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झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा: 15-15 लाख में सौदा, 165 गिरफ्तार, JSSC का पेपर लीक से इंकार

उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा  के दौरान उभरे ताजा मामले ने भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इस तरह के गिरोह युवाओं की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं…

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से पहले एक बड़े अंतर्राज्यीय सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। राजधानी रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्द्धनिर्मित भवन में पुलिस ने देर रात छापेमारी कर गिरोह के सरगना समेत कुल 165 लोगों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार लोगों में 159 अभ्यर्थी शामिल हैं, जिनमें सात महिला परीक्षार्थी भी बताई जा रही हैं। इस कार्रवाई ने पूरे राज्य की भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के एजेंटों ने प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा में पास कराने के नाम पर 15-15 लाख रुपये में सौदा तय किया था। अभ्यर्थियों को एक स्थान पर इकट्ठा कर उन्हें संभावित प्रश्न और उनके उत्तर रटाए जा रहे थे।

इतना ही नहीं गिरोह ने परीक्षार्थियों के मोबाइल फोन, एडमिट कार्ड और कुछ मामलों में बैंक चेक भी अपने कब्जे में ले लिए थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहा था।

जानकारी के अनुसार शनिवार रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रड़गांव में एक अर्द्धनिर्मित भवन में 150 से अधिक अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा हुआ है। सूचना के आधार पर विशेष छापामारी दल ने 11 अप्रैल की देर रात वहां धावा बोला।

पुलिस के पहुंचते ही मौके पर भगदड़ मच गई और कई लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर अधिकांश लोगों को मौके से ही पकड़ लिया। घटनास्थल से आठ वाहन भी जब्त किए गए हैं।

गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों में गिरोह का कथित सरगना अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह उर्फ मुकेश सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद शामिल हैं। वहीं गिरोह का एक अहम सदस्य चुलबुल यादव को पटना से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार वही पटना से मोबाइल के माध्यम से रांची में मौजूद गिरोह के सदस्यों को प्रश्नपत्र और संबंधित सामग्री भेज रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक गिरोह का सरगना अतुल वत्स पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं में धोखाधड़ी के मामलों में आरोपी रह चुका है। उसका नाम राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा 2017, नीट पेपर लीक 2024, बिहार कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा जैसे मामलों से भी जुड़ चुका है। इससे यह मामला और गंभीर हो जाता है, क्योंकि यह केवल झारखंड तक सीमित न होकर एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

हालांकि इस पूरे मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने पेपर लीक की बात से साफ इनकार किया है। आयोग अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने प्रेस वार्ता में कहा कि सॉल्वर गैंग के पास से बरामद प्रश्नपत्रों का परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से मिलान कराया गया, जिसमें कुल 340 प्रश्नों में से केवल एक प्रश्न पूरी तरह और पांच प्रश्न आंशिक रूप से मिले हैं। उनके अनुसार इसे पेपर लीक नहीं माना जा सकता।

इसके बावजूद यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि पेपर लीक नहीं हुआ था तो अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये क्यों लिए गए और उन्हें परीक्षा से पहले एक स्थान पर क्यों रखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक सॉल्वर गैंग या ठगी का संगठित मॉडल भी हो सकता है, जिसमें संभावित प्रश्नों के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली जाती है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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