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Terror of land mafia-brokers in Kanke: 3.8 एकड़ भूमि पर प्रशासन का बोर्ड, कार्रवाई या खानापूर्ति? क्या टूटेगा फर्जी रजिस्ट्री-जमाबंदी का नेटवर्क?

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। राजधानी रांची के कांके क्षेत्र में जमीन से जुड़े कारोबार और घोटालों (Terror of land mafia-brokers in Kanke) की खबरें लंबे समय से सुर्खियां बटोरती रही हैं। यहां भूमाफियाओं और दलालों की सक्रियता ने न केवल स्थानीय निवासियों को परेशान किया है, बल्कि सरकारी जमीनों को भी निशाना बनाया है।Kanke region Administration board on 3.8 acres of land 3

जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गैरमजरूआ खास भूमि पर सरकारी बोर्ड लगवाकर स्पष्ट कर दिया है कि यह जमीन पूरी तरह सरकारी है और इसका कोई भी अवैध क्रय-विक्रय नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई रांची की उपायुक्त मंजू भजयंत्री के निर्देश पर की गई है, जो भूमाफियाओं के खिलाफ रुख का संकेत देती है।

हालांकि कांके अंचल में जमीन से संबंधित फर्जीवाड़े की शिकायतें वर्षों से चली आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक यहां एक ही प्लॉट की कई फर्जी डीड तैयार करके बेच दी जाती हैं, और फिर अंचल कार्यालय से उसकी जमाबंदी भी करवा ली जाती है। इस खेल में कुछ रसूखदार कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत का आरोप लगता रहा है।

पूर्व में कई मामलों में जांच हुई है, जहां कुछ कर्मचारी निलंबित हुए, जेल गए और यहां तक कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी पूछताछ की। हालांकि इन कार्रवाइयों के बावजूद सिस्टम में कोई ठोस सुधार नहीं दिखाई दिया, जिससे आम नागरिकों का विश्वास डगमगाया है।

लोगों का कहना है कि अगर कोई साधारण व्यक्ति जमीन से जुड़े दस्तावेजों के लिए अंचल कार्यालय जाता है तो उसे महीनों इंतजार करना पड़ता है। लेकिन दलालों के जरिए अगर फाइल जमा की जाए तो काम चुटकी में हो जाता है, भले ही मामला कितना भी विवादित क्यों न हो।Kanke region Administration board on 3.8 acres of land 2

यह असमानता न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि सरकारी जमीनों को भी निजी हाथों में जाने का रास्ता खोलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कांके क्षेत्र की तेजी से बढ़ती आबादी और रियल एस्टेट की मांग ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है, जहां भूमाफिया सरकारी जमीनों तक को निजी बताकर खरीदारों को निशाना बनाते हैं।

इस बार प्रशासन की कार्रवाई में कांके अंचलाधिकारी ने मौजा सुकुरहुट्टू के थाना नंबर 154, खाता नंबर 455 के अंतर्गत आने वाले प्लॉट नंबर 1333, 1335 और 1336 पर ध्यान केंद्रित किया। यह कुल 3.08 एकड़ गैरमजरूआ खास भूमि है, जिस पर सरकारी बोर्ड लगाया गया है।

प्रशासन को सूचना मिली थी कि भूमाफिया इस जमीन को निजी संपत्ति बताकर अवैध सौदे करने की कोशिश कर रहे हैं। बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह भूमि सरकारी है और इसका कोई भी निजी लेन-देन अवैध माना जाएगा। इस कार्रवाई के दौरान सीआई चितरंजन टुडू और अमीन जितेंद्र साहू मौजूद थे, जिन्होंने बोर्ड की स्थापना सुनिश्चित की।Kanke region Administration board on 3.8 acres of land 1

यह कदम न केवल संभावित ठगी से आम नागरिकों को बचाने का प्रयास है, बल्कि भूमाफियाओं को चेतावनी भी देता है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत किया है। अगर प्रशासन इसी तरह सभी विवादित प्लॉटों पर कार्रवाई करे तो घोटालों पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या यह कार्रवाई एक स्थायी समाधान की दिशा में है? विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बोर्ड लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड रखना, नियमित जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

रांची जिला प्रशासन ने पहले भी ऐसे अभियान चलाए हैं, लेकिन समय के साथ वे ठंडे पड़ जाते हैं। अब उम्मीद है कि उपायुक्त मंजू भजयंत्री के नेतृत्व में यह अभियान निरंतर चलेगा और कांके क्षेत्र को भूमाफियाओं से मुक्त करने में सफल होगा।

फिलहाल इस कार्रवाई से संदेश साफ है कि प्रशासन जमीन घोटालों के प्रति सजग है और आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अगर इसी तर्ज पर अन्य क्षेत्रों में भी कदम उठाए जाएं तो रांची में जमीन से जुड़े विवादों में कमी आ सकती है।

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मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

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