आस-पड़ोसदेशफीचर्डराजनीति

राज्यसभा में नीतीश की एंट्री, राष्ट्रपति के हरिवंश मनोनयन पर छिड़ा सियासी संग्राम?

“राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बिहार में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत हो सकता है। एनडीए के भीतर नए चेहरे को मुख्यमंत्री पद सौंपे जाने की चर्चाएँ तेज हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता संतुलन, जातीय समीकरण और आगामी चुनावी रणनीति को नया मोड़ दे दिया है…

नई दिल्ली (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज /मुकेश भारतीय)। राष्ट्रीय राजनीति में शुक्रवार का दिन बिहार और संसद दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की, वहीं उच्च सदन के पूर्व उपसभापति  हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य के रूप में पुनः राज्यसभा भेजा गया। दोनों घटनाओं ने एक साथ राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।

जहाँ नीतीश कुमार का राज्यसभा में प्रवेश बिहार की सत्ता राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है, वहीं हरिवंश के राष्ट्रपति मनोनयन पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के लिए आरक्षित नामित सीट पर एक सक्रिय राजनीतिक व्यक्ति की नियुक्ति क्या संविधान की मूल भावना के अनुरूप है?

शपथ के साथ बदलते राजनीतिक समीकरणः शुक्रवार को संसद भवन परिसर में आयोजित संक्षिप्त समारोह में राज्यसभा के सभापति ने नीतीश कुमार को सदस्यता की शपथ दिलाई। इस मौके पर केंद्र और बिहार की राजनीति से जुड़े कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। यह शपथ केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार का राज्यसभा में जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब उनकी भूमिका राज्य की बजाय राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी लोकसभा और राष्ट्रीय गठबंधन समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

हरिवंश के मनोनयन पर कांग्रेस का हमलाः हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के नामित सदस्य के रूप में मनोनीत किए जाने के बाद कांग्रेस ने इस पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है।

कांग्रेस मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः यह पहली बार है जब कोई व्यक्ति पहले किसी राजनीतिक दल से सांसद रहा हो और बाद में उसे राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य बनाया गया हो।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हरिवंश को राज्यसभा भेजना ही था, तो भाजपा या जदयू अपने कोटे से उन्हें भेज सकती थी। नामित सीट, जो परंपरागत रूप से कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र की विशिष्ट हस्तियों के लिए होती है, उस पर एक राजनीतिक चेहरे का मनोनयन “पीड़ादायक” और “अनुचित” है। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नामित सीटों को लेकर संसद के भीतर और बाहर अक्सर संवैधानिक बहस होती रही है।

संवैधानिक पहलू: क्या कहता है नियम? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं, जिनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत कर सकते हैं।

इन नामित सदस्यों का चयन सामान्यतः निम्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों में से किया जाता है, जैसे- कला, साहित्य, विज्ञान, सामाजिक सेवा।

यही कारण है कि हरिवंश के मनोनयन पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि समर्थकों का तर्क है कि हरिवंश का लंबा पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन का अनुभव उन्हें इस श्रेणी में योग्य बनाता है।

हरिवंश ने सक्रिय राजनीति में आने से पहले हिंदी पत्रकारिता में एक मजबूत पहचान बनाई थी और कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े रहे हैं। यही आधार उनके समर्थक उनके मनोनयन के पक्ष में पेश कर रहे हैं।

रंजन गोगोई की सीट और राजनीतिक संदेशः पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई नामित सीट पर हरिवंश को लाया गया है। इस निर्णय को केवल एक औपचारिक मनोनयन नहीं, बल्कि संसदीय नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हरिवंश एक बार फिर राज्यसभा के उपसभापति पद के प्रमुख दावेदार हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में जदयू और एनडीए की स्थिति और मजबूत हो सकती है।

बिहार की राजनीति पर क्या असर? नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल बिहार की सत्ता को लेकर खड़ा हो गया है। क्या यह उनके मुख्यमंत्री पद से चरणबद्ध दूरी बनाने की शुरुआत है?

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button