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झारखंड में ACB की 8 माह की जांच में 38 से 750 करोड़ तक पहुंचा शराब घोटाला

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की आठ माह लंबी जांच में घोटाले की अनुमानित राशि 38 करोड़ से बढ़कर करीब 750 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस संगठित भ्रष्टाचार की परतें खुलती जा रही हैं।

हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद एसीबी अब तक एक भी आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं कर सकी है, जिससे जांच की गति और मंशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

एसीबी ने इस मामले में 20 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच की शुरुआत की थी। शुरुआती जांच में यह सामने आया था कि मैनपावर सप्लाई से जुड़ी दो कंपनियों मेसर्स विजन हॉस्पिटैलिटी सर्विस एंड कंसल्टेंट्स प्रालि. और मेसर्स मार्शन इनोवेटिव सिक्यूरिटी सर्विसेस प्रालि. ने मिलीभगत और षड्यंत्र के तहत फर्जी बैंक गारंटी जमा कर सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, नुकसान का आंकड़ा कई गुना बढ़ता चला गया।

आईएएस अधिकारियों से लेकर एजेंसी संचालकों तक गिरफ्तारीः प्राथमिकी दर्ज होने के दिन ही एसीबी ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया। अगले दिन जेएसबीसीएल के तत्कालीन जीएम (फाइनेंस) सुधीर कुमार दास, जीएम (ऑपरेशंस) सुधीर कुमार और प्लेसमेंट एजेंसी के प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह की गिरफ्तारी हुई।

जांच के दौरान 17 जून 2025 को पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में विजन और मार्शन कंपनियों से जुड़े विपिन यादव, भाई परमार, महेश शेडगे, परेश अभयसिंह ठाकुर और विक्रम सिंह ठाकुर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि अकेले इन कंपनियों की वजह से ही विभाग को करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

अब तक इस मामले में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें दो आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं। बावजूद इसके, चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं।

ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को भी मिला फायदाः जांच में यह भी सामने आया कि झारखंड में ब्लैकलिस्ट की गई चार प्लेसमेंट एजेंसियों पर करीब 450 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके बावजूद पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे की कथित मेहरबानी से छत्तीसगढ़ की शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।

साल 2022 में थोक शराब आपूर्ति करने वाली छत्तीसगढ़ की दो कंपनियों मेसर्स दीशिता वेंचर्स प्रालि. और मेसर्स ओम साईं विबरेजेज प्रालि. को नवंबर 2024 में करीब 11 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया, जबकि नए मंत्री के शपथ ग्रहण के बाद उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।

नकली होलोग्राम से करोड़ों की चपतः नोएडा की कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्रालि. को शराब की बोतलों के लिए 52 करोड़ रुपये के होलोग्राम आपूर्ति का ठेका मिला था। कंपनी के प्रबंध निदेशक विधु गुप्ता पर झारखंड में नकली होलोग्राम की सप्लाई कर देसी शराब बेचने का आरोप है। इससे विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। एसीबी ने उन्हें 2 जुलाई को गिरफ्तार किया था, हालांकि वह फिलहाल जमानत पर हैं।

घटिया शराब से 200 करोड़ का नुकसानः जांच में यह भी खुलासा हुआ कि झारखंड में देसी शराब की आपूर्ति का ठेका पाने वाली वेलकम डिस्टलरीज प्रालि. और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी ने घटिया और निम्न स्तर की शराब की आपूर्ति की। इससे राज्य सरकार को 200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ।

वेलकम डिस्टलरीज के निदेशक राजेंद्र प्रसाद जायसवाल को 13 नवंबर को गिरफ्तार किया गया, जो अभी जेल में हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी के संचालक नवीन केडिया को एसीबी ने 8 जनवरी को गोवा के एक स्पा से गिरफ्तार किया था, लेकिन ट्रांजिट बेल मिलने के बाद वह फरार हो गया और अब तक पकड़ से बाहर है।

जांच जारी, लेकिन जवाब अधूराः शराब घोटाले में रकम बढ़कर 750 करोड़ रुपये तक पहुंचने के बावजूद चार्जशीट का दाखिल न होना एसीबी की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आम जनता अब यह जानना चाहती है कि इतने बड़े घोटाले के असली सूत्रधार कब बेनकाब होंगे और क्या दोषियों को वास्तव में सजा मिल पाएगी या मामला लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझकर ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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