डॉ. केडीपी वर्मा: झर गये पात, बिखर गई टहनी !

“राहें जिंदगी पर बहुत लोग गुजरते हैं, पर कुछ लोग निशां  कदमों पर छोड़ जाते हैं…

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क / जयप्रकाश नवीन।  नालंदा जिले का हर्ट चंडी के अनमोल धरोहर डॉ. केडीपी वर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। हम सब को अलविदा कह उस जहाँ चले गये, जहाँ से कोई लौट कर नहीं आता।

एक अफ्रीकी कहावत है। जब कोई उम्रदराज शख्श चला जाता है तो उसके साथ एक मुक्कमल पुस्तकालय चला जाता है। डॉ. केडीपी वर्मा सबके चहेते थे। कई पीढ़ियों को उन्होंने देखा है। आजादी की लड़ाई देखी, आजादी देखी,88 वसंत उन्होंने देखा। लेकिन उनके साथ एक किताबघर चला गया।

कह सकते हैं कोई कद से बड़ा नहीं हो सकता, कोई पद से बड़ा नहीं हो सकता। इसके लिए विचारों में उज्जास, ह्दय की विशालता और दृष्टि में विराटता चाहिए,ऐसे थे केडीपी वर्मा।

मृत्यु ध्रुव है, शरीर नश्वर है। कंचन की जिस काया को हम चंदन की चिता पर चढ़ा कर आएं, उसका नाश निश्चित था। लेकिन क्या यह जरुरी थी कि मौत इतनी चोरी छिपे आती।

आज चंडी की धरती शोकमग्ना है-उस धरती का लाल खो गया है। मानवता आज खिन्नमना है। उसका पुजारी सो गया। जन-जन की आंखों का तारा टूट गया। यवनिका पात हो गया।

एक सामाजिक पुरोधा, खेल का पुजारी, महफिलों का सरदार अपना अंतिम अभिनय दिखाकर अन्तर्ध्यान हो गया। हर चेहरा शोकाकुल है, हर आंख में पानी है। शायद ही आज कोई बहता पानी रोक रहा होगा। लेकिन कोई भी स्वीकार करने को तैयार नहीं कि डॉ. केडीपी वर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे।

अस्ताचल की ओर जाते हुए सूर्य की तरह हमेशा के लिए अतीत हो गये डॉ. केडीपी वर्मा। एक युग गुजर गया है आज। उस युग का राही गुजर गया। सड़क सूनी हो गई। सिसक उठा है सन्नाटा। यह आखिरी सलाम का वक्त है, यही चौवारा सत्य है।

सार एक सफर का, जीवन चाहे जितना बड़ा हो, लेकिन जिंदगानी यही ले आती है। अपना आंचल फैला देती है। मिट्टी वजूद को आपने भीतर समेट लेती है। जीवन की नाटक का एक ऐसा पटाक्षेप की उनकी अनमोल यादें रह जाएं,एक महागाथा थम सी गई।

डॉ. केडीपी वर्मा को मैं 1984 से जानता हूँ। जब मैं फतुहा से चंडी आया। पिछले 36 साल से मैं चंडी का होकर ही रह गया। इसी मिट्टी में खेला बढ़ा हुआ। उस समय चंडी में एकमात्र चिकित्सक के रूप में उनकी पहचान थी। बचपन में जब वे अपने क्लिनिक के बाहर बैठे हुए दिख जाते तो उस रास्ते से गुजर जाना शेर को चुनौती देने जैसे होता था।

उन्हें देखकर सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती थी। उन्हें भले हम न देखें, लेकिन उनकी नजर से चूक जाना संभव नहीं था। भले ही वह मरीजों से घिरे रहते थे, लेकिन उनकी नजर सड़क की ओर ही रहती थी। बुलाकर पेट को ऐसे पकड़ लेते थे। जैसे जान चली जाएगी।

उनके क्लिनिक में हमेशा राजनीतिक और शिक्षाविद लोगों की महफिल जमा रहती थी। प्रखंड के बीडीओ-सीओ थानेदार अन्य पदाधिकारी सब उनके कायल थे। उनकी महफिल का शोभा बनना अपने को सौभाग्यशाली मानते थे।

वे एक ऐसे इंसान थे, जो जाति,धर्म को नहीं मानते थे। वे बोलते हम सुनते उनके कहे पर मनन करते। कभी भी किसी विपरीत हालात में उन्हें विचलित नहीं देखा। चेहरे पर तेज और होठों पर मुस्कान लिए हमेशा अपने क्लिनिक में मुखातिब होते।

कहते हैं इंसान जितना बड़ा होता है, उतना ही सरल होता है। सच में वे बिल्कुल ऐसे ही थे। डॉ. केडीपी वर्मा चंडी के अनमोल धरोहर थे। चिकित्सा क्षेत्र में उन्होंने एक उंच मुकाम हासिल किया। नवादा के सिविल सर्जन भी रहे। राजनीति हो या सामाजिक या फिर सांस्कृतिक हर क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।

बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रामराज सिंह उनके काफी करीबी रहे। बाद में उनके पुत्र अनिल कुमार राजनीति में आएं तो उन्हें पुत्रवत् स्नेह दिया। चंडी विधानसभा के पहले प्रत्याशी मेजर देवलाल महतो नियमित अपने आखिरी समय तक उनके महफिल में शामिल होते थे। उस समय डॉ. यमुना प्रसाद के साथ इनकी तिगडी के चर्चे सब जगह थे।

मेरे पिताजी प्रो राजेश्वर प्रसाद जब चंडी में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को नये सिरे से शुरू किया तो उनका बहुत बड़ा योगदान रहा। चंडी में होली के मौके पर मूर्ख सम्मेलन के आयोजन को शुरु करने में उनका भी सहयोग रहा।

जब बिहार के शिक्षा मंत्री डॉ. रामराज सिंह का 1982 में निधन हुआ तो उनके नाम को जीवंता प्रदान करने के लिये डॉ. रामराज क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन का श्रेय उन्हें ही जाता है।

1995 के बाद जब डॉ. रामराज सिंह क्रिकेट टूर्नामेंट की जिम्मेवारी हम सब साथियों पर आई तो टूर्नामेंट के संयोजक रहें डॉ. केडीपी वर्मा से नजदीकी बढ़ती चली गई। टूर्नामेंट की तैयारी को लेकर रोज उन्हें फीडबैक के लिए मिलना होता था।

पिछले साल ही उन्हें एक कार्यक्रम में निमंत्रण देने के सिलसिले में मिला था। पहले तो पहचाने ही नहीं जब परिचय दिया तो बहुत कुछ बताने लगे। उन्होंने बताया कि दूसरे लोगों से तुम्हारे और पिताजी के बारे में जानकारी लेता रहता हूँ।

इधर बहुत दिनों से सोच रहा था उनसे मिलकर कुछ जानकारी हासिल करूँ, लेकिन इसी बीच उनके देहांत की खबर मिल गई। उनके साथ चंडी की कई ऐतिहासिक यादें दफन हो गई। उनके जाने से आज चंडी अनाथ हो गई।

वो जो आसमां को रौशन करता था, एक तारा टूट गया, वो जो दरिया को बांधे रखते थें,उसका किनारा टूट गया। आपकी याद में आंखें नम है,कुछ दिल की वादियों में उदासी है। आपकी याद में फिजा शोकाकुल है। चेहरे जर्द हैं। बुरे लोग आते हुए दुख देते हैं, अच्छे लोग जाते हुए गम दे जाते हैं।

“फिजा में ढूंढ रहें हैं हम उस सूरत को

हथेलियों पर अकीकत के चंद फूल लिए हुए”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क की ओर से दिवंगत डॉ. केडीपी वर्मा को खिराजे कीदत, सादर नमन……

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