सीएम नीतीश के गांव की दयनीयता की चर्चा यूं खोल रही विकास की पोल

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। मगध सम्राट जरासंध विचार मंच के संयोजक एवं नालंदा जिला भाजपा के उपाध्यक्ष श्याम किशोर भारती ने एक सचित्र पोस्ट की है। इस पोस्ट पर जिस तरह की प्रतिक्रिया आ रही है, वह बेतरतीब विकास को यूं ही नंगा कर जाती है।

श्री भारती ने लिखा है,  “बिहार के मुखिया नीतीश कुमार जी के गाँव कल्यानबीघा की यह तस्वीर ज़मीनी हकीकत बयां करती है। मैं खुली चुनौती देता हूँ सभी राजनीति करने वाले महानुभाव को। कल्यानबीघा की एक एक गली में आप घूम गए तो विकास की सारी कहानी का मतलब आप समझ जाएंगे। भारत सरकार और बिहार सरकार की योजनाओं का लाभ यदि गांव के दलित,अतिपिछड़ी और शोषित आबादी वाले टोले में हम नही पहुंचा सके तो तो यक़ीनन कह सकते है की हमारा वर्तमान सांसद जागनेवाला नही सोने वाला है।”

इस पर जिला भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के संयोजक Ashutosh Kumar लिखते हैं आदरणीय सम्मानित उपाध्यक्ष जी,जब तक “पंचायती राज और नगर निगम के वार्ड पार्षदों,मेयरों….”को सिस्टम से टैग नहीं करेंगें….तब तक नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार …”चोर” और बाकी “सभी ईमानदार” रहेंगें….आप जिस फोटो को दिखला रहे हैं…वो केवल सी.एम.के पैतृक गाँव कल्याण बीघा की ही नहीं….लगभग हर पंचायत के हर गाँव की “जमीनी कड़वी सच्चाई” है….पंचायती राज के राजाओं ने सिस्टम को नजरअंदाज कर के अपनी सुविधानुसार काम करवाते हैं…जिनको प्रधानमंत्री आवास की सुविधा मिलनी चाहिये,माल लेकर,मुखिया जी उसके हक को बेचकर, दूसरों को दे देते हैं…वही हाल,हर मामले में है…गरीब का अनाज भी,दूसरे लोग उठा रहे हैं…इसमें सी.एम. और पी.एम क्या करेंगें….?????????नीचे में सभी एक-दूसरे से मिले हुये हैं…B.D.O,C.O से लेकर थाने तक सब मैनेज हैं…सभी मिलकर,गरीब के हक को खाते हैं…वो भी ताल ठोक कर,बेखौफ होकर….जब चुनाव का समय आता है तो,हमसभी राजनीत करने वाले को “मैटेरियल-मसाला…”की जरूरत होती है…तब जाकर,हमकोगों को गरीबों की समस्याओं का “स्मरण” होता है….नीतीश कुमार और डबल इंजन की सरकार से ज्यादा,निचले स्तर की सभी तरह की सिस्टम….राजनीत और नेतागिरी का आधार इसमें पूर्णरूपेण….दोषी है….और इसमें कभी सुधार नहीं होगा ..कारण,वर्तमान सिस्टम से सुधार सम्भव ही नहीं है…”

इसके जबाव में Shyam Kishor Bharti कहते हैं कि ज़मीनी हकीकत हर कोई जान और समझ रहा है। कागजो पर विकास की फाइल तैयार है लेकिन इस भ्र्ष्ट व्यवस्था के पीछे का कारण क्या है। अपने सिस्टम को अंगुली कर देने का मतलब है सीधे सीधे प्रतिनिधि की निष्क्रियता।

इस पर Ashutosh Kumar फिर लिखते हैं कि Shyam Kishor Bharti जी,100%..सहमत महोदय..पर.केवल जनप्रतिनिधि ही नहीं…सभी स्तर के जिम्मेवार लोग…उदाहरण के लिये,आपसभी अभिभावकों ने हमें,संगठन में चिकित्सा प्रकोष्ठ की जिम्मेवारी दी…हमने जिले के लगभग सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,उपकेंद्र,रेफरल अस्पतालों…का सघन दौरा किया…कतरीसराय,अस्थावां,हिलसा,खुदागंज,नगरनौसा…सभी जगहों पर गया…घर मे बैठकर,कागजों पर खानापूर्ति नहीं कि,सिस्टम को समझा…वहाँ की आंतरिक सच्चाई अगर सार्वजनिक करेंगें…तो,शायद आप अभिभावक लोग,हमें संगठन से “बाहर का रास्ता” दिखा देंगें…कहिएगा,ज्यादा बाबा बनता है..यही वास्तविक हालात है..साहब,दोषी हमसभी हैं…जब तक हमलोग ईमानदारी से अपनी-अपनी जिम्मेवारियों…को समझेंगे नहीं…आरोप-प्रत्यारोप…अनवरत चलता रहेगा…बाकी आप गार्जियन हैं….जब स्वास्थ्य सेक्टर की ये हालात है,तो,बाकी का बताना,ज्यादा मुश्किल नहीं है….

इसी बहस को लेकर Bikku Kumar  कहते हैं कि  आपकी बात 100% एकदम सही है जिधर एक भी आदमी बैठने बाला नहीं है उधर आप देखे ही होंगे की दलान पर दलान बनाये बैठे है और अतिपिछड़ा के टोला में बैठने के लिए कोई दलान नहीं है । और जंहा तक बात आती है पिने बाला पानी का तो एकतरफ दो मंजिला पर पानी पहुंच रहा है तो अतिपिछड़ा के टोला पिने के लिए भी पानी नहीं पहुंच रहा है ये हाल जब कल्याण बिगहा का है तो पुरे बिहार का क्या हाल होगा और आप अपने से भी घूम के देख ही लिए है

वहीं इस पर वरिष्ठ पत्रकार Jayprakash Naveen  दो टूक कहते हैं कि  पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान भी मुझे कल्याण विगहा जाने का मौका मिला था। स्कूल अस्पताल और शूटिंग रेंज तथा सड़क को छोड़ दें तो हकीकत वहीं है जो पहले थी।

उधर इसी पोस्ट को शेयर करते हुए पटना हाई कोर्ट के वरीय अधिवक्ता Vishwanath Prasad लिखते हैं,  😎 राजनीति की ” लू ” के चपेट में जद (यू) का नालन्दा लोकसभा सीट 💯 नितीश नहीं कर पाएंगे ईलाज

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