बिहार का पहला ग्रीन फील्ड प्रोजेक्टः NH-11 और SH-10 से जुड़ा होगा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार का पहला ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट पटना से पूर्णिया तक प्रस्तावित फोरलेन एक्सप्रेस-वे न केवल आवागमन को आसान बनाएगा, बल्कि राज्य के हजारों किसानों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा। हाल ही में इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिसके तहत छह जिलों के 29 प्रखंडों के 250 से अधिक गांवों में करीब 3381.2 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 9467.40 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिसमें भूमि अधिग्रहण से लेकर निर्माण कार्य शामिल हैं।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को बिहार के पहले ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। यह आधुनिक तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण से सुसज्जित होगा। यह एक्सप्रेस-वे वैशाली के मीरनगर से शुरू होकर समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा होते हुए पूर्णिया के चंद भट्ठी तक पहुँचेगा। इसकी कुल लंबाई 281.95 किमी होगी। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से इन जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों को राहत मिलेगी, जो वर्षों से हर मानसून में तबाही झेलते आ रहे हैं।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ी अधिसूचना जारी होने के साथ ही संबंधित किसानों के बीच 9467.40 करोड़ रुपये का वितरण किया जाएगा।  जिससे किसानों के जीवन में आर्थिक सुधार और समृद्धि की नई राहें खुलेंगी। भूमि अधिग्रहण के बाद जल्द ही एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। जोकि इन ग्रामीण इलाकों को शहरी परिवेश से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।

इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा और मधेपुरा जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके रास्ते में गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और कमला जैसी प्रमुख नदियों पर पुल बनाए जाएंगे। इससे बाढ़ के दौरान भी आवागमन बाधित नहीं होगा। इससे इन क्षेत्रों में न केवल बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी, बल्कि इन जिलों के हजारों ग्रामीणों को हर मौसम में बेहतर सड़क संपर्क भी प्राप्त होगा।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इससे लंबी दूरी को कम समय में तय किया जा सकेगा। यह एक्सप्रेस-वे राज्य के 11 राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और 10 राज्य राजमार्गों (SH) से जुड़ा होगा। जिससे बिहार के विभिन्न हिस्सों में आवागमन और सुगम हो जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत करीब 18042.14 करोड़ रुपये है और यह छह लेन वाले इस एक्सप्रेस-वे के साथ बिहार की सड़क संरचना को और अधिक मजबूत बनाएगी।

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