हाजीपुर/पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर से लोकतंत्र और विकास के दावों की असल तस्वीर सामने आई है, जहां बदहाल सड़क से त्रस्त ग्रामीणों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन का वीआईपी काफिला इलाके से गुजर रहा था। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे ग्रामीणों ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने प्रशासन और सत्ता दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया।
घटना हाजीपुर के एक गांव की है, जहां सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
बताया जाता है कि इलाके के भाजपा विधायक अवधेश सिंह के साथ डीएम और एसपी का काफिला गांव से गुजर रहा था। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। लोगों ने काफिले को रोकने की कोशिश की और अधिकारियों से गाड़ियों से उतरकर गांव की बदहाली देखने की अपील की।
लेकिन जब काफिला आगे बढ़ने लगा तो आक्रोशित ग्रामीण सड़क पर ही गाड़ियों के सामने लेट गए। कुछ लोग वीआईपी वाहनों के चक्कों के आगे जान जोखिम में डालकर बैठ गए, जिससे कुछ देर के लिए पूरा काफिला रुक गया। मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और पुलिस-प्रशासन को ग्रामीणों को समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2000 से लेकर अब तक इस इलाके ने लगातार भाजपा के प्रतिनिधियों को चुना। पहले केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और अब विधायक अवधेश सिंह पर जनता ने भरोसा जताया, लेकिन बदले में गांव को आज तक एक अच्छी सड़क भी नसीब नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि सादगी और जनता के बीच रहने का दावा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद आम लोगों की समस्याओं से दूरी बना लेते हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब जनता अपने बुनियादी अधिकार यानी सड़क की मांग कर रही है, तो उसे आखिर अपनी जान जोखिम में डालकर विरोध क्यों करना पड़ रहा है?
घटना के दौरान कई ग्रामीणों ने प्रशासनिक रवैये पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि यदि अब भी उनकी आवाज नहीं सुनी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। कुछ ग्रामीणों ने यह आशंका भी जताई कि विरोध करने वालों पर कहीं प्रशासनिक कार्रवाई या मुकदमेबाजी न शुरू कर दी जाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में विकास और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर 26 वर्षों तक एक ही राजनीतिक दल पर भरोसा जताने के बावजूद अगर जनता को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो विकास के दावों की सच्चाई क्या है?
फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। ताकि गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए इस तरह सड़क पर उतरकर संघर्ष न करना पड़े।









