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Sunday, September 26, 2021
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    राजगीर छात्रा गैंग रेपः कहां जमींदोज हो गए सुशासन के ये नुमाइंदे? सीएम भी आउट ऑफ रेंज!

    कथित सुशासन बाबू यानि बिहार के सीएम नीतीश कुमार का जिला नालन्दा तरक्की और विकास के मामले में अव्वल। हो भी क्यों नहीं, जिले के काबिल एकलौते मंत्री श्रवण कुमार और सांसद कौशलेंद्र कुमार पूरे जिले में छोटे छोटे दुकानों और कार्यक्रमों के उदघाटन पर जमकर सरकार की प्रशंसा  जो करते नज़र आते हैं।  दारोगा से सीधे राजगीर के स्थानीय विधायक बने रवि ज्योति तो सत्ता के खिलाफ कुछ सुनना ही पसंद नही करते…………..”

    एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। लेकिन राजगीर में गैंगरेप की घटना के बाद सुशासन बाबू के तीन तिकड़ी वाले नुमाइंदे लगता है कि जमींदोज हो गए हैं।

    एक पार्टी के नेता पूर्णिया,पटना से चलकर पीड़िता का हाल समाचार जानने पहुँच जाते है लेकिन दिनरात छोटी छोटी दुकानों के उदघाटन में व्यस्त रहने वाले सुशासन बाबू के मंत्री, सांसद, विधायक गैंगरेप की घटना पर क्षेत्र से पलायन कर गए नज़र आते हैं।

    नालन्दा की सत्ता और प्रशासनिक ओहदे के रिंगमास्टर मंत्री महोदय गैंगरेप की घटना पर तो लगता है कि दुम दबाकर कहीं छुप ही गए हैं। तीसरी पारी खेलने वाले सांसद कौशलेंद्र कुमार अभी भी जीत की नारियल फोड़ने में व्यस्त है और उनके वोटबैंक के दलाल सिर्फ योजनाओं से पैसे कमाने की फितरत के साथ घटना से अनजान बने बैठें है।

    जिस क्षेत्र राजगीर में ये घटना घटी है, वहाँ के विधायक तो सिर्फ सोशल मीडिया पर पुलिस के पीठ थपथपाने में व्यस्त हैं। जनता के वादों पर खरा उतरने की कसमें खाकर ये सभी जनप्रतिनिधि किसी कोने में दुबक से गये हैं।

    मनचाहे पुलिस प्रशासन की पोस्टिंग कर जबर्दस्ती सुशासन का एहसास कराने वाले ये सभी राजनेता सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों को बचाने में लगते हैं। भले ही एक मासूम को क्यों न भेड़िये रौंदते रहे।

    क्या ये वही सुशासन बाबू का नालन्दा है, जो न्याय के साथ विकास की बात करते है और जीरो टॉलरेंस पर क्राइम कंट्रोल की भाषणे पढ़ते रहते हैं।

    नालन्दा के पुलिस अधीक्षक गैंगरेप की घटना पुष्टि के पूर्व मीडिया कर्मियों को धमकी देते हैं और उनके नुमांइदे सुशासन -सुशासन की रट लगा पोसुआ तोता बनकर उन्नति -प्रोन्नति की कुर्सी से चिपके रहते हैं।

    इतनी बड़ी कुकृत्य-घटनाओं के बाबजूद राजनेताओं की बोलती बंद होना क्या भविष्य की वोट बैंक की राजनीति है? यदि यही राजनीति और यही सुशासन है तो तौबा है ऐसे जनप्रतिनिधियों से, जिनकी नज़र में मासूम की अस्मत के बजाय ऐसी घटिया सोच मुख्य प्राथमिकता है।

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