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ST समुदाय से DG रैंक तक पहुंचने वाली देश की पहली महिला IPS बनीं रांची की स्वाति लकड़ा

“स्वाति लकड़ा की यह उपलब्धि केवल एक पदोन्नति नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है। रांची की इस बेटी ने न केवल अपने राज्य बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है…

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज / मुकेश भारतीय)।  झारखंड की राजधानी रांची की बेटी स्वाति लकड़ा ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 1995 बैच की यह वरिष्ठ अधिकारी तेलंगाना में डायरेक्टर जनरल (DG) रैंक तक पदोन्नत होने वाली अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय की संभवतः देश की पहली महिला आईपीएस बन गई हैं।

उन्हें तेलंगाना में डायरेक्टर जनरल ऑफ स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स के पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रतीक बनकर उभरी है।

संघर्ष और समर्पण की कहानीः स्वाति लकड़ा की शुरुआती शिक्षा रांची के प्रतिष्ठित लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल में हुई, जहां उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की। इसके बाद 12वीं की शिक्षा उन्होंने डीएवी (अब जेवीएम श्यामली) से पूरी की।

उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वीमेन से राजनीति विज्ञान में स्नातक किया। उनके पिता साउथ ईस्टर्न रेलवे में सिविल इंजीनियर रहे, जिससे अनुशासन और सेवा भावना का संस्कार बचपन से ही मिला।

उतार-चढ़ाव से निखरी नेतृत्व क्षमताः करीब दो दशक लंबे अपने करियर में स्वाति लकड़ा ने कई चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन हर कठिनाई ने उन्हें और मजबूत बनाया।

तेलंगाना में उन्होंने विशेष रूप से महिला सुरक्षा को लेकर कई प्रभावी अभियान चलाए। उनके नेतृत्व में शुरू की गई पहलों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया बल्कि पुलिस के प्रति महिलाओं का भरोसा भी बढ़ाया।

महिला नेतृत्व का नया मानदंडः डीजी रैंक तक पहुंचना किसी भी आईपीएस अधिकारी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन एक आदिवासी महिला के रूप में इस मुकाम तक पहुंचना सामाजिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

यह उपलब्धि उस पारंपरिक सोच को चुनौती देती है, जिसमें प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं और वंचित समुदायों की भागीदारी सीमित मानी जाती रही है।

रांची से गहरा जुड़ावः स्वाति लकड़ा का रांची से भावनात्मक रिश्ता आज भी उतना ही मजबूत है। उन्होंने कहा कि रांची उनकी जन्मस्थली होने के साथ-साथ उनका ससुराल भी है। उनके पति बेनहुर महेश दत्त एक्का भी तेलंगाना कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं।

उन्होंने बताया कि वह समय-समय पर रांची आती रहती हैं और यहां के लोगों तथा संस्कृति से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहता है।

स्वाति लकड़ा का मानना है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। एक बार सफलता मिलने के बाद भी निरंतर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहना ही सच्ची संतुष्टि देता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि? यह उपलब्धि प्रशासनिक सेवाओं में सामाजिक समावेशन को मजबूती देती है। आदिवासी समुदाय की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। पुलिस व्यवस्था में महिला नेतृत्व को नई दिशा देने वाली है। झारखंड जैसे राज्यों के लिए गौरव का क्षण है।जो कहती है कि कड़ी मेहनत, समर्पण और ईमानदारी से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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