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EVM को लेकर RJD समर्थक को महंगा पड़ा X पर ऐसी टिप्पणी करना, EOU ने दर्ज की FIR

नालंदा दर्पण डेस्क। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तथाकथित एक राजद समर्थक द्वारा सरकार और राजभवन पर टिप्पणी करना काफी मंहगा पड़ गया है। इस मामले में इस मामले वेरिफाइड हैंडल चलाने वाले नितेश कार्तिकेन को प्राथमिक अभियुक्त बनाकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

खबर है कि बिहार राजभवन द्वारा उकेत पोस्ट पर संज्ञान लिये जाने के बाद बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने एफआइआर दर्ज करते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच और आरोपी की पहचान को लेकर एसआइटी का गठन किया है।

इओयू अधिकारियों के अनुसार आरोपी के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा करते हुए जल्द ही आवश्यक विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी। विवादित पोस्ट को हटाने को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है।

दरअसल अपने प्रोफाइल में राजद आइटी सेल से जुड़े होने का दावा करने वाले नितेश कार्तिकेन ने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया है कि भारत के गृह मंत्री के इशारों पर बिहार के राजभवन में दो इवीएम हैकर को रुकवाया गया है।

एक्स पोस्ट में दोनों संदिग्ध व्यक्ति का नाम पीके कश्यप और डॉ. एमके भाई बताया गया है। यही नहीं इस एक्स पोस्ट में उक्त दोनों व्यक्ति को इवीएम हैकिंग का विशेषज्ञ बताते हुए मुख्यमंत्री और चुनाव आयोग से भी सवाल किया गया है।

कहते हैं कि इस पोस्ट के वायरल होने पर बिहार राजभवन ने कड़ा संज्ञान लिया और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल चौंथू ने इस पोस्ट को गलत व आपत्तिजनक बताते हुए इओयू को कार्रवाई के लिए लिखा कि असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन शब्दों का उल्लेख केंद्र सरकार तथा राजभवन को बदनाम करने की नीयत से किया गया है।

हालांकि, ईओयू की कार्रवाई पर Nitesh Kartiken @Laluwadi_Nitesh ने पुनः एक पोस्ट कर लिखा है कि

Commenting on X on EVM proved costly for RJD supporter EOU filed FIR“आदरणीय राज्यपाल महोदय जी ने हमारे ऊपर केस दर्ज किया है। लोकतंत्र का जब महापर्व चल रहा हो और आमजन निष्पक्ष, शान्तिपूर्ण बिना किसी हस्तक्षेप के अपना मताधिकार का प्रयोग करना चाहते हैं।

मत मूल्यवान है अगर कोई चर्चा चौक चौराहों पर मत के साथ छेड़छाड़ कि होने लगे तो सहज प्रहरी होने के नाते लोकतांत्रिक मूल्य एवम मौलिक अधिकार की रक्षा हेतु सवाल को जनता के बीच में रखना एक नागरिक के तौर पर नैतिक जिम्मेदारी है। सत्य और असत्य कि पहचान करना शासन कि जिम्मेवारी है।

कर्तव्य के निर्वहन करने के बजाय प्राथमिकी की धमकी भरा पत्र पत्राचार करना एक संदेह को और जन्म देता है, पर सत्य तो सत्य ही होता है न?

ये बिहार है लोग यहां के सजग हैं नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन अगर करते हैं तो किसी तरह के दवाब से निपटने का जज्बा भी रखते हैं, चुकी मैं बिहारी हूं , हम तो कर्तव्य निभायेंगे जी”।

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वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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