12वां एक दिवसीय महाधिवेशन में 10 वीं बार JMM के निर्विरोध अध्यक्ष होंगे दिशुम गुरू शिबू सोरेन

 
12वां एक दिवसीय महाधिवेशन में 10 वीं बार JMM के निर्विरोध अध्यक्ष होंगे दिशुम गुरू शिबू सोरेन 

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)।  झारखंड मुक्ति मोर्चा का 12वां एक दिवसीय महाधिवेशन आज हरमू स्थित सोहराय भवन में शुरू होने जा रहा है। इस महाधिवेशन में 77 वर्षीय दिशुम गुरू शिबू सोरेन लागातार 10 वीं पार्टी के निर्विरोध केंद्रीय अध्यक्ष चुने जाएंगे।

वहीं फिर से हेमंत सोरेन को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुना जाएगा। पार्टी के महाधिवेशन की तैयारी पूरी कर ली गयी है। पार्टी के इस महाधिवेशन को लेकर पूरे शहर को पार्टी के झंडे-बैनर एवं पोस्टर से पाट दिया गया है।

इस महाधिवेशन में पार्टी के संविधान संशोधन सहित कई राजनीतिक,आर्थिक प्रस्ताव रखे जाएंगे। जिस पर चर्चा के बाद उसे  पास किया जाएगा।

झामुमो का जन्म बिरसा मुंडा के जन्म दिवस 15 नवंबर 1972 को हुआ। मगर विधिवत रूप से 4 फरवरी 1973 को धनबाद के गोल्फ ग्राऊंड में झामुमो की स्थापना हुई। शिवाजी समाज के संस्थापक स्व. विनोद बिहारी महतो को झामुमो पहला अध्यक्ष चुना गया था, जबकि शिबू सोरेन पार्टी के महासचिव चुने गए।

वर्ष 1991 में मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष विनोद बिहारी महतो के निधन के बाद शिबू सोरेन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा का झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने में काफी अहम योगदान रहा है।

22 जुलाई 1997 को  शिबू सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा के आंदोलन के दबाव में ही बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने बिहार विधानसभा से झारखंड बंटवारे का एक प्रस्ताव पारित कराया था।

11 जनवरी 1944 को नेमरा में जन्मे शिबू सोरेन एक भारतीय राजनेता है। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष है। 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार में वे कोयला मंत्री बने लेकिन चिरूडीह कांड जिसमें 11 लोगों की ह्त्या हुई थी के सिलसिले में गिरफ़्तारी का वारंट जारी होने के बाद उन्हें केन्द्रीय मंत्रीमंडल से 24 जुलाई 2004 को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

उनकी स्कूली शिक्षा भी यहीं हुई। स्कूली शिक्षा समाप्त करने के बाद ही उनका विवाह हो गया और उन्होंने पिता को खेती के काम में मदद करने का निर्णय लिया।

उनके पिता शोभराम सोरेन कि हत्या की गयी थी। उनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत 1970 में हुई। उन्होंने 23 जनवरी, 1975 को उन्होंने तथाकथित रूप से जामताड़ा जिले के चिरूडीह गाँव में "बाहरी" लोगों (आदिवासी जिन्हें "दिकू" नाम से बुलाते हैं) को खदेड़ने के लिये एक हिंसक भीड़ का नेतृत्व किया था।

इस घटना में 11 लोग मारे गये थे। उन्हें 68 अन्य लोगों के साथ हत्या का अभियुक्त बनाया गया।

शिबू पहली बार 1977 में लोकसभा के लिये चुनाव में खड़े हुये परन्तु पराजित हुए। 1980 में वे लोक सभा चुनाव जीते। इसके बाद क्रमश: 1986, 1989, 1991, 1996 में भी चुनाव जीते। 10 अप्रैल 2002 से 2 जून 2002 तक वे राज्यसभा के सदस्य रहे। 2004 में वे दुमका से लोकसभा के लिये चुने गये।

सन 2005 में झारखंड विधानसभा चुनावों के पश्चात वे विवादस्पद तरीक़े से झारखंड के मुख्यमंत्री बने, परंतु बहुमत साबित न कर सकने के कारण कुछ दिनो के पश्चात ही उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा।