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Sunday, September 26, 2021
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    नालंदाः 5 दिन बाद लोग सड़क पर उतरे तो पुलिस ने अपहृत की सड़ी-गली लाश बरामद कर यूं किया खुलासा

    बिहार शरीफ (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। नालंदा जिले के अस्थावां थाना क्षेत्र में हुई मधु यादव हत्याकांड के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को आज गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नालंदा के आरक्षी अधीक्षक हरि प्रसाथ एस ने मामले कि गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर बिहार शरीफ के नेतृत्व में थाना अध्यक्ष अस्थावां के साथ जिला और असूचना इकाई के पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों की एक विशेष पुलिस टीम का गठन कर कारवाई  करने का आदेश दिया था।

    पुलिस टीम के द्वारा कार्रवाई करते हुए कांड के नामजद अभियुक्त नेपाली यादव एवं उनके पुत्र संजय यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।

    बिहार शरीफ सदर डीएसपी डॉ. शिब्ली नोमानी ने बताया कि अनुसंधान के क्रम में तकनीकी स्तर हेतु असूचना के आधार पर पुलिस टीम के द्वारा कार्रवाई करते हुए कांड के नामजद अभियुक्त गुड्डू यादव उर्फ गुड्डू तमोलिया एवं शिव कुमार उर्फ ङमहा को गिरफ्तार किया गया एवं उसके निशानदेही पर वादी के पुत्र मधु यादव के शव को पचेतन गांव के दक्षिण 500 मीटर के पास  से बरामद  कर इस कांङ का सफल उद्भेदन कर लिया गया है।

    अभियुक्तों के द्वारा अपने अपराध स्वीकृति बयान में बताया गया है कि मृतक के चाचा कांड के नामजद अभियुक्त नेपाली यादव के द्वारा हत्या करने हेतु 48000 रुपए दिया थे एवं घटना कारित करने हेतु लगातार दबाव बना रहे थे।

    इसी क्रम में दिनांक 6 मार्च की रात्रि खाना पीने के बहाने मधु यादव को बुलाया गया तथा मोटरसाइकिल पर बैठा कर उसे रेलवे पूर्व श्रीचंदपुर के पास ले जाकर गला दबाकर उसकी निर्मम हत्या कर दी तथा साक्ष्य छिपाने के दृष्टिकोण से उसे बगल के पुराना कुआं में फेंक दिया गया।

    बता दें कि बीते कल अस्थावां गांव के लोगों ने अपहृत मधु यादव के मामले में पुलिस लापरवाही को लेकर राष्ट्रीय उच्च मार्ग को जाम कर भारी हंगामा मचाया था। आक्रोशित ग्रामीण पुलिस पर रिश्वत लेकर शिथिल होने के आरोप लगा रहे थे।

    यह मामला जब तूल पकड़ा तो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आज अहले सुबह मधु यादव की सड़ी-गली लाश एक कुआं से बरामद किया और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए मामले का खुलासा किया है।

    ऐसे में सवाल उठना लाजमि है कि अस्थावां थाना की पुलिस का 5 दिनों तक अपहरण जैसे गंभीर मामले में चुप्पी साधे रहने के क्या मायने हैं? कहीं इसके पीछे ग्रामीणों के आरोप ही मूल कारण तो नहीं?

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