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पटना CBI कोर्ट ने बिहारशरीफ BSNL के 4 कर्मियों को दी 3-3 साल की सजा, 3.5 लाख का जुर्माना भी लगाया

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अदालत ने 30.72 लाख रुपये गबन मामले में दोषी कर्मियों को सख्त सजा दी, एक अभियुक्त बरी

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। करीब 31 लाख रुपये के बहुचर्चित गबन मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बीएसएनएल के चार पूर्व कर्मियों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और प्रत्येक पर साढ़े तीन लाख रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त तीन माह की सजा भुगतनी होगी।

यह फैसला केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) वन के विशेष न्यायाधीश अविनाश कुमार की अदालत ने सुनाया। अदालत ने मामले में एक आरोपी नवीन कुमार झा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया, जबकि चार अन्य अभियुक्तों को दोषी ठहराया।

कौन-कौन हुए दोषी? सजा पाने वालों में बिहारशरीफ स्थित बीएसएनएल कार्यालय के तत्कालीन इंचार्ज डीटीओ एवं नई सराय निवासी रामबदन सिंह, काउंटर कर्मचारी एवं दीदारगंज फतेहपुर निवासी उमेश सिंह, नई सराय कॉलोनी निवासी अनिल कुमार सिन्हा और नगरनौसा परवेज बीघा निवासी चंद्रशेखर चौधरी शामिल हैं।

अदालत ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधी पाया।

क्या था पूरा मामला? यह मामला वर्ष 1997 से 2002 के बीच का है। जांच के दौरान सामने आया कि अभियुक्तों ने आपसी साजिश के तहत कार्यालय में प्रतिदिन जमा होने वाली नकदी राशि में हेराफेरी की। काउंटर पर प्राप्त रकम को कैश बुक में कम दिखाया जाता था और शेष राशि का गबन कर लिया जाता था।

सीबीआई जांच में यह स्थापित हुआ कि इस षड्यंत्र के तहत कुल 30.72 लाख रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया। यह रकम उस समय के हिसाब से अत्यंत बड़ी मानी जाती थी।

आठ गवाहों ने मजबूत की अभियोजन की दलीलः मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए। दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपितों ने संगठित तरीके से सरकारी धन का गबन किया।

सीबीआई की जांच रिपोर्ट और लेखा-जोखा में पाई गई अनियमितताओं ने अभियुक्तों के खिलाफ ठोस आधार तैयार किया, जिसके बाद अदालत ने दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया।

भ्रष्टाचार पर सख्त रुखः इस फैसले को सरकारी विभागों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मामले में आए निर्णय ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग पर कानून की पकड़ देर से ही सही, लेकिन मजबूत रहती है। इस प्रकार के निर्णय भविष्य में सरकारी कार्यालयों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए नजीर साबित होंगे।

समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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