Ranchi Land Dispute: DCLR आदेश के 4 माह बाद CO का नया नोटिस, राजस्व प्रक्रिया है या मजाक?
Delay in implementing December 1, 2025 DCLR order sparks debate over land revenue process in Ranchi

रांची दर्पण डेस्क। रांची में एक जमीन विवाद (Ranchi Land Dispute) को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। मामला उस समय चर्चा में आया जब डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म (DCLR) के आदेश के लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के बावजूद संबंधित अंचलाधिकारी (CO) अमित भगत के हस्ताक्षर से नया नोटिस जारी कर दिया गया। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या राजस्व मामलों में आदेशों के अनुपालन की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध है।
सूत्रों के अनुसार संबंधित भूमि मामले में 1 दिसंबर 2025 को वाद संख्या-396/25 में DCLR स्तर से आदेश पारित किया गया था। लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि आदेश के अनुपालन में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और बाद में अचानक नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई। जबकि मामला सिंपल था कि 25 डिसमिल का प्लॉट 37 डिसमिल कैसे सकता है और 25 डिसमिल की पूर्व जमाबंदी कायम रहने के बाबजूद अतिरिक्त 12 डिसमिल की जमीन की जमाबंदी कर 37 डिसमिल की रशीद कैसे काटी जा सकती है।
इस घटनाक्रम ने स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब किसी मामले में उच्च राजस्व अधिकारी आदेश दे चुके हों, तब उसके बाद की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़नी चाहिए।
झारखंड में राजस्व व्यवस्था कैसे काम करती हैः झारखंड में जमीन से जुड़े अधिकांश प्रशासनिक मामलों की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के अधीन राजस्व विभाग के अधिकारियों पर होती है। जिले में राजस्व प्रशासन का नेतृत्व उपायुक्त (DC) करते हैं। उनके अधीन अंचलाधिकारी (Circle Officer) स्थानीय स्तर पर भूमि अभिलेख, राजस्व वसूली और जमीन से जुड़े मामलों को संभालते हैं। यही कारण है कि जमीन विवादों में CO और DCLR की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आदेश के बाद भी देरी: नया विवाद क्यों? राजस्व मामलों के विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी उच्च अधिकारी के आदेश के बाद सामान्यतः निम्न स्तर के अधिकारियों को उस आदेश का अनुपालन करना होता है।
यदि आदेश के बाद भी कार्रवाई लंबित रहती है और बाद में नई प्रक्रिया शुरू की जाती है तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं जैसे: क्या आदेश के अनुपालन में प्रशासनिक बाधा थी? क्या मामले में नए तथ्य सामने आए? या फिर प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का कोई तकनीकी कारण है? इन्हीं सवालों को लेकर शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों और जांच एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग की है।
इस तरह के विवाद कांके रांची में आम समस्याः कांके रांची में जमीन विवाद लंबे समय से प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। कई मामलों में स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठते रहे हैं।
हालांकि कई भूमि विवादों में अंचल स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच की जरूरत पड़ती है, क्योंकि भूमि रिकॉर्ड, म्यूटेशन और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अक्सर उनके कार्यालय से ही शुरू होती है। यही कारण है कि सरकार ने समय-समय पर राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निर्देश जारी किए हैं।
झारखंड सरकार ने राजस्व मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। यदि कोई आदेश, आवेदन या जमीन से जुड़ी प्रक्रिया तकनीकी आधार पर रोकी जाती है तो संबंधित अधिकारी को लिखित रूप में स्पष्ट कारण बताना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीन से जुड़े मामलों में मनमानी या अनावश्यक देरी न हो।
भूमि विवादों में आदेशों के अनुपालन में देरी को लेकर अदालतों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश लागू करने में देरी पर DCLR पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था और इसे गंभीर लापरवाही बताया था। इससे स्पष्ट है कि न्यायपालिका भी भूमि मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सजग है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता हैः कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी पक्ष को लगता है कि आदेश का पालन नहीं किया जा रहा या प्रक्रिया में त्रुटि है तो वह निम्न विकल्प अपना सकता है। उच्च प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष शिकायत। राजस्व अपील या उच्च न्यायालय में याचिका। फिलहाल इस मामले में संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी होता है तो वह इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकता है।
✔ (नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता के दावे के आधार पर तैयार किया गया है। प्रशासन की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)









