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स्कूल पढ़ने जाने के भय से भाई-बहन ने रची थी अपहरण की गजब कहानी !

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में एक स्कूली छात्र के कथित अपहरण की घटना ने पुलिस और सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया। इस मामले में पुलिस घंटों परेशान रही और सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के दबाव में बिना पूरी जांच के अपहरण का मुकदमा दर्ज करना पड़ा। लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पता चला कि यह सब स्कूल जाने के डर से भाई-बहन की रची गई एक नाटकीय साजिश थी। इस खुलासे ने न सिर्फ पुलिस को हैरान किया, बल्कि पूरे मामले को एक सबक में बदल दिया। 

बताया जाता है कि सुबह लहेरी थाना क्षेत्र के मुरारपुर मोहल्ला निवासी विवेकानंद प्रसाद के 10 वर्षीय बेटे अभिषेक कुमार के अपहरण की खबर फैली। अभिषेक की छोटी बहन लक्ष्मी ने परिवार को बताया कि सुबह करीब 7:52 बजे दोनों स्कूल जा रहे थे। गांधी मैदान के पास कमरूद्दीनगंज मार्ग पर एक बोलेरो गाड़ी रुकी थी। गाड़ी में सवार लोगों ने अभिषेक से कहा कि मेरा पैर फ्रैक्चर हो गया है, मेरा रूमाल गिर गया, उठाकर दे दो। जैसे ही अभिषेक रूमाल देने गया, उसे जबरन गाड़ी में खींच लिया गया। लक्ष्मी ने आगे बताया कि एक बदमाश उसे भी गाड़ी में बिठाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उसने दांत काटकर खुद को छुड़ा लिया और भाग गई।

इस कहानी को सुनते ही परिवार में हड़कंप मच गया। खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली और मोबाइल मीडिया ने बिना पुष्टि के इसे प्रसारित करना शुरू कर दिया। दिन के उजाले में बीच सड़क पर हुई इस कथित संगीन घटना ने पुलिस पर तुरंत कार्रवाई का दबाव डाल दिया। पिता के बयान के आधार पर पुलिस ने बिना देर किए अपहरण का मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि अभिषेक अपने ननिहाल में है। उसे वहां से बरामद कर लिया गया। इसके बाद अभिषेक के मामा मुन्ना कुमार ने नया मोड़ लाते हुए आरोप लगाया कि उनकी पत्नी, जो अब उनके साथ नहीं रहती, उसने अभिषेक का अपहरण करवाया था। मुन्ना ने कहा कि उनकी पत्नी ने अभिषेक को मिलने बुलाया था और जब वह नहीं गया तो उसने अपहरण की साजिश रची।

पुलिस ने कथित घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की। लेकिन अपहरण का कोई सबूत नहीं मिला। इसके बाद अभिषेक और लक्ष्मी से सख्ती से पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने सारी सच्चाई उगल दी।

अभिषेक ने बताया कि उसे स्कूल जाने का डर था और वह घर से भागना चाहता था। उसने अपनी छोटी बहन लक्ष्मी को 10 रुपये देकर कहा कि वह परिवार को अपहरण की कहानी सुना दे। लक्ष्मी ने भाई की बात मान ली और एक ऐसी नाटकीय कहानी गढ़ दी। जिस पर परिवार और पुलिस दोनों को शुरू में यकीन हो गया।

अभिषेक ने बताया कि वह स्कूल जाने के बजाय शहर से बाहर भागने की योजना बना रहा था।  लेकिन किसी कारणवश वह अपने ननिहाल पहुंच गया। दूसरी ओर लक्ष्मी ने पहले अपहरण की कहानी सुनाई और बाद में नया दावा किया कि मोरा तालाब गांव के पास जाम में फंसने पर अभिषेक गाड़ी से कूदकर भाग गया और ननिहाल पहुंच गया।

इस पूरे मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की खबरों के प्रसार ने उन्हें दबाव में ला दिया था, जिसके चलते बिना जांच के केस दर्ज करना पड़ा। फुटेज और बच्चों की स्वीकारोक्ति से यह साफ हो गया कि अपहरण की कोई घटना हुई ही नहीं थी। यह सब स्कूल जाने से बचने के लिए बच्चों की शरारत थी।

यह घटना न सिर्फ पुलिस के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक सबक बन गई। सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की पुष्टि के खबरें फैलाने और बच्चों की शरारतों पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। अभिषेक और लक्ष्मी की यह नाटकीय साजिश भले ही मासूमियत में शुरू हुई हो, लेकिन इसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया। अब इस मामले का पटाक्षेप हो चुका है और पुलिस आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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