
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। राजधानी रांची के कांके अंचल अंतर्गत मौजा-नेवरी में आदिवासी भूमि पर कथित अवैध बसावट, भूमि दलालों की सक्रियता और निजी जमीन में जबरन रास्ता बनाने के आरोप को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समक्ष गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है। मामले में उपायुक्त (DC) रांची एवं वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) रांची से त्वरित हस्तक्षेप और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार मौजा-नेवरी, खाता संख्या-21 एवं प्लॉट संख्या-1338 खतियान तथा रजिस्टर-II में खेदुआ उरांव, पिता-कुवा उरांव के नाम दर्ज आदिवासी प्रकृति की भूमि है। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में कथित भूमि दलालों द्वारा इस जमीन पर गैर-आदिवासी लोगों को बसाया गया और वहां मकान निर्माण तक करा दिया गया।
शिकायत में दावा किया गया है कि कुछ लोग कथित एकरारनामा के आधार पर जमीन खरीदने की बात कह रहे हैं। जबकि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), 1908 के तहत अनुसूचित जनजाति की भूमि को गैर-आदिवासी को हस्तांतरित करने पर कड़े कानूनी प्रतिबंध हैं। बिना सक्षम अनुमति या वैधानिक प्रक्रिया के ऐसे हस्तांतरण को कानूनन अवैध माना जा सकता है।
क्या है CNT Act? छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (Chotanagpur Tenancy Act) 1908 झारखंड के आदिवासी भू-अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इसका उद्देश्य आदिवासी रैयतों की जमीन को अवैध खरीद-बिक्री और बाहरी कब्जे से बचाना है। इस कानून के तहत अनुसूचित जनजाति की भूमि का गैर-आदिवासी के पक्ष में हस्तांतरण सामान्य परिस्थितियों में प्रतिबंधित है और इसके लिए प्रशासनिक स्वीकृति सहित निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य मानी जाती है।
झारखंड में समय-समय पर आदिवासी भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए हस्तांतरण के आरोप उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में जिला प्रशासन को जांच और कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है।
निजी जमीन में बनाया जबरन रास्ताः मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष शिकायतकर्ता की निजी जेनरल प्रकृति की भूमि से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित रूप से अवैध बसावट के बाद कुछ लोगों द्वारा उसकी जमीन की चहारदीवारी कई बार तोड़ी गई और वहां से जबरन रास्ता बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूर्व में उस स्थान पर किसी प्रकार का सार्वजनिक अथवा निजी रास्ता मौजूद नहीं था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस संबंध में स्थानीय थाना को पूर्व में लिखित शिकायत दी गई थी तथा वरीय पुलिस अधीक्षक रांची को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर तनाव और विवाद की स्थिति बनी हुई है।
शिकायत में उठाई गई प्रमुख मांगेंः DC और SSP को भेजे गए आवेदन में आदिवासी भूमि पर कथित अवैध कब्जे की जांच, CNT Act उल्लंघन की जांच, कथित भूमि दलालों की भूमिका की जांच, निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करने, चहारदीवारी तोड़ने वालों पर प्राथमिकी दर्ज करने, जबरन रास्ता निर्माण रोकने, मजिस्ट्रेट जांच कराने और पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराने की मांग की गई है।









