देखिए कैसा मजाक बन गई है कोडरमा चाइल्ड लाइन

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज़ नेटवर्क। कोडरमा जिले में बच्चों के अधिकार की बहाली और उसके अधिकार की संरक्षण को ले कर कई संस्थाए कार्य कर रही है। उन्ही संस्थाओं में भारत सरकार की अग्रणी संस्था चाइल्ड लाइन भी कोडरमा में बच्चों के मुद्दे को ले कर सक्रिय है। जिनका मुख्य कार्य है बच्चों के अधिकार की सुरक्षा एवं संरक्षण।

परन्तु कोडरमा में इस संस्था की कार्य निष्क्रियता की आलम यह है कि इन्हें जब भी किसी मामले में शिकायत मिलती है तो पुलिस के माफिक घटना हो जाने के बाद घटना स्थल पर पहुंचती है और अपना कोरम पूरा कर के चली आती है।

कुछ ऐसा ही मामला प्रकाश में आया 23 अक्टूबर की रात 8 बजे डोमचांच प्रखंड के बगडो पंचायत में बाल विवाह की तैयारी हो रही थी। जिसकी सुचना चाइल्ड लाइन 1098 पर कॉल कर के दी गई और यह भी बताया गया की एक घंटे अन्दर शादी हो जायेगा।

परन्तु चाइल्ड लाइन की टीम ने इस सूचना को गम्भीरता से नहीं लिया। जिस कारण चाइल्ड लाइन की टीम वहां जब तक पहुंची तब तक शादी हो चूकी थी। अब इनकी कार्य कुशलता भी देखिये!

इनकी टीम ने वहां पर इनके दस्तावेज मांगे। परन्तु दोनों परिवार में किसी का दस्तावेज निरिक्षण नहीं किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनकी टीम ने सारी जिम्मेवारी बागड़ो के मुखिया पर छोड़ कर चले आये और कल अर्थात 24 अक्टूबर को अपने कार्यालय में दस्तावेज ले कर बुलाये।

परन्तु अब तक किन्ही के भी दस्तावेज की जाँच नहीं हो पाई है। इस तरह के कार्य से यह प्रतीत होता है कि चाइल्ड लाइन कोडरमा में मात्र कोरम पूरा करने का कार्य कर रही है।

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4 comments

  1. कोडरमा के कुछ पत्रकार सिर्फ और सिर्फ प्रेस रिलिज का हिस्सा बनकर रह गया है। इससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता एवं निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल उभर रहा है। पूर्वाग्रह एवं दुर्भावनावश कोई कुछ भी लिखकर रीलिज जारी कर रहा है और उसे ही हु-ब-हू अखबार में छापकर पत्रकारिता की छज्जियाॅ उड़ायी जा रही है। ऐसा ही एक मामला 24 अक्टूबर के वेब मिडिया एवं 25 अक्टूबर के कुछ अखबारों में देखने को मिला। बताते चलें कि अपने-आपको मानवाधिकार कार्यकर्ता कहने वाले डोमचांच निवासी ओंकार विश्वकर्मा ने चाइल्डलाइन के विरूद्ध एक प्रेस रिलिज जारी किया। बेव मिडियाकर्मियों एवं कुछ प्रिंट मिडिया ने इसे हू-ब-हु प्रकाशित किया, वहीं कुछ अखबारों ने अपना फर्ज अदाकर चाइल्डलाइन के पक्ष को भी प्रकाशित किया।
    क्या है मामलाः दिनांक 23 अक्टूबर, 2019 को ओंकार विश्वकर्मा ने चाइल्डलाइन के टाॅल फ्री नंबर 1098 पर काॅल कर बगड़ो में बाल विवाह होने की सूचना दी। प्राप्त सूचना के आधार पर चाइल्डलाइन की टीम पूरी ईमानदारी एवं गाईडलाइन के अनुसार संबंधित सभी उच्चाधिकारियों को सूचना देते हुए डोमचांच थाना के एएसआई जाॅन तिग्गा के नेतृत्व में सभी बगड़ो पहुंची। मामले की पड़ताल की फिर, उचित कार्रवाई एवं निदेश देने के उपरांत टीम वापस आती है। तब रात्रि के करीब 9 बज रहा था। गांव के समस्त महिला-पुरूष, गणमान्य लोग एवं मुखिया सहित करीब 300 की संख्या में लोग मौजूद थे। सभी ने कहा कि दोनों बालिग है और इससे संबंधित प्रमाण पत्र है। लेकिन, इस वक्त दिखाना संभव नहीं है। दस्तावेज दिखाने की जिम्मेदारी मुखिया ने लिया। फिर, वरीय अधिकारियों के निदेश पर टीम वापस आती है। दूसरे दिन सभी दस्तावेज के साथ दोनों के अभिभावक एवं गणमान्य लोग कार्यालय आते हैं और उम्र संबंधी प्रमाण पत्र देते हैं जिसमें लडका का उम्र तिथि 02.04.1998 है और बालिका का उम्र तिथि 15.09.2000 है। इस हिसाब से दोनों 18 एवं 21 से ज्यादा है।
    थाना, कोर्ट एवं चाइल्डलाइन अपने गाईडलाइन एवं प्रावधानों के अनुसार अपना कार्य कर रही है न कि व्यक्ति विशेष को खुश करने के लिए। इस मामले में भी व्यक्ति विशेष को खुश नहीं किया लिहाजा, पूर्वाग्रह एवं दुर्भावना के ग्रस्त ओंकार विश्वकर्मा ने लगातार प्रेस रिलिज जारी कर चाइल्डलाइन को बदनाम करने के नियत से लगातार खबरे छपवा रहा है और अखबार का लिंक मानवाधिकार आयोग या अन्य जगह पर भेज कर अपना उल्लू सीधा करना चाहता है। ऐसे गौरख धंधे में कुछ अखबार प्रतिनिधि भी शामिल होने की आशंका है। तभी तो अखबार प्रतिनिधि तथ्यों को जाने बगैर सिर्फ और सिर्फ प्रेस रीलिज को ही हु-ब-हू अपने अखबारों में प्रकाशित कर रहे हैं। रीलिज में जिनके विरूद्ध मामला बताया जा रहा है उनसे अखबार प्रतिनिधि एक बार भी उनका पक्ष नहीं लेते हैं। ऐसे में निष्पक्ष पत्रकारिता और पत्रकारों में सवाल उठना लाजिमी है।
    चाइल्डलाइन के निदेशक इन्द्रमणि साहू ने कहा कि ओंकार के द्वारा पूर्व में कई रिलिज जारी किया गया और तब भी एक बार भी चाइल्डलाइन का पक्ष नहीं पूछा गया। ऐसे में प्रेस, मिडिया या पत्रकारिता जो लोकतंत्र का चैथा स्तंभ है ऐसी तथाकथित पत्रकारिता एवं यहाॅ के पत्रकारों की अकर्मण्यता से घिन आने लगी है।
    इस संबंध में चाइल्डलाइन के द्वारा अखबारों के संपादकों एवं प्रशासन को सूचना देने की तैयारी की जा रही है।

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