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9 साल से सूनी दीवारें, बंद दरवाज़े: प्रेस क्लब भवन बना उपेक्षा की नजीर!

एक ओर जहां पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करते हैं, वहीं उनका स्वयं का कार्यस्थल उपेक्षा की चादर ओढ़े खड़ा हो, यह व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है...

बिहारशरीफ (नालंदा दर्पण)। नालंदा जिले में पत्रकारों की सुविधा के लिए वर्ष 2015-16 में लगभग 67 लाख रुपये की लागत से बनाए गए प्रेस क्लब भवन की हालत आज अत्यंत दयनीय हो चुकी है। शहर के वी-टू मॉल के पूरब स्थित यह दो मंजिला भवन, जो पत्रकारों के संवाद, सहयोग और सृजन के लिए तैयार किया गया था, आज भी उपयोग की प्रतीक्षा में खड़ा है।

निर्माण के नौ साल बीत जाने के बावजूद इस भवन में न बिजली कनेक्शन है, न पानी और न ही नियमित सफाई की कोई व्यवस्था। हद तो तब होती है, जब यह पता चलता है कि इस भवन का कभी उद्घाटन तक नहीं हुआ और न ही किसी पत्रकार या आमजन द्वारा इसका कोई औपचारिक उपयोग किया गया।

सूत्रों के अनुसार यह भवन सूचना एवं जन संपर्क विभाग की योजना के अंतर्गत भवन निर्माण निगम द्वारा बनाया गया था। इसमें एक मीटिंग हॉल, एक कार्यालय, ऊपर-नीचे दो-दो बड़े कमरे, शौचालय और रसोईघर की सुविधाएं हैं। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा और संचालन की स्पष्ट व्यवस्था के अभाव में यह भवन केवल एक बंद ढांचा बनकर रह गया है।

वर्तमान में प्रेस क्लब की दीवारों में दरारें पड़ने लगी हैं, दरवाजे और खिड़कियां जर्जर हो चुकी हैं। किसी भी प्रकार की मरम्मत या देखभाल का नामोनिशान नहीं है। यह भवन जैसी स्थिति में निर्माण एजेंसी द्वारा विभाग को सौंपा गया था, वैसी ही बंद अवस्था में आज भी पड़ा है।

बता दें कि राज्य सरकार ने करीब एक दशक पूर्व प्रत्येक जिले में प्रेस क्लब बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी। ताकि पत्रकारों को सुगम कार्यस्थल मिल सके। योजना के तहत इसका संचालन किसी पंजीकृत पत्रकार संघ को सौंपा जाना था। लेकिन नालंदा समेत कई जिलों में ऐसे सक्रिय पंजीकृत संघों की अनुपस्थिति ने योजना को कागज़ी दस्तावेज बनाकर रख दिया।

हाल ही में बिहार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सभी जिलों के डीपीआरओ को पत्र जारी कर बिजली-पानी कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा भवन मरम्मत की जिम्मेदारी भवन निर्माण निगम को सौंपने की बात भी कही गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जिस उद्देश्य से यह भवन बनाया गया था, वह पूर्णतः विफल हो गया है। अगर समय रहते प्रशासन ने इसकी देखरेख और संचालन व्यवस्था सुनिश्चित की होती तो आज यह भवन पत्रकारिता गतिविधियों का एक सक्रिय केंद्र होता। पत्रकारों ने मांग की है कि अब और विलंब किए बिना इस भवन को सक्रिय उपयोग में लाया जाए, ताकि यह नालंदा के मीडिया समुदाय के लिए एक जीवंत केंद्र बन सके।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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