खूंटी में मौत बनकर दौड़ा 18 चक्का ट्रक, एक परिवार के 7 लोगों की मौत
कर्रा-तोरपा मुख्य सड़क पर जोने-लुदरू मोड़ के पास रात करीब 9:30 बजे भीषण हादसा, पुलिया तोड़कर गड्ढे में गिरा अनियंत्रित ट्रक; दुर्घटना की आवाज सुनकर सड़क पर निकले थे लोग, कई घायल, चालक और खलासी फरार

रांची/खूंटी (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड के खूंटी जिले से गुरुवार की रात एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। कर्रा थाना क्षेत्र के कर्रा-तोरपा मुख्य सड़क पर जोने-लुदरू मोड़ के समीप तेज रफ्तार और अनियंत्रित 18 चक्का ट्रक ने एक ही परिवार के सात लोगों को कुचल दिया। इस भयावह हादसे में चार महिलाओं और तीन बच्चों की मौत हो गई। मृतकों में महज 11 महीने का मासूम सौरभ नायक भी शामिल है।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों को रौंदने के बाद भी ट्रक नहीं रुका। वह सड़क किनारे बनी पुलिया को तोड़ते हुए सीधे नीचे गड्ढे में जा गिरा। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। कुछ ही देर में आसपास के लोग जुट गए और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश शुरू हुई।
दूसरी दुर्घटना की आवाज सुनकर सड़क पर निकले थे लोग, तभी आ गया मौत का ट्रक
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार 5 नवंबर की रात करीब 9:30 से 9:45 बजे के बीच जोने-लुदरू मोड़ के पास पहले एक स्कूटी दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। उसकी आवाज सुनकर समीप स्थित कॉलोनी के लोग अपने घरों से बाहर निकले थे। कुछ लोग यह देखने पहुंचे थे कि आखिर सड़क पर क्या हुआ है और दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को किस तरह मदद पहुंचाई जाए।
इसी दौरान तोरपा की ओर से कर्रा की तरफ आ रहा तेज रफ्तार 18 चक्का ट्रक अचानक अनियंत्रित हो गया। सड़क पर मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ट्रक ने वहां जुटे लोगों को अपनी चपेट में ले लिया और कई लोगों को कुचलता हुआ पुलिया तोड़कर गड्ढे में जा गिरा।
एक हादसे को देखने और उसमें किसी की मदद करने के लिए घरों से निकले लोगों के लिए यह दूसरी दुर्घटना काल बन गई। देखते ही देखते खुशहाल परिवार के कई सदस्यों की जिंदगी खत्म हो गई।
मृतकों में 11 महीने का सौरभ और 19 वर्षीया अंजलि भी शामिल
इस भीषण दुर्घटना में जान गंवाने वालों की पहचान जयंती देवी, मानहु देवी, गोलू, तूती कुमारी, अंजलि कुमारी (19 वर्ष), पाको देवी (लगभग 65 वर्ष) और 11 महीने के सौरभ नायक के रूप में हुई है। सौरभ के पिता का नाम अजीत नायक बताया गया है।
एक ही परिवार के इतने सदस्यों की असामयिक मौत से जोने-लुदरू मोड़ के आसपास की बस्ती में मातम पसरा हुआ है। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक सामान्य पारिवारिक जीवन चल रहा था, वहां अब अपनों को खोने का असहनीय दुख है।
इस हादसे ने विशेष रूप से इसलिए भी लोगों को झकझोर दिया है कि मृतकों में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं शामिल हैं। 11 महीने के बच्चे की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।
दो घायल बच्चों को तत्काल कर्रा सीएचसी पहुंचाया गया
दुर्घटना की सूचना मिलते ही कर्रा थाना प्रभारी राजू कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया।
प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान दो घायल बच्चों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), कर्रा पहुंचाया गया। वहीं, अन्य घायलों को पुलिस वाहन से खूंटी सदर अस्पताल भेजा गया। बच्चों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भी बेहतर उपचार के लिए खूंटी सदर अस्पताल रेफर किया गया।
अस्पताल में चिकित्सकों की टीम घायलों के उपचार में जुट गई। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हुई है और उसका इलाज खूंटी सदर अस्पताल में चल रहा है।
ट्रक चालक और खलासी फरार, पुलिस कर रही जांच
दुर्घटना में शामिल ट्रक का पंजीकरण नंबर जेएच 02 एजे 1377 बताया गया है। यह 18 चक्का भारी वाहन तोरपा की ओर से आ रहा था। लोगों को कुचलने और पुलिया तोड़कर गड्ढे में गिरने के बाद ट्रक चालक और खलासी मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लेकर दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू कर दी है। चालक और खलासी की तलाश के साथ यह भी जांच का विषय है कि भारी वाहन अनियंत्रित कैसे हुआ और हादसे के समय उसकी वास्तविक गति कितनी थी।
हालांकि, दुर्घटना के कारणों को लेकर अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वाहन की तकनीकी स्थिति, चालक की लापरवाही और सड़क की परिस्थितियों समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
भारी वाहनों की रफ्तार और सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
कर्रा-तोरपा मुख्य सड़क पर हुई यह दुर्घटना एक बार फिर ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों से गुजरने वाले भारी वाहनों की तेज रफ्तार तथा सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आबादी के आसपास से गुजरने वाली सड़कों पर रात के समय तेज रफ्तार भारी वाहनों का परिचालन पैदल चलने वालों और स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। दुर्घटना के बाद सड़क पर जुटे लोगों की सुरक्षा और बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना भी ऐसे हादसों में जोखिम बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आबादी वाले क्षेत्रों में गति नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और भारी वाहनों की नियमित निगरानी सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।
पूरे इलाके में मातम, सात मौतों ने झकझोरा खूंटी को
जोने-लुदरू मोड़ पर हुए इस हादसे ने सिर्फ एक परिवार को नहीं, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक ही दुर्घटना में सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की खबर से आसपास के गांवों और बस्तियों में शोक का माहौल है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि लोग किसी दुर्घटना में फंसे व्यक्ति की मदद करने और हालात जानने के लिए घरों से निकले थे, लेकिन खुद एक अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आ गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आबादी के बीच से गुजरते भारी वाहन की रफ्तार पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पाया? क्या समय रहते प्रभावी यातायात निगरानी और सुरक्षा इंतजाम होते तो इन सात जिंदगियों को बचाया जा सकता था?
फिलहाल, कर्रा की इस त्रासदी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि सड़क पर लापरवाही सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेती, बल्कि कई परिवारों की पूरी दुनिया उजाड़ सकती है।









