रांची में बोले नीतीश- ‘अब बिहार की नहीं, झारखंड की चिंता है’

 “बिहार में शराबबंदी हुई। ये कितनी सफल है और कितनी विफल ये बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले ही भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हों लेकिन सच्चाई है ये बिहार के पड़ोसी भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश और झारखंड में गुहार लगाने के बावजूद शराबबंदी नहीं करवा पाए। उल्टे शराब की दुकानों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसी को मुद्दा बनाकर शनिवार को रांची में अपनी पार्टी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा, ‘यह क्या तरीक़ा है भाई…..ये कितनी गंदी बात है।’ हालांकि नीतीश ने रघुबर दास का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ़ था………………..”

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। जब बिहार-झारखंड का विभागज हुआ, तब मुझे बिहार की चिंता हो रही थी, आज मुझे झारखंड की भी चिंता हो रही है। यह कहना है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का।

झाऱखंड प्रदेश जदयू कार्यकर्ता सम्मेलन में नीतीश कुमार जमकर बोले और बिहार में अपनी सरकार की उपलब्धियां बतायीं तो झाऱखंड की विगत 19 साल की सरकारों की विफलताओं का भी जिक्र किया।

नीतीश कुमार ने 56 मिनट तक अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और एक-एक बारीक बात पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने बताया कि किन मुद्दों को लेकर वो चुनाव में जनता के बीच जायेंगे।

उन्होंने झारखंड के पिछड़ेपन की बात की और यह भी गिनाया कि क्यों राज्य पीछे रह गया। उन्होंने ना केवल वजहें गिनायीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताएं भी बतायीं।

उन्होंने जोर दिया कि यहां की मूल आबादी के अस्तित्व के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जमीन संबंधी कानून सीएनटी-एसपीटी एक्ट में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। राज्य में विविधताएं अधिक हैं। इसलिए प्रमंडलवार प्राधिकार का गठन होना चाहिए था, ताकि उसकी आवश्यताओं के अनुरूप उस क्षेत्र का विकास हो सके।

उन्होंने पिछड़ी आबादी की उन्नति के लिए उन्हें जनसंख्या के अनुरूप आरक्षण की भी तरफदारी की। अंत में उन्होंने सामाजिक सौहार्द बनाये रखने में कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी जोर दिया।

झारखंड प्रदेश में जदयू ने नीतीश कुमार के कार्यक्रम के साथ विधानसभा चुनाव का आगाज कर दिया है। पार्टी ने आज अपने राज्यस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया था, जिसमें बिहार के मंत्री संजय झा, रामसेवक सिंह, सांसद राजीव रंजन सिंह समेत पार्टी के दिग्गज शामिल हुए।

नीतीश ने कहा कि बहुत लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं लेकिन बिहार को इससे (शराबबंदी से) बहुत फ़ायदा हुआ और राजस्व की जो क्षति हुई उसकी भरपाई कर ली गई है। नीतीश ने कहा कि झारखंड में भी अगर जनता दल यूनाइटेड को मौक़ा मिला तो वहां के पांच निश्चय में शराबबंदी को भी एक निश्चय के रूप रखा गया है।  

आपको बता दें कि झारखंड के विधानसभा चुनाव को देखते हुए नीतीश कुमार इन दिनों राज्य में सक्रिय हैं। उन्होंने झारखंड इकाई को चुनाव में कितनी सीटों पर लड़ना है या किसके साथ गठबंधन करना है, इस फैसले के लिए अधिकृत किया है।

नीतीश कुमार ने अपने भाषण के अधिकांश हिस्से में बिहार में किए गए कार्यों को गिनाया और कहा कि जबसे उनकी सरकार बनी है, समाज के सभी वर्गों का विकास हुआ है। इस सम्बंध में उन्होंने कई आंकड़े भी दिए।

उन्होंने झारखंड के लिए पांच निश्चय, जिसमें हर क्षेत्र के लिए विकास प्राधिकरण, बिहार की तर्ज़ पर पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान, बुनकरों के लिए विशेष व्यवस्था आदि को शामिल किया है।

हालांकि नीतीश की इन घोषणाओं का कितना असर होगा, ये विधानसभा चुनाव के बाद ही पता चलेगा, लेकिन जनता दल यूनाइटेड का जो संगठन ढांचा है, उसमें फ़िलहाल इस विधान सभा चुनाव में उनके अपने पार्टी के नेता मानते हैं कि बहुत ज़्यादा दाल नहीं गलने वाली है। हालांकि पार्टी की कोशिश होगी कि उसका खाता खुले।

 लेकिन सच्चाई यही है कि भाजपा ने जिस प्रकार से आक्रामक तरीक़े से अपने सरकार में काम और संगटन का विस्तार किया है, वैसे में बिहार केंद्रित जनता दल यूनाइटेड चुनाव में कोई असरदार भूमिका शायद ही इस बार निभा पाए।

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