Home शिक्षा डीएलएड कोर्स की बढ़ी मांग, जाने मूल वजह

डीएलएड कोर्स की बढ़ी मांग, जाने मूल वजह

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए जरूरी आहंता से बीएड को हटाने और सिर्फ डीएलएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को इसमें मौका देने के निर्णय के बाद डीएलएड कोर्स की डिमांड राज्य में एकाएक बढ़ गई है।

इस बार डीएलएड नामांकन के लिए हर सीट पर काफी टफ फाइट होगी और नामांकन पिछले बार की तरह आसान नहीं होगा। इसके पीछे का कारण है कि डीएलएड में जहां पहले एक से दो लाख ही आवेदन आते थे। इस बार सत्र 2024-26 के लिए 6.81 आवेदन आए हैं। जबकि राज्य भर के 306 डीएलएड कॉलेजों के 30,750 सीटों पर ही नामांकन होना है। एक सीट के लिए 20 से अधिक दावेदार हैं।

नामांकन के लिए फिलहाल टेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। टेस्ट में भी टफ फाइट होगा। 24 अप्रैल तक परीक्षा चलेगी। इसके बाद रिजल्ट और मेरिट लिस्ट आदि जारी किए जाएंगे और नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

जुलाई में सत्र होगा शुरूः डीएलएड कॉलेजों में नामांकन के लिए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय मेरिट लिस्ट व नामांकन, विकल्प लॉक करने, सीट आवंटन, स्लाइड अप इत्यादि की प्रक्रिया मई-जून 2024 में संभावित है। जून अंत तक नामांकन प्रक्रिया समाप्त कर ली जाएगी। जुलाई में सत्र भी शुरू कर दिया जाएगा।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अनुसार सभी संस्थानों में कुल सीट का 50 प्रतिशत विज्ञान तथा 50 प्रतिशत कला, वाणिज्य अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होगा। उर्दू विषय के अभ्यर्थियों के लिए 10 प्रतिशत स्थान आरक्षित होगा।

क्षैतिज आरक्षण के रूप यह आरक्षण लागू होगा, परंतु यह आरक्षण लाभ उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जिन्होंने प्लस टू स्तर की परीक्षा में उत्तीर्णता उर्दू विषय के साथ हासिल की है। नियमानुसार कुल स्वीकृत सीटों में से दिव्यांग के लिए पांच प्रतिशत, बिहार राज्य के निवासी सेवारत, सेवानिवृत, दिवंगत, भूतपूर्व सैनिक कर्मचारी के आश्रित पुत्र व अविवाहित पुत्री को पांच प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देय होगा।

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