बीपीएससी ने फैजल खान उर्फ़ खान सर को भेजा नोटिस, गंभीर आरोपों पर मांगे साक्ष्य

कहा था- "बकलोल कहि का," "बेशरम साला," और "कोढ़ी फूट जाएगा,। "बीपीएससी मिडिल क्लास बच्चों को मेंटली टॉर्चर कर रहा है और नौकरियों के पदों की धांधली कर रहा है।"

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने पटना के मशहूर कोचिंग संचालक फैजल खान उर्फ़ खान सर को एक कड़ा नोटिस भेजा है। इसमें खान सर द्वारा आयोग पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। नोटिस में आयोग ने खान सर के बयान और उनके द्वारा सोशल मीडिया एवं अन्य मंचों पर दिए गए वीडियो क्लिप्स का हवाला दिया है।

बीपीएससी ने अपने नोटिस में खान सर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने आयोग और इसके कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक मंच पर गंभीर और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। खान सर ने कथित तौर पर कहा था कि “बीपीएससी मिडिल क्लास बच्चों को मेंटली टॉर्चर कर रहा है और नौकरियों के पदों की धांधली कर रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि परीक्षा प्रक्रिया में अध्यक्ष की मनमानी चलती है और नॉर्मलाइजेशन के नाम पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

नोटिस में एक इंटरव्यू का जिक्र किया गया है। जिसमें खान सर ने आयोग के अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। इंटरव्यू में उनके कथित बयान जैसे “बकलोल कहि का,” “बेशरम साला,” और “कोढ़ी फूट जाएगा,” को न केवल अनुचित बताया गया है, बल्कि इसे आयोग की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि खान सर जैसे प्रतिष्ठित शिक्षक से ऐसी भाषा और आरोपों की अपेक्षा नहीं की जाती, क्योंकि यह छात्रों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का कारण बन सकता है। आयोग ने उनसे आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने को कहा है, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

खान सर से पहले बीपीएससी ने प्रसिद्ध रणनीतिकार प्रशांत किशोर को भी नोटिस जारी किया था। प्रशांत किशोर ने आयोग पर नौकरियों की बिक्री और बड़े घोटाले का आरोप लगाया था। आयोग ने उनसे भी सबूत मांगे हैं और साक्ष्य न देने पर आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।

दरअसल, बीपीएससी पर इन आरोपों ने राज्यभर में हलचल मचा दी है। छात्रों और आम जनता में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता है। वहीं, खान सर और प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद आयोग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

अब देखना यह होगा कि खान सर और प्रशांत किशोर अपने आरोपों को साबित करने के लिए क्या साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। वहीं आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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