83 वी जयंती समारोहः एक कुशल सर्जन, साहित्यकार और समाजसेवी थे डॉ. आर इसरी अरशद

Share Button

बिहार शरीफ (राजीव रंजन)। नालंदा निर्माता साहित्यिक कवि प्रख्यात चिकित्सक डॉ आर इसरी अरशद की 83 वी जयंती शंखनाद के साथ साहित्यकार हरिश्चंद्र प्रियदर्शी की अध्यक्षता में मनाई गई।

 नालंदा नाट्य संघ के सभागार में शनिवार को आयोजित जयंती समारोह में मौजूद उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि कर माल्यार्पण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया।

साहित्यकार डॉ हरिश्चंद्र प्रियदर्शी ने डॉक्टर अरशद साहब की 83 वी जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नालंदा जिला ही नहीं बल्कि राज्य स्तर पर एक जाने-माने चिकित्सक सर्जन प्रतिष्ठित साहित्यकार और एक महान समाजसेवी के रूप में नालंदा निर्माता डॉ आर इसरी अरशद किसी परिचय के मोहताज नहीं थे।

नालंदा जिला का बुद्धिजीवी साहित्यकार और सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता इनके व्यक्तित्व से हमेशा प्रभावित रहे डॉ आर इसरी अरशद अपने व्यक्तित्व और मधुरिमा का प्रभाव जिला में छोड़ गए।

भगवान बुद्ध भगवान महावीर महान संत मनीराम और महान सूफी संत मखदूम साहब की धरती प्राचीन उदंतपुरी (बिहारशरीफ) के अजीज घाट मोहल्ला में जन्म लेने वाले डॉ आर इसरी अरशद वस्तुतः एक महान इंसान थे।

इन्होंने अपने चिकित्सीय कार्यों के अतिरिक्त संस्कृति साहित्य एवं सामाजिक कार्यों में खूब नाम कमाया और  इसी के कारण  लोगों के दिलों को जीत लिया।भारतीय संस्कृति का समागम एक साथ डॉ आर इसरी अरशद के व्यक्तित्व में स्पष्ट परिलक्षित होता है

डॉ आर इसरी अरशद के व्यक्तित्व का एक सुनहरा पक्ष है उनका निराला हंसमुख और माधुर्यपूर्ण वाक चातुर्य अपने वाक चातुर्य से इन्होने कई विकास कार्यों के संपादन के साथ उच्च पदों पर आसीन महापुरुषों पदाधिकारियों को आकृष्ट कर अपने व्यक्तित्व का परिचय हमेशा देते रहें कर्म प्रधान इस दुनिया में इन्होंने गीत के उद्देश्य के अनुरूप कर्म की प्रधानता स्वीकार की है अपने संपर्क के व्यक्ति को भी कर्म की प्रधानता की दिशा निर्देश की है।

वस्तुतःडॉ आर इसरी अरशद जी एक सफल चिकित्सक थे तथा उनके हृदय में एक साहित्यकार का प्रेम और परोपकार की भावना भरी हुई थी यही कारण है कि इनकी सहजता सरलता व्यवहार कुशलता पर समान जनों के अतिरिक्त विद्वान भी प्रभावित हुए। नालंदा में किसी प्रकार का आयोजन हो डॉ आर इसरी अरशद जी अवश्य उपस्थित रहते थे बल्कि अपनी व्यक्तिगत कुशलता और व्यक्तित्व का भी परिचय कराते थे

औषधीय वनस्पति विशेषण और साहित्यकार कवि प्रो लक्ष्मीकांत सिंह ने समारोह संचालन करते हुए अपने संबोधन में कहा कि डॉ आर इसरी अरशद का पूरा जीवन समाज के वंचित और गरीब असहायों जिन्हें कोई देखने वाला नहीं है  उसके प्रति सदैव समर्पित रहा।

मशहूर शायर उर्दू साहित्य के विद्वान बेनाम जिलानी ने कहा कि डॉ आर इसरी अरशद हिंदू मुस्लिम संस्कृति के समन्वय थे।

मौके पर साहित्य अनुरागी राकेश बिहारी शर्मा ने अपने उद्बोधन कहां की डॉ आर इसरी अरशद सुविख्यात शल्य चिकित्सक हृदय रोग विशेषज्ञ महान समाजसेवी थे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ आर इसरी अरशद जी ने कवि कर्म के अलावा पत्रकारिता भी जमकर की उन्होंने अपने जीवन में कई पुस्तकों की रचनाएं किया उन्होंने प्रमुख रुप से (1) जाने मन (2) बाल इशफ (3) दर्दे मीनस कस (4) नालंदा में क्रिश्चियन इतिहास इत्यादि किताबें लिखी।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन साहित्यप्रेमी राकेश बिहारी शर्मा ने किया। समाजसेवी डॉ आर इसरी अरशद के पुत्र डॉक्टर फैसल अरशद इसरी अपने पिताजी के जीवन पर बारीकी से प्रकाश डाला मौके पर कभी गीतकार मुनेश्वर शमन नालंदा के सूफी कवि छंदकार सुभाष पासवान नालंदा के मशहूर युवा शायर तनवीर शाकित श्री नालंदा नाट्य संघ के अध्यक्ष राम सागर राम  शायर तंग आययूबी मो मुर्तजा खान संगीतकार अशोक कुमार आदि लोगों ने भाग लिया।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...