…तो क्या सीएम फर्जी शिक्षकों को भी देंगे ‘समान काम के बदले समान वेतन’

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बिहार के सीएम नीतीश कुमार के एलान  ‘सर्टिफिकेट लाओ नौकरी पाओ’ के बाद बिहार में तेजी फे फर्जी शिक्षकों की बाढ़ सी आ गई थी। जिसे जहाँ से डिग्री मिला वह वहीं से ले आया। भले ही राज्य के शिक्षक जम्मू -कश्मीर की राजधानी का नाम नहीं जानते होंगे, लेकिन उनकी डिग्री कश्मीर से आ गई……”

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज ब्यूरो )। देश का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा होगा, जहाँ से बीएड की डिग्री बिहार नहीं आई। यहां तक कि नीतीश कैबिनेट के एक पूर्व मंत्री पर सर्टिफिकेट बेचने का आरोप भी लगा। पूर्व मंत्री के सगे संबधी से लेकर चमचे तथा कार्यकर्ता के नाते रिश्तेदार फर्जी डिग्री के सहारे शिक्षक और लाइब्रेरिअन बन बैठे।

आज भी उन फर्जी शिक्षकों को बिहार के भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था में संलिप्त लोग बचाने में लगें हुए हैं। अगर कहें कि फर्जी शिक्षकों पर सीएम नीतीश कुमार के ही अधिकारी मेहरबान है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अकेले सीएम के गृह जिला में 195 नियोजन इकाई संदेह के घेरे में है।

बिहार में भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था की वजह से ही हाईकोर्ट के फटकार का भी कोई असर नहीं दिख रहा है। हाईकोर्ट के फटकार के बाद भी फर्जी शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं, शिक्षा का बंटाधार करने पर तूले हुए हैं। योग्य शिक्षकों की नौकरी खा रहे हैं।

बिहार में फर्जी शिक्षकों की बहार है। प्रधान सचिव की सख्ती के बाद भी कोई असर नहीं दिख रहा है।फर्जी शिक्षकों को बचाने का खेल चल रहा है। फर्जी शिक्षकों को बचाने तथा नियोजन में फर्जीबाडा पर पर्दा डालने का प्रयास चल रहा है।

यहाँ तक कि प्राथमिक शिक्षा निदेशक के आदेश के बाद भी नालंदा के एक शिक्षक प्रशिक्षण की डिग्री पर बहाल शिक्षकों को अभी तक हटाया नहीं गया है।

एक तरफ कई शिक्षक संगठन सुप्रीम कोर्ट में ‘समान काम के बदले समान वेतनमान ‘की लड़ाई लड़ रहे हैं तो उसी व्यवस्था में हजारों फर्जी शिक्षक भी शामिल है तो क्या सीएम ऐसे में फर्जी शिक्षकों को भी समान वेतनमान देंगे।

बिहार के हर जिले से लेकर प्रखंड तथा पंचायत नियोजन इकाई तथा अधिकारियों के  बीच ऐसी मजबूत सांठगांठ है कि फर्जी प्रमाण-पत्र और गलत तरीके से बहाली की बात जांच में सामने आने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे है।

हद तो यह है की विभाग को यह पता नही है कि क्षमादान के तहत स्वेच्छा से त्यागपत्र शिक्षकों को पदत्याग की स्वीकृति मिली है अथवा नही। वैसे अधिकांश शिक्षक जो जांच मे फर्जी पाए हैं या स्वेच्छा से पदत्याग किए थे, वे काम कर रहे और वेतन भी ले रहे।

12 अक्टूवर को प्रधानसचिव आर के महाजन ने सभी डीपीओ को चेतावनी दी है कि एक सप्ताह मे फर्जी शिक्षकों को नही हटाया गया तो आप कार्रवाई के लिए तैयार रहें। प्रधान सचिव की फटकार के बाद से अधिकारी उसी प्रक्रिया में लग गए हैं जहाँ से हर बार शुरुआत होती है।

प्रधान सचिव की फटकार के बाद सूबे के अधिकांश डीपीओ ने  नियोजन इकाई को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। डीपीओ ने सभी प्रखंड नियोजन इकाई और बीडीओ से पूछा है कि जिन शिक्षकों ने स्वेच्छा से त्य़ागपत्र दिया था, उनके पदत्याग की स्वीकृति मिली है या नही। अगर नही मिली है तो किन परस्थितियों में नही दी गई। वैसे शिक्षकों के पदत्याग की स्वीकृति एक सप्ताह के भीतर दें।

साथ हीं सभी नियोजन इकाई से नियोजित शिक्षकों के टीइटी प्रमाणपत्रों की मांग की गई है। डीपीओ ने बीडीओ और प्रखंड नियोजन इकाई से मांग किया है कि निगरानी जांच हेतू नियोजित शिक्षकों फाइल उपलब्ध नही कराने वाले कितने नियोजन इकाई के खिलाफ केस दर्ज की गई है, इसकी सूची  सात दिनों के अंदर दें। साथ हीं जिन शिक्षकों को हटाने का आदेश दिया गया था उस आदेश पर अमल हुआ अथवा नही।

अकेले सीएम के गृह जिला नालंदा में 195 नियोजन इकाई में गड़बड़ झाला मिला है। 79 नियोजन इकाई ने अभी तक फोल्डर ही जमा नहीं किए हैं। जबकि नालंदा के 184 पंचायतों में 2,267 शिक्षकों के फोल्डर तक जमा नहीं हुए हैं ।

नालंदा के थरथरी प्रखंड के सभी सात पंचायतों में शिक्षकों के फोल्डर तक नहीं मिल रहा है।वहीं चंडी प्रखंड के चंडी, रूखाई, बेलक्षी, महकार, सालेपुर,सिरनावा, तुलसीगढ, नरसंढा ,गंगौरा तथा अरौत में जमकर शिक्षकों की फर्जी बहाली हुई और अभी भी बहाली का सिलसिला चल रहा है।

उधर शिक्षा विभाग ने नालंदा के बिहारशरीफ स्थित अराजकीय कॉलेज ऑफ एजुकेशन की डिग्री रद्द कर दी है। इसके बाद भी इस डिग्री पर शिक्षक कार्यरत बताएँ जा रहे हैं।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक अरविंद कुमार वर्मा ने सभी जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी  (स्थापना)को पत्र लिखकर फर्जी शिक्षकों को हटाने का निर्देश देते हुए लिखा है कि विभागीय पत्रांक 71 दिनांक 25:04:2014 के तहत निर्गत बीएड संबंधित अंक पत्र/प्रमाण पत्र राज्य में नियोजन हेतु स्वीकार नहीं है।

सीडब्लू जेसी संख्या -4138/2014 में दायर याचिका के साथ संलग्न एनेक्चर से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अराजकीय सोगरा कॉलेज ऑफ एजुकेशन कॉलेज से निर्गत बीएड प्रमाण पत्र के आधार पर जिलों में नियोजित नियुक्त शिक्षक अभी भी कार्यरत है।उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक के एक बार नही कई बार फर्जी शिक्षकों को हटानें का आदेश दिया है। लेकिन नियोजन इकाई और जिला लेवल अधिकारियों पर इसका कोई असर नही पड़ रहा है। फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करने के अलावा उनके खिलाफ मामला दर्ज किए जानें और वेतन मद में भुगतान की गयी राशि की वसूली का प्रावधान है।

जिला लेवल के अधिकारी और नियोजन इकाई के सचिव (बीडीओ) हजारों फर्जी शिक्षकों के हटाने के आदेश की फाईल को सालों से दबा कर बैठे हुए हैं। वैसे शिक्षक आज भी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार भी आम आदमी के बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने वाले शिक्षकों को सरकारी खजाने से वेतन दे रही है।

जब राज्य में फर्जी शिक्षकों की बहाली का गोरखधंधा सामने आया तब   2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर निगरानी विभाग ने प्राथमिक और  मध्य विधालयों मे नियुक्त नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की  थी।

जांच में ऐसे कई शिक्षक मिले थे जिनके प्रमाण पत्र  फर्जी थे। निगरानी विभाग ने वैसे शिक्षकों को बर्खास्त करने, वेतन की राशि  वसूल करने और केस दर्ज करने की सिफारिश की थी। लेकिन भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था फर्जी शिक्षकों को बचाने में लगी दिख रही है।

ऐसे में सवाल क्या सीएम फर्जी शिक्षकों को भी ‘समान वेतनमान ‘ का लाभ देंगे या उन फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई होगी?

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