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    Thursday, May 30, 2024
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      अब सरायकेला में कोरोना की दस्तक, मीडिया से डीसी का दुर्व्यवहार जारी

      सरायकेला (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। वैश्विक संकट कोरोनावायरस का संक्रमण कम होने का नाम नहीं ले रहा। झारखंड में आज भी संक्रमितों के मिलने का सिलसिला जारी रहा। वैसे अब तक ग्रीन जोन के रूप में रहा सरायकेला-खरसावां जिला में भी कोरोना संक्रमित मरीज की एंट्री हो गई है।

      पहले जमशेदपुर उसके बाद चाईबासा और आज सरायकेला जिला में भी संक्रमित मरीज पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया है।

      बताया जाता है कि संक्रमित मरीज इचागढ़ इलाके का रहने वाला है। बताया जाता है कि संक्रमित मरीज मुंबई के ठाणे से आया था, यह भी बताया जा रहा है कि उसके साथ 30- 40 मजदूर और आए थे, सभी प्रवासी मजदूर हैं और सभी को सरायकेला सामुदायिक भवन में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखा गया था।

      फिलहाल जिला प्रशासन कंटेनमेंट जोन चिन्हित करने में जुटी हुई है। हालांकि इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से काफी देर बाद भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। इसको लेकर स्थानीय मीडियाकर्मियों में नाराजगी भी देखी गई।

      जिले के अधिकारिक सोशल साइट के ग्रुप पर मीडिया कर्मियों ने जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रति नाराजगी भी प्रकट की।

      इन सबके बीच एक स्थानीय चैनल के रिपोर्टर ने जब जिले के उपायुक्त से जानने का प्रयास किया तो उन्होंने झल्लाते हुए कहा कि जिले में कोई पोजेटिव नहीं मिला है आराम से सो जाओ।

      कहते हैं कि झारखंड सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार सरायकेला- खरसावां जिला के इचागढ़ प्रखंड में एक कोरोना पॉजिटिव मरीज पाया गया है। इसकी पुष्टि कर दी गई है। जिसे टाटा मुख्य अस्पताल भिजवाया गया है।

      लेकिन शाम से ही स्थानीय मीडिया कर्मी जिले के सिविल सर्जन, स्वास्थ्य कर्मी, और उपायुक्त के साथ जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी से संपर्क साध रहे हैं, लेकिन किसी भी अधिकारियों द्वारा इसकी पुष्टि नहीं की जा रही है।

      जब एक मीडिया कर्मी ने जिले के उपायुक्त को फोन लगाया तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि एक भी पॉजिटिव नहीं पाया गया है, आराम से घर पर सोइए। वैसे जिले के उपायुक्त द्वारा मीडिया कर्मियों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार कोई नई बात नहीं है।

      बताते हैं कि उपायुक्त आम लोगों के साथ भी इसी तरह से पेश आते हैं। ऐसे में आप समझ सकते हैं की वैश्विक संकट के इस दौर में एक जिला अधिकारी होने के नाते उनका यह बर्ताव कितना अशोभनीय है।

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