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नौकरशाही का अनोखा कारनामाः DCM के कार्यक्रम में वेटर बनीं BDO-CDPO

नालंदा दर्पण डेस्क। बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में एक सरकारी कार्यक्रम ने उस समय सबको चौंका दिया, जब उपमुख्यमंत्री (DCM) सम्राट चौधरी और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी के स्वागत में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी पद की गरिमा को ताक पर रखकर वेटर की भूमिका निभाई। यह वाकया तब सामने आया, जब दोनों नेता हेलीकॉप्टर से हवेली खड़गपुर के एक स्कूल मैदान में उतरे और संत टोला स्थित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान में समीक्षा बैठक के लिए पहुंचे। लेकिन बैठक से पहले जो नजारा दिखा, उसने प्रोटोकॉल कर्तव्य और सम्मान की परिभाषा को ही उलट-पुलट कर रख दिया।

अधिकारी या वेटर? दौड़ती थालियों का अजब खेलः जिला प्रशासन ने वीवीआईपी मेहमानों के लिए शाकाहारी भोजन का शानदार इंतजाम किया था। लजीज व्यंजनों से सजी थालियां तैयार थीं और पेशेवर वेटर भी सेवा में जुटे थे। लेकिन जैसे ही मीडिया की नजर इस आयोजन पर पड़ी, एक हैरतअंगेज दृश्य सामने आया।

हवेली खड़गपुर की बीडीओ (BDO), टेटिया प्रखंड की बीडीओ और हवेली खड़गपुर की सीडीपीओ (CDPO) खाने से भरे ट्रे और सर्विंग बाउल लिए वीवीआईपी कमरों की ओर भागती नजर आईं। इनके साथ प्रभारी नगर आयुक्त, खेल पदाधिकारी, डीएम के ओएसडी, डीसीएलआर, डीपीआरओ और आपदा पदाधिकारी भी प्लेटों में पापड़, सलाद और व्यंजन लिए नेताओं की सेवा में जुटे थे। ये अधिकारी बार-बार अंदर-बाहर दौड़ रहे थे। मानो उनकी नौकरी का एकमात्र लक्ष्य नेताओं की थाली को भरा रखना हो।

प्रोटोकॉल की धज्जियां, चाटुकारिता की मिसालः हैरानी की बात यह थी कि मौके पर जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने इन जूनियर अधिकारियों को उनके कर्तव्य या प्रोटोकॉल की याद दिलाने की जहमत नहीं उठाई। दो महिला बीडीओ और एक सीडीपीओ की यह हालत देखकर ऐसा लगा कि वे अपने प्रशासनिक दायित्वों को भूलकर सिर्फ नेताओं की खुशामद में लगी थीं। यह दृश्य न सिर्फ हास्यास्पद था, बल्कि बिहार की उस नौकरशाही की मानसिकता को भी उजागर करता है, जो सत्ता के सामने नतमस्तक होने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती है।

सोशल मीडिया पर वायरल, जनता में गुस्साः घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे ये अधिकारी हांफते हुए खाने की ट्रे लिए वीवीआईपी तक पहुंच रहे थे। लोगों ने इसे बिहार की नौकरशाही का पतन करार दिया। एक यूजर ने लिखा है कि अगर अधिकारी ही वेटर बन जाएंगे, तो जनता की सेवा कौन करेगा? वहीं एक अन्य ने तंज कसा कि क्या अगला कदम मंत्रियों के लिए कपड़े धोना और जूते पॉलिश करना होगा? विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को हाथोंहाथ लिया और नीतीश सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि जब अधिकारी इस हाल में हैं तो आम जनता की सुनवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

बिहार की व्यवस्था का आईनाः यह पहला मौका नहीं है जब बिहार के अधिकारियों पर चाटुकारिता के आरोप लगे हों, लेकिन इस बार की घटना ने सारी हदें पार कर दीं। जानकारों का मानना है कि बिहार में चाटुकारिता अब तरक्की का सबसे आसान रास्ता बन गई है। जितना ज्यादा अधिकारी सत्तारूढ़ नेताओं की सेवा में जुटेंगे, उतनी ही उन्हें मनमानी करने की छूट मिलेगी। यह रवैया न सिर्फ जनता के प्रति जवाबदेही को कमजोर करता है, बल्कि भ्रष्टाचार और अकुशल प्रशासन को भी बढ़ावा देता है।

सवालों के घेरे में प्रशासनः हवेली खड़गपुर का यह वाकया महज एक घटना नहीं, बल्कि बिहार की उस व्यवस्था का प्रतीक है, जहां सत्ता की चाटुकारिता ही सफलता की कुंजी बन गई है। सवाल यह उठता है कि क्या बिहार के अधिकारी अपने कर्तव्यों को भूलकर सिर्फ नेताओं की सेवा के लिए नियुक्त किए जा रहे हैं? और अगर यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो क्या बिहार की जनता को कभी वह सम्मान और हक मिल पाएगा, जिसकी वह हकदार है? जवाब शायद समय ही देगा। लेकिन यह घटना निश्चित रूप से बिहार के प्रशासनिक ढांचे पर एक बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है।

Expert Media News

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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