इ मुजफ्फरपुर डीएम तो गजब के पलटु निकले !  आखिर क्या है राज ?

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क।  बिहार के मुजफ्फरपुर डीएम आलाेक रंजन घाेष ने  जिला स्थापना उप समाहर्ता के आदेश को पलट कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। डीएम ने चयनित कार्यालय सहायकों की गयी पदास्थापना पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है।

डीएम ने अपने कार्यालय ज्ञापांक-1206/19 द्वारा संबंधित सभी नियोजकों को प्रेषित आदेश में लिखा है कि जिला स्थापना प्रशाखा, मुजफ्फरपुर के द्वारा ज्ञापांक-1192, 1193, 1194, 1196, 1197,1198/19 के द्वारा जिले के विभिन्न कार्यालयों से प्राप्त अधियाचना के आलोक में कार्यपालक सहायकों के नियोजन हेतु जो आदेश निर्गत किया गया है। उसे शाषी परिषद से अग्रेतर निर्देश प्राप्त होने तक अगले आदेश तक स्थगित किया जाता है।

डीएम ने सभी अधियाची विभागों के पदाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक संबंधित कार्यपालक सहायक के योगदान को स्वीकृत नहीं किया जाए एवं ऐसा किए जाने पर संबंधित अधियाची विभाग के पदाधिकारी पूर्ण रुप से जिम्मेवार माने जाएंगे।

डीएम के आदेशानुसार बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी (सामान्य प्रशासन विभाग) के ज्ञापांक बि.प्र.सु.सो./योजना-02/2012(खंड-II) सो. 1382/19 द्वारा निर्गत आदेश के पूर्व में पैनल से किए गए नियोजन इस आदेश से प्रभावित नहीं होंगे।

बता दें कि बि.प्र.सु.सो./योजना-02/2012(खंड-II) सो. 1382, दिनांकः 31.07.2019 द्वारा वर्तमान में कार्यपालक सहायकों की सभी नियुक्ति जिला स्तरीय पैनल से न किए जाने का आदेश निर्गत है। साथ ही उच्च स्तर पर शाषी परिषद के समक्ष विचाराधीन है।

ऐसे में सबाल उठना लाजमि है कि मुजफ्फरपुर डीएम अचानक *पलटु* कैसे हो गए। किसी उच्च अधिकारी या बेल्ट्रान के माफियाओं के दबाव में या फिर उन्हें या उनके स्थापना प्रशाखा को बहुचर्चित बि.प्र.सु.सो./योजना-02/2012(खंड-II) सो. 1382 आदेश से अनभिज्ञ थे।

दरअसल, चयनित होने के बाबजूद कार्यालय सहायकों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल पान एक बहुत बड़ी साजिश, घोटाला और उच्च अधिकारी की चाल है।

बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार सभी जिलाधिकारी को कार्यपालक सहायक का नियोजन करने का आदेश दिया जाता है। जिसमें सभी जिला में परीक्षा लेकर पैनल निर्माण करने और राज्य के सभी पंचायतों में कार्यपालक सहायक की नियुक्ति करने का फरमान जारी होता है।

इसी के आलोक में सभी जिलों में ऑनलाइन कंप्यूटर टाइपिंग टेस्ट लेकर पैनल बनाने का काम होता है, जिसमें गरीब, मेहनती और कंप्यूटर के जानकार आवेदकों का चयन होता है।

पटना सहित कई जिलों में नियुक्ति पत्र देकर योगदान कराया जाता है। उसी समय अचानक से सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश ज्ञापांक 1382 सभी जिलों को भेजा जाता है। जिसमें आगे से कार्यपालक सहायक का नियोजन जिला पैनल से न कर बेल्ट्रान के माध्यम से करने का तुगलकी फरमान आता है।

प्रश्न उठता है कि आधे जिला जिसने बहाली कर लिया और आधे जिला जिसका बहाली प्रक्रियाधीन है दोनों के लिए अलग अलग नियम और मापदंड क्यों अपनाएं जा रहे हैं?

 बेल्ट्रान में ऑपरेटर बनने के लिए प्रतिभा नहीं पैसा होना चाहिए। बेल्ट्रान वाह्य एजेंसी के माध्यम से एक ऑपरेटर से लगभग 2 से 3 लाख रुपये की उगाही करता है, जिसका मोटा हिस्सा एमडी बेल्ट्रान को भी जाता है।

यानी जितनी कंप्यूटर ऑपरेटर की बहाली होगी, उतनी मोटी कमाई होगी। यही कारण है कि सरकार के कुछ दलालों ने कार्यपालक सहायक की बहाली की जगह बेल्ट्रान ऑपरेटर की बहाली करना उचित समझा।

राज्य के 90% बेल्ट्रान के ऑपरेटर को ठीक से कंप्यूटर ऑपरेट नहीं करने आता है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यकुशलता का भगवान हीं मालिक है।

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