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    Wednesday, July 24, 2024
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      जानें पटना गोलघर से जुड़े रोचक तथ्य और किस्से कहानियां

      पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज  / मुकेश भारतीय)। बिहार की राजधानी पटना अवस्थित गोलघर एक अद्वितीय ऐतिहासिक संरचना है, जिसे 1786 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के आदेश पर कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा बनाया गया था।

      29 मीटर ऊँचा और 125 मीटर परिधि वाला यह विशाल अनाज भंडार बिहार में अकाल की समस्या से निपटने के उद्देश्य से निर्मित किया गया था। इसकी विशेषता इसकी बिना स्तंभों के मोटी दीवारें और 145 सीढ़ियाँ हैं, जो पर्यटकों को पटना शहर का अद्भुत दृश्य प्रदान करती हैं। गोलघर आज भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करता है।

      पटना गोलघर की विशेषता इसकी बिना स्तंभों के निर्मित मोटी दीवारें हैं, जो इसे स्थायित्व और मजबूती प्रदान करती हैं। इस गोलाकार संरचना का निर्माण उस समय की सबसे उन्नत तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग करके किया गया था। इसके निर्माण में भारतीय वास्तुकला और ब्रिटिश इंजीनियरिंग का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। जिससे यह संरचना आज भी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल के रूप में प्रचलित है।

      गोलघर का इतिहास न केवल इसके अद्वितीय निर्माण को दर्शाता है, बल्कि उस समय की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का भी एक सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह संरचना आज भी पटना में एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है, जो इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।

      गोलघर की वास्तुकला और संरचनाः इसकी संरचना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सीढ़ियाँ हैं। जो इसके बाहरी गोलाकार दीवारों के साथ-साथ ऊपर की ओर जाती हैं। इन सीढ़ियों के माध्यम से ऊपर चढ़ते हुए, पर्यटक पटना शहर के खूबसूरत दृश्य का आनंद ले सकते हैं। गोलघर की दीवारें लगभग 3.6 मीटर मोटी हैं। जो इसे अत्यंत मजबूत और स्थायी बनाती हैं।

      गोलघर के निर्माण में विशेष तकनीकों और सामग्रियों का उपयोग किया गया था। इसमें चूना पत्थर और ईंटों का प्रयोग किया गया है, जो इसे अतिरिक्त मजबूती प्रदान करता है। इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई तकनीक आज भी वास्तुकला के क्षेत्र में एक मिसाल मानी जाती है। इस इमारत की विशेषता यह है कि इसमें कोई भी स्तंभ या पिलर नहीं है, जो इसके अंदर के विशाल खाली स्थान को और भी आकर्षक बनाता है।

      गोलघर की वास्तुकला और संरचना इसे न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर बनाती है, बल्कि यह आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए भी प्रेरणादायक है। इस इमारत का हर हिस्सा इसके निर्माणकर्ताओं की अद्वितीय कल्पना और मेहनत का प्रतीक है। गोलघर आज भी पटना के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है, जहाँ हर साल हजारों पर्यटक इसकी भव्यता और वास्तुकला का आनंद लेने आते हैं।

      गोलघर के निर्माण के समय की कुछ अनसुनी कहानियों में से एक यह है कि इसके निर्माण के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि निर्माण के प्रारंभिक वर्षों में इसके गुंबद की आकृति सही से नहीं बन पाई थी, जिसके चलते इसे फिर से निर्माण करना पड़ा। यह समय और संसाधनों की बड़ी चुनौती थी, लेकिन अंततः यह एक सफल संरचना के रूप में उभर कर सामने आया।

      इन रोचक तथ्यों और कहानियों के कारण गोलघर आज भी पटना के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रसिद्ध है। इसके साथ ही, यह संरचना हमें ब्रिटिश काल की स्थापत्य कला और उस समय की सामाजिक परिस्थितियों की भी याद दिलाती है।

      गोलघर के आसपास के आकर्षणः पटना का गोलघर अपने आप में एक अद्वितीय ऐतिहासिक स्थल है, लेकिन इसके आसपास भी कई महत्वपूर्ण और आकर्षक स्थल हैं जो पर्यटकों के लिए बेहद रोचक हो सकते हैं। इनमें गांधी मैदान प्रमुख है, जो पटना के बीचों-बीच स्थित एक विशाल सार्वजनिक मैदान है।

      यह मैदान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां कई महत्त्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। गांधी मैदान स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही सभाओं और रैलियों का मुख्य केंद्र रहा है।

      गोलघर के पास ही स्थित पटना म्यूजियम भी एक महत्वपूर्ण स्थल है। जिसे देखने का अवसर कोई नहीं छोड़ना चाहेगा। इस संग्रहालय में प्राचीन भारतीय कला, ऐतिहासिक वस्त्र, मूर्तियाँ, चित्रकला और पुरातात्विक अवशेषों का संग्रह है।

      पटना म्यूजियम में रखे गए बौद्ध, हिन्दू और जैन धर्म के अनेक अवशेष यहां की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बनाते हैं। यह संग्रहालय पटना के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को जानने और समझने का एक बेहतरीन माध्यम है।

      इसके अलावा, गंगा नदी के तट पर स्थित पटना घाट भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। गंगा नदी के किनारे बैठकर सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखना एक अद्वितीय अनुभव है।

      पटना घाटों पर होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी यहां की जीवन्तता को दर्शाते हैं। गंगा आरती और विभिन्न पर्वों के दौरान घाटों की रौनक देखने लायक होती है।

      इन सभी स्थलों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पटना को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करता है। गोलघर और इसके आसपास के आकर्षण न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि सामान्य पर्यटकों के लिए भी अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक हैं। पटना की यह धरोहरें यहां की संस्कृति और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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