ओरमांझी में संतोषप्रद नहीं है डोभा निर्माण के कार्य :डीडीसी

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रातु, चान्हों, राहे, नामकुम प्रखंडों की स्थिति सराहनीय

मुकेश भारतीय

ओरमांझी रांची के कई प्रखंडों में प्रशंसनीय कार्य हो रहे हैं। रातु, चान्हों, राहे, नामकुम प्रखंड में बहुत अच्छे कार्य हुए हैं। लेकिन ओरमांझी प्रखंड में डोभा निर्माण के कार्य संतोषजनक नहीं है।

उक्त बातें ओरमांझी प्रखंड मुख्यालय सभागार में मनरेगाकर्मियों के साथ समीक्षात्मक बैठक के उपरांत उप विकास आयुक्त वीरेन्द्र कुमार सिंह ने खास बातचीत में कही ।

उन्होनें कहा कि मनरेगा का उद्देश्य डोभा बनाना एवं सुखाड़ की स्थिति में हमारे गांव के मजदूर पलायन न करे, यह भी वस्तुनिष्ठ है। डोभा निर्माण से जलस्तर  में सुधार होने के आलावे किसान अधिक सुरक्षित फसल भी लेने में कामयाब होगें। इससे वृक्षारोपन भी बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के आदेश से 1.5 लाख डोभा बनाने की योजना के तहत एक गांव में पांच डोभा बनाने का लक्ष्य दिया गया है और लक्ष्य है हम आगामी 15 जून तक इस लक्ष्य को पूरा कर लें। आज उसी सिलसिले में ओरमांझी प्रखंड में समीक्षा करने आए तो प्रायः पंचायतों में इस योजना के कार्य काफी निराशाजनक है। यहां सभी को आगामा 28 मई तक स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि जितने भी डोभा बनाने के लक्ष्य निर्धारित हैं, उसका कार्य प्रारंभ कर दें और 29 मई तक उसका 50 प्रतिशत कार्य पूरा कर दें।

डीडीसी ने कहा कि अगर यह नहीं हुआ तो उसके बाद रोजगार सेवक को हटाने की और पंचायत सेवक के विरुद्ध प्रपत्र भरने की कार्रवाई होगी। इधर नए रोजगार सेवक नियुक्त करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। जो काम करेगें जो रहेगें और जो काम नहीं करेगें, वे हटेगें।

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उन्होंने एक सबाल की बाबत कहा कि ओरमांझी में इस योजना के प्रति जो जागरुकता होनी चाहिए, वह नहीं दिख रही है। लोग बता रहे हैं कि इसमें पंचायत प्रतिनिधि की अरुचि है। इसका कारण है कि विभागीय लोग उन्हें योजना की महता समझा नहीं पा रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि भी यह कह कर नहीं बच सकते हैं कि उनके पंचायत में डोभा की जरुरत नहीं है। यदि ऐसा वे करते हैं तो मुखिया यदि पंचायत अध्यक्ष हैं तो हमारे पंचायत सेवक पंचायत के सचिव हैं। वे हर स्तर पर गलत कार्यों का विरोध करेगें क्योंकि इस योजना को सरकार की प्रथमिकता प्राप्त है और लक्ष्य निर्धारित है।

उन्होंने डोभा निर्माण योजना में मनरेगा मजदूर और जेसीबी मशीन से कार्य कराने के उभरे विवाद को लेकर बताया कि हमारे सीएम जब पीएप से मिले थे तो डोभा निर्माण की बात हुई। इस मद 502 करोड़ रुपये भू संरक्षण विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हें एक लाख डोभा बनाने का लक्ष्य मिला है। दूसरी तरफ मनरेगा को 1.5 लाख डोभा बनाने का लक्ष्य दिया गया है। मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ डोभा बनाना ही नहीं, सुखाड़ की स्थिति में पलायन को रोकना है। रोजगार देना है। इस योजना के माध्यम से हम दोनों लक्ष्य प्राप्त कर रहे हैं। किसी एक के बल किसी भी लक्ष्य को पा लेना संभव नहीं है। लेकिन हमारा प्रयास है कि हम लक्ष्य के करीब रहें।

उन्होनें रांची जिले में गहन क्षेत्र भ्रमण के उपरांत ताजा स्थिति के बाबत कहा कि रांची के कई प्रखंडों में प्रशंसनीय कार्य हो रहे हैं।  रातु, चान्हों, राहे, नामकुम प्रखंड में बहुत अच्छे कार्य हुए हैं।

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किसानों की 20 डिसमिल की जमीन जैसी मनरेगा की शर्तों के सबाल पर कहा कि हमने इस उचित प्रश्न को मनरेगा आयुक्त के सामने भी रखा है। विभाग जिस तरह की सोच रखते है 5-10-20 एकड़ की। लेकिन रांची जैसे जिलों के गांव के खेत काफी टुकड़ों में छोटे-छोटे हैं। इस पर आयुक्त ने कहा कि ऐसे हालात में दो-तीन खेत लेकर भी एक डोभा बनाया जा सकता है। लोगों को सामूहिक डोभा का निर्माण करना अधिक लाभकारी होगा। लाभुक स्वतंत्र हैं उसका हर तरह के इस्तेमाल के लिए। वे मछली पालन एवं जलीय खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर कर सकते हैं।

मनरेगा मजदूरों की मेहताना में देरी से योजना पर पड़ने वाले कुप्रभाव की बाबत कहा कि यह काफी चिंतनीय बात है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। विभागीय तौर पर कुछ तकनीकी परेशानियां हैं। कुछ मजदूरों में भी कमियां है।उनके पास एक से अधिक बैंक एकाउंट होते हैं। कहीं पैसा पहुंचता है तो कहीं पैसा रुक जाता है। इसलिए सारे मजदूरों का एक एकाउंट हो, जो आधार लिंक्ड हो। डाकघरों से भुगतान में दिक्कत हो रही है। 15 जून के बाद जहां भी बैंक होगें, वहां मजदूरों के सारे खाते को स्थान्तरित कर देगें। झाखंड सरकार मनरेगा मजदूरी बढ़ाने की अनुशंसा कर दी है। केन्द्र प्रायोजित यह योजना होती है, वहां से उम्मीद है कि लाभ मिलेगा।

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