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रिटायर्ड जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता होंगे झारखंड के नए लोकायुक्त

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में लंबे समय से खाली पड़े लोकायुक्त पद पर आखिरकार नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो गई है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार गुप्ता को राज्य का नया लोकायुक्त नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब औपचारिक रूप से लोकभवन में उन्हें शपथ दिलाई जाएगी। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

पाँच साल बाद भरा अहम संवैधानिक पदः झारखंड में लोकायुक्त का पद वर्ष 2021 में तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस डी.एन. उपाध्याय के निधन के बाद से खाली पड़ा था। लगभग पाँच वर्षों तक इस महत्वपूर्ण निगरानी संस्था का निष्क्रिय रहना शासन-प्रणाली में एक बड़ी कमी के रूप में देखा जा रहा था। ऐसे में जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की नियुक्ति को प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार-नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

न्यायिक अनुभव और शैक्षणिक पृष्ठभूमिः करीब 66 वर्षीय न्यायमूर्ति गुप्ता का न्यायिक और अकादमिक सफर संतुलित और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संत जेवियर्स स्कूल साहिबगंज से प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज और कैंपस लॉ सेंटर से उच्च शिक्षा हासिल की।

18 सितंबर 2013 को उन्हें झारखंड हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जहाँ उन्होंने लगभग आठ वर्षों तक सेवा दी और 30 मई 2021 को सेवानिवृत्त हुए। अपने कार्यकाल में वे कई महत्वपूर्ण मामलों में संतुलित और विधिसम्मत निर्णयों के लिए जाने गए।

लोकायुक्त की भूमिका और चुनौतियाँ: लोकायुक्त संस्था का मूल उद्देश्य राज्य सरकार और उसके अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, कदाचार और शक्ति के दुरुपयोग से संबंधित शिकायतों की जांच करना है। झारखंड जैसे संसाधन-समृद्ध लेकिन विकासात्मक चुनौतियों से जूझ रहे राज्य में लोकायुक्त की भूमिका और भी अहम हो जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में लोकायुक्त की अनुपस्थिति ने शिकायत निवारण तंत्र को कमजोर किया। कई मामलों में जांच लंबित रही या आगे नहीं बढ़ सकी। अब नए लोकायुक्त के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने मामलों को गति देना और नई शिकायतों के त्वरित एवं निष्पक्ष निपटान को सुनिश्चित करना होगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक संदेशः यह नियुक्ति केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य सरकार प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर गंभीर है। साथ ही यह कदम जनता के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे की राहः जस्टिस गुप्ता के कार्यभार संभालने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि वे लोकायुक्त संस्था को कितना सक्रिय और प्रभावी बना पाते हैं। क्या वे लंबित मामलों को तेजी से निपटा पाएंगे? क्या वे भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में ठोस कार्रवाई कर पाएंगे?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि झारखंड में लोकायुक्त की पुनः सक्रियता प्रशासनिक पारदर्शिता के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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