River Ranching: मछुआरों ने कोशी संगम पर पकड़ी 40 किलो की ‘गंगा की रानी’, उमड़ा जनसैलाब

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। River Ranching: प्रकृति और मानवीय प्रयासों के अनोखे संगम की एक रोचक कहानी सामने आई है। बिहार के कटिहार जिले में गंगा और कोशी संगम पर स्थानीय मछुआरों ने एक ऐसी मछली पकड़ी है। जिसका वजन सुनकर हर कोई हैरान है। यह मछली पूरे 40 किलोग्राम की है और इसे देखने के लिए संगम तट पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। यह घटना न सिर्फ मछुआरों के लिए खुशी का सबब बनी, बल्कि मछली पालन की संभावनाओं को भी रेखांकित कर रही है।

मछुआरों का कहना है कि सुबह के शुरुआती घंटों में जब उन्होंने जाल डाला तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि उनकी मेहनत का फल इतना बड़ा होगा। जाल में फंसी इस विशाल मछली को बाहर निकालने में कई लोगों की मदद लेनी पड़ी। देखते ही देखते यह खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और आसपास के गांवों से लोग इसे देखने के लिए दौड़े चले आए। कुछ लोगों ने इसे ‘गंगा की रानी’ का नाम दिया तो कुछ इसे क्षेत्र के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। इस घटना को जिला प्रशासन के उस प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है, जो मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए पहले शुरू किया गया था।

दरअसल कटिहार जिला प्रशासन ने ‘रिवर रैंचिंग’ कार्यक्रम के तहत गंगा और कोशी नदियों में मछली के बीज छोड़े थे। इस कार्यक्रम का मकसद नदियों में मछलियों की आबादी बढ़ाना और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को बेहतर करना था। विशेषज्ञों का मानना है कि 40 किलो की यह मछली उसी प्रयास का नतीजा हो सकती है। जो यह दिखाती है कि नदियों में मछली पालन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

इस विशाल मछली को पकड़ने वाले मछुआरे रामू प्रसाद ने बताया कि हमने पहले भी बड़ी मछलियां पकड़ी हैं। लेकिन इतनी विशाल मछली पहली बार देखी। यह हमारे लिए गर्व की बात है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे मछली पालन का कारोबार बढ़ेगा और इलाके में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

जिला प्रशासन भी इस घटना से उत्साहित है। एक अधिकारी ने बताया कि रिवर रैंचिंग का उद्देश्य नदियों को फिर से मछलियों से भरपूर करना था। यह मछली उस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। हम इसे और आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। प्रशासन अब इस क्षेत्र को मछली पालन के हब के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाश रहा है।

यह घटना सोशल मीडिया पर भी छाई हुई है। लोग इस मछली की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं और कई इसे बिहार की प्राकृतिक संपदा का प्रतीक बता रहे हैं। कुछ पर्यावरणविदों ने इस मौके पर नदियों के संरक्षण की जरूरत पर भी जोर दिया है। ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में भी देखने को मिलें।

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