“अगर जांच में और गहराई से परतें खुलती हैं तो यह राज्य के कई जिलों तक फैले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकता है। सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती हैं तो इस घोटाले के पीछे छिपे पूरे सिंडिकेट का खुलासा होना तय है… 

रांची/हजारीबाग/बोकारो/गया (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड (Jharkhand) में ट्रेजरी से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हजारीबाग और बोकारो में उजागर हुए इस बहुचर्चित घोटाले के बाद राज्य पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया है।

डीजीपी तदाशा मिश्र ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जोनल आईजी, रेंज डीआईजी और जिलों के एसपी के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक कर जांच को तेज करने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

संगठित तरीके से फर्जीवाड़ा, फर्जी आईडी से निकासीः समीक्षा में सामने आया कि बोकारो में सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी के नाम पर फर्जी पहचान बनाकर करोड़ों रुपये निकाले गए, जबकि हजारीबाग में बाल आरक्षी के नाम का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

यह भी संकेत मिले हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क के तहत लंबे समय से चल रहा घोटाला है। डीजीपी ने सभी जिलों को अलर्ट करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तुरंत आंतरिक ऑडिट और सत्यापन अभियान चलाया जाए।

तीन साल से जमे कर्मी हटें, डीजीपी का स्पष्ट निर्देशः बैठक में डीजीपी ने प्रशासनिक ढिलाई को भी घोटाले का बड़ा कारण माना। उन्होंने निर्देश दिया कि तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही शाखा में पदस्थापित प्रधान लिपिक, लेखापाल और कैश ऑर्डली को तत्काल हटाया जाए।

डीजीपी ने साफ कहा कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने से मिलीभगत और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ जाती है। एक ही व्यक्ति को प्रधान लिपिक और लेखापाल का प्रभार देना नियम विरुद्ध है। जहां पद रिक्त हैं, वहां शीघ्र नियुक्ति के लिए पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाए।

हजारीबाग में ₹27 करोड़ का घोटाला, STF गठितः हजारीबाग कोषागार से पुलिस वेतन मद में लगभग ₹27 करोड़ की अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।

डीसी शशि प्रकाश सिंह के निर्देश पर छह सदस्यीय स्पेशल टास्क फोर्स गठित की गई है, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है।

यह टीम न केवल फर्जी निकासी की जांच करेगी, बल्कि आरोपियों की संपत्ति, बैंक ट्रांजेक्शन और निवेश के स्रोतों का भी विस्तृत विश्लेषण करेगी।

गया (बिहार) तक फैला काले धन का नेटवर्कः जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले का मुख्य आरोपी सिपाही शंभु कुमार चौधरी अपनी अवैध कमाई को बिहार के गया जिले में निवेश कर रहा था।

गया के पॉश एपी कॉलोनी-मुस्तफाबाद क्षेत्र में उसके द्वारा बनाए गए आलीशान मकान, महंगी गाड़ियां और लग्जरी सामान उसकी आय से कई गुना अधिक हैं।

हजारीबाग प्रशासन की टीम गया जाकर संपत्तियों की जांच कर रही है और जरूरत पड़ने पर न्यायालय के माध्यम से अटैचमेंट की कार्रवाई की जाएगी। गया जिला प्रशासन ने भी सहयोग का भरोसा दिया है।

गिरफ्तारी के बाद सबूत मिटाने की कोशिशः आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके आवासों से कीमती सामान हटाने और संपत्ति को समेटने की कोशिशों की भी खबर सामने आई है।

बताया जाता है कि महंगे टीवी, एसी, फर्नीचर और वाहनों को जल्दबाजी में हटाया जा रहा है, जिससे जांच एजेंसियों को सबूत मिटाने की आशंका है।

रांची समेत 5000 पुलिसकर्मियों के वेतन की जांचः घोटाले के विस्तार को देखते हुए अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। रांची सहित अन्य जिलों में लगभग 5000 पुलिसकर्मियों के वेतन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

वित्त विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वेतन बिल और पे-स्लिप का सत्यापन किया जाए। संदिग्ध खातों की पहचान कर उन्हें फ्रीज किया जाए। बैंक ट्रांजेक्शन की विस्तृत जांच की जाए।

घोटाले का तरीका: सिस्टम से छेड़छाड़ः प्रारंभिक जांच में घोटाले की कार्यप्रणाली भी सामने आई है कि जीपीएफ डाटा में छेड़छाड़ कर जन्मतिथि बदली गई है। सेवानिवृत्त कर्मियों को सक्रिय दिखाकर वेतन निकाला गया है। बैंक खातों को बदलकर राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई है। फर्जी आईडी बनाकर भुगतान प्रक्रिया को वैध दिखाया गया है। इस पूरे मामले में डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) और लेखापाल की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे हैं।

बोकारो में ₹6.25 करोड़ का खुलासाः बोकारो ट्रेजरी घोटाले में भी अवैध निकासी का आंकड़ा बढ़कर करीब ₹6.25 करोड़ तक पहुंच चुका है।

इस मामले में एक लेखापाल को गिरफ्तार किया गया है, जिसने अपनी पत्नी के खाते में रकम ट्रांसफर की थी। संबंधित बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है और जांच एजेंसियां दस्तावेज खंगाल रही हैं।

14 साल से जमे कर्मी, निगरानी तंत्र पर सवालः हजारीबाग में मुख्य आरोपी शंभु कुमार पिछले 14 वर्षों से पुलिस विभाग के अकाउंट सेक्शन में पदस्थापित था। सह-आरोपी भी वर्षों से उसी शाखा में कार्यरत थे।

इस दौरान कई अधिकारी बदले, लेकिन इन कर्मियों का स्थानांतरण नहीं हुआ। इससे विभागीय निगरानी और जवाबदेही प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

सियासत गरम, आरोप-प्रत्यारोप तेजः घोटाले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। झामुमो ने इसे पूर्व भाजपा सरकार के समय से जुड़ा मामला बताया है। राजद ने भी भाजपा शासन को जिम्मेदार ठहराया  है। वहीं विपक्ष ने वर्तमान सरकार पर निगरानी में कमी का आरोप लगाया है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

पूरे राज्य में जांच के आदेश, सिंडिकेट की आशंकाः वित्त मंत्री के निर्देश पर अब राज्य के सभी जिलों के कोषागारों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार को आशंका है कि यह घोटाला किसी संगठित सिंडिकेट के जरिए कई जिलों में फैल सकता है। सभी जिलों से यह भी रिपोर्ट मांगी गई है कि वहां लेखापाल और संबंधित कर्मचारी कितने वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं।

संपत्ति जब्ती से लेकर कानूनी शिकंजाः सरकार और पुलिस मुख्यालय ने संकेत दिया है कि दोषियों की संपत्ति जब्त की जाएगी। संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया जाएगा। आय से अधिक संपत्ति के मामलों में अलग से केस दर्ज होंगे। सभी ट्रांजेक्शन की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी।

सिस्टम की बड़ी विफलता या संगठित साजिश? यह घोटाला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित मिलीभगत का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अगर जांच में और गहराई से परतें खुलती हैं तो यह राज्य के कई जिलों तक फैले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती हैं और क्या इस घोटाले के पीछे छिपे पूरे सिंडिकेट का खुलासा हो पाता है या नहीं।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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