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Sunday, September 26, 2021
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    जज राजीव जीते जी जो न कर सके, उनकी लाश ने कर दिखाया-2

    मरे वालन के साथे न जा हय कोय’ … अपन नालंदा के मुंह में यह कहावत मशहूर है। वाकई यह कहावत जहां उपहास की एक कटाक्ष मानी जाती है , तो जीवन जीने की प्रेरणा-उर्जा भी देती है…….”

    मुकेश भारतीय

    …नालंदा जिले के मदारपुर भोभी गांव निवासी जज राजीव की मौत कुछ यूं शीर्षक स्वरुप ही वयां कर रही है। उनकी आत्मा परलोक सिधार गई। उनका पार्थिव शरीर पंच तत्व में विलिन हो गया। हम उनकी मौत के कारणों में उलझना नहीं चाहते। जितनी मुंह-उतनी बातें कही जा रही है।

    पिता ने हिलसा थाना में लिखित सूचना देकर बहू पर गंभीर आरोप लगाए और मौत पर सवाल उठाए। क्योंकि उनका मानना है कि उनका पुत्र गंभीर रोग का शिकार नहीं था और जब वे हालत गंभीर की सूचना पाकर अस्पताल पहुंचे तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि जज साहब की पत्नी किसी से भी मिलने देने से मना किया है।

    इधर मृतक जज की पत्नी का कुछ और ही रोना सामने आया। यह आरोप काफी संदिग्ध है कि उनसे किसी ने लाख रुपए छीन लिए। किसी ने उनके साथ मारपीट की। उनके मासूम बच्ची का अपहरण करने का प्रयास किया।

    खैर, इन सब चीजों पर शासन को सोचना था। जिसकी प्रारंभिक सुध तब कहीं नहीं ली गई। पत्नी जज के शव को लेकर सीधे लेकर थाना आई और पुलिस प्रोटक्शन में गांव पहुंच गई।

    ग्रामीण बताते हैं कि वहां भी विधवा मानसिक रुप से संतुलित नहीं थी। आपसी लगाव परंपरा का निर्वाह करते महिलाएं जब दहाड़ मारकर रोने-धोने लगी तो उनकी प्रतिक्रिया समाज को काफी असहज करने वाली दिखी। चाय की तलब के साथ विधवा ने अत्यंत वैराग्य भरे शब्दों  के प्रयोग किए। 

    जाहिर है कि एक सामाजिक इंसान की मौत के बाद उससे जुड़े हर किसी का अलग रोना-धोना लगा ही रहेगा। क्योंकि वे साथ नहीं गए हैं। उन्हें फिलहाल यही रहना-सहना है।

    अब यह सवाल उठाने से कोई फायदा नहीं है कि किसका किसके साथ क्या व्यवहार रहे। एक न्यायधीश की मौत पर प्रशासन-प्रबंधन ने कैसे रुख दिखाए। अहम बात यह है कि समाज को आयना दिखाने वाली ऐसी घटनाओं के लिए हम कितने जिम्मेवार हैं। उसे कैसे रोका सकते है।

    क्योंकि हर घटना की एक पृष्ठभूमि होती है। जोकि आम भावनाएं तो दूर, खून के रिश्ते को भी तार-तार कर जाती  है।

    फिलहाल हम देख रहे हैं कि एक वृद्ध पिता अपने उस राम की शोक में दशरथ बन अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है, जिसे 14 साल बाद भी कोई आस नहीं है। उसे अपनी बहू की भी चिंता है और अपनी मासूम पोती की भी………..(जारी….शेष अगले किश्त में पढ़ें।)

    देखिए वीडियोः ????पुत्र राजीव की मौत के सदमें का शिकार वृद्ध पिता की हालत, जिनकी कारुणिक आवाज नहीं सुना सकते….?

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